Margashirsha Purnima Vrat Katha: मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा, पढ़ें महर्षि अत्रि और माता अनुसूया की कहानी
- Authored by: Srishti
- Updated Dec 4, 2025, 06:53 AM IST
Margashirsha Purnima Vrat Katha (मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा): आज मार्गशीर्ष पूर्णिमा का शुभ दिन है। ये दिन दत्तात्रेय जयंती और देवी अन्नपूर्णा जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। आज के दिन पूजा-पाठ के साथ कथा पढ़न का भी विधान है। यहां से आप मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा की व्रत कथा पढ़ सकते हैं।
मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा (pic credit: canva)
Margashirsha Purnima Vrat Katha (मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कथा): मार्गशीर्ष पूर्णिमा की कथा अनुसार, महर्षि अत्रि और उनकी पत्नी अनुसूया महान तपस्वी और धर्मपरायण थे। महर्षि अत्रि अपने तप और योग बल के कारण सभी में बहुत सम्मानित थे और उनकी पत्नी अनुसूया भी अपनी पतिव्रता और सतीत्व के लिए काफी प्रसिद्ध थीं।
एक दिन उनकी महान तपस्या और सद्गुणों से प्रभावित होकर त्रिदेव ने उनकी परीक्षा लेने का निर्णय लिया। त्रिदेव भिक्षुकों के रूप में माता अनुसूया के आश्रम में पहुंचे और उन्होंने उनसे भोजन की याचना की। लेकिन उन्होंने ये रखी कि माता अनुसूया को उन्हें निर्वस्त्र होकर भोजन कराना होगा। अनुसूया ने अपने सतीत्व और तपबल से उन तीनों को छोटे बच्चों में बदल दिया और फिर उन्हें निर्वस्त्र होकर भोजन कराया।
जब महर्षि अत्रि वापस लौटे, तो उन्होंने देखा कि तीन छोटे-छोटे बच्चे अनुसूया के पास खेल रहे हैं। इसके बाद अनुसूया ने पूरी घटना उन्हें बताई। महर्षि अत्रि ने अपने योगबल से तीनों के वास्तविक रूप को पहचान लिया। इसके बाद महर्षि अत्रि और अनुसूया की भक्ति और तप से प्रसन्न होकर त्रिदेव अपने वास्तविक रूप में वापस आ गए और उन्होंने उन्हें वरदान दिया।
त्रिदेव ने महर्ष के यहां एक पुत्र के रूप में जन्म लिया। कहते हैं महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र ही भगवान दत्तात्रेय के रूप में प्रसिद्ध हुए। इसलिए ही मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन भगवान दत्तात्रेय की भी पूजा की जाती है। इसके अलावा ये दिन भगवान विष्णु और शिव जी की आराधना के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।