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नोएडा एयरपोर्ट के 27 KM में 'लेजर नो-गो जोन'; नियम तोड़ा तो होगा एक्शन; विमानन सुरक्षा को लेकर सख्ती

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 27 किलोमीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति लेजर बीम या प्रतिबंधित कृत्रिम रोशनी का इस्तेमाल विमानन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा।

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (फाइल फोटो)

Photo : PTI

नोएडा : नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नोएडा जिला प्रशासन ने एयरपोर्ट के 27 किलोमीटर के दायरे में लेजर बीम, शो, डिस्प्ले और अन्य तरह की कृत्रिम रोशनी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। प्रशासन ने यह कदम विमानन सुरक्षा से जुड़े संभावित जोखिमों को देखते हुए उठाया है। जिला प्रशासन की ओर से मंगलवार को जारी बयान में कहा गया कि यह प्रतिबंध संबंधित नियमों के तहत लागू किया गया है।

विमानन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पर नजर

जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा कि एयरपोर्ट के निर्धारित 27 किलोमीटर के प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति लेजर बीम या प्रतिबंधित कृत्रिम रोशनी का इस्तेमाल विमानन सुरक्षा नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। उन्होंने कहा कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ लागू कानूनों के तहत जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लेजर बीम पर रखी जाएगी निगरानी

प्रशासन के मुताबिक, प्रतिबंधित क्षेत्र में कार्यक्रमों, शो और डिस्प्ले के लिए इस्तेमाल होने वाली कृत्रिम रोशनी भी इसके दायरे में आएगी। खास तौर पर ऐसी रोशनी और लेजर बीम पर निगरानी रखी जाएगी, जो विमानों के संचालन के दौरान पायलटों के लिए परेशानी या सुरक्षा संबंधी खतरा पैदा कर सकती है।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कब हुआ उद्घाटन

गौरतलब है कि जेवर में स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन 28 मार्च 2026 को हुआ था और यहां से वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन 15 जून 2026 से शुरू हुआ। ऐसे में एयरपोर्ट के आसपास विमानन सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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