अंदर से कैसे दिखता है, दुनिया का चौथा सबसे बड़ा हवाई अड्डा, देखें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहली झलक

भारत में 28 मार्च को दुनिया के चौथे सबसे बड़े एयरपोर्ट का उद्घाटन होना है। एशिया का सबसे बड़ा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का साइज इतना बड़ा है कि इसमें 50 हजार से ज्यादा फुटबॉल के मैदान समा जाएं। अभी इसका पहला चरण शुरू हो रहा है। नोएडा एयरपोर्ट की अंदर की तस्वीरें सामने आ गई हैं। उद्घाटन से पहले देखिए जेवर एयरपोर्ट की तस्वीरें।

Authored by: शिशुपाल कुमारUpdated Mar 27 2026, 17:22 IST
नोएडा इटरनेशनल एयरपोर्ट का क्षेत्रफलImage Credit : UP Govt/PTI01 / 07

नोएडा इटरनेशनल एयरपोर्ट का क्षेत्रफल

Noida International Airport को दुनिया का चौथा सबसे बड़ा एयरपोर्ट इसलिए है क्योंकि इसका कुल प्रस्तावित क्षेत्रफल बहुत विशाल है और इसे भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई चरणों में विकसित किया जा रहा है। इस एयरपोर्ट का कुल क्षेत्रफल करीब 5,000 हेक्टेयर (लगभग 12,350 एकड़) रखा गया है, जो कई बड़े अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स के बराबर या उनसे अधिक है।

 नोएडा एयरपोर्ट पर कितने रनवेImage Credit : UP Govt/PTI02 / 07

नोएडा एयरपोर्ट पर कितने रनवे

इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि यहां भविष्य में कुल छह रनवे बनाने की योजना है। दुनिया में बहुत कम एयरपोर्ट ऐसे हैं जहां इतनी बड़ी संख्या में रनवे मौजूद हों। अधिक रनवे होने का मतलब है कि एक समय में ज्यादा विमान उड़ान भर सकेंगे और लैंड कर सकेंगे, जिससे यात्री और कार्गो क्षमता दोनों में तेजी से बढ़ोतरी होगी।

Noiदेश का भविष्य होगा नोएडा एयरपोर्टImage Credit : UP Govt/PTI03 / 07

Noiदेश का भविष्य होगा नोएडा एयरपोर्ट

यह एयरपोर्ट एक ही बार में नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा रहा है। शुरुआती चरण में एक रनवे और सीमित यात्री क्षमता के साथ संचालन शुरू होगा, लेकिन अंतिम चरण में इसकी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी और यह बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और माल ढुलाई को संभाल सकेगा। Noida International Airport (नोएडा/जेवर एयरपोर्ट) की कई ऐसी खासियतें हैं, जो इसे भारत के सबसे आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार किए जा रहे एयरपोर्ट्स में शामिल करती हैं। यह एयरपोर्ट केवल एक हवाई अड्डा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के आर्थिक और औद्योगिक विकास का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।

भारत का नेट-जीरो एमिशन एयरपोर्टImage Credit : UP Govt/PTI04 / 07

भारत का नेट-जीरो एमिशन एयरपोर्ट

नोएडा एयरपोर्ट को पर्यावरण के लिहाज से भी खास बनाया जा रहा है। इसे भारत का पहला नेट-जीरो एमिशन एयरपोर्ट बनाने का लक्ष्य रखा गया है, यानी यहां कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम रखने और ऊर्जा की जरूरतों को स्वच्छ स्रोतों से पूरा करने की योजना है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल सिस्टम और स्मार्ट टर्मिनल सुविधाओं के जरिए यात्रियों को तेज और सुविधाजनक सेवाएं देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नोएडा एयरपोर्ट की लोकेशनImage Credit : UP Govt/PTI05 / 07

नोएडा एयरपोर्ट की लोकेशन

इस एयरपोर्ट की एक और महत्वपूर्ण विशेषता इसकी रणनीतिक लोकेशन है। यह दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों के करीब है, जिससे पर्यटन, व्यापार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। साथ ही, यह Indira Gandhi International Airport पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

नोएडा एयरपोर्ट की उड़ान क्षमताImage Credit : UP Govt/PTI06 / 07

नोएडा एयरपोर्ट की उड़ान क्षमता

पहले चरण में इस एयरपोर्ट पर हर साल लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों और करीब 1 लाख (100,000) फ्लाइट मूवमेंट संभालने की क्षमता होगी। जब एयरपोर्ट पूरी तरह विकसित हो जाएगा और सभी छह रनवे तैयार हो जाएंगे, तब यहां हर साल लगभग 7 करोड़ यात्रियों और 6–7 लाख फ्लाइट मूवमेंट संभालने की क्षमता हो सकती है। उस समय औसतन 1,500–1,800 विमान प्रतिदिन संचालन करने की क्षमता बनने का अनुमान है।

नोएडा एयरपोर्ट की कार्गो क्षमताImage Credit : UP Govt/PTI07 / 07

नोएडा एयरपोर्ट की कार्गो क्षमता

यह एयरपोर्ट खास तौर पर एयर कार्गो और लॉजिस्टिक्स को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यहां आधुनिक कार्गो टर्मिनल, कोल्ड स्टोरेज, वेयरहाउस और तेज कस्टम क्लियरेंस जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि कृषि उत्पाद, दवाइयां, इलेक्ट्रॉनिक्स और ई-कॉमर्स सामान को जल्दी और सुरक्षित तरीके से देश और विदेश भेजा जा सके। शुरुआती चरण में यहां करीब 8 लाख टन (0.8 मिलियन टन) कार्गो प्रतिवर्ष संभालने की क्षमता विकसित की जा रही है। भविष्य में सभी चरण पूरे होने के बाद यह क्षमता बढ़कर 20–25 लाख टन (2–2.5 मिलियन टन) कार्गो प्रतिवर्ष तक पहुंच सकती है।

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