Shri Ganesh Aarti With Lyrics: भगवान गणेश की आरती 'जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा' हर पूजा में की जाती है। चाहे पूजा किसी भी देवी देवता की हो इस आरती को किए बिना वो पूजा अधूरी मानी जाती है। हिंदू पौराणिक कथाओं अनुसार भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना गया है। इसलिए किसी भी शुभ काम या पूजा की शुरुआत गणेश जी को याद करते हुए की जाती है। शास्त्रों के अनुसार श्री गणेश की पूजा-अर्चना करने से कार्यों में विघ्न नहीं आता और सभी कार्य सफल हो जाते हैं। यहां जानिए भगवान श्री गणेश की आरती।
गणपति जी की आरती करते समय इस बात का ध्यान रखें कि आरती के हर शब्द का उच्चारण एकदम सही होना चाहिए। इस बात का भी ध्यान रखें कि गणेश जी की आरती किसी भी पूजा में सबसे पहले की जाती है इसके बाद ही अन्य देवी देवताओं की आरती होती है।
Shri Ganesh Aarti Written, भगवान श्री गणेश की आरती लिरिक्स के साथ
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
