Famous Shiv Temples In Delhi NCR: सावन का पावन महीना अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। ऐसे में अगर आप इस बार शिवभक्ति के साथ किसी प्राचीन मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं तो दिल्ली-NCR से बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं है। दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ और हापुड़ के आसपास ऐसे कई शिव मंदिर हैं, जिनका धार्मिक महत्व बेहद पुराना है और जिनसे महाभारत और प्राचीन पौराणिक परंपराओं की कड़ियां जुड़ी हैं। इन मंदिरों की खासियत केवल इनका सालों पहले स्थापित होना नहीं है। इनमें से कुछ मंदिरों में तो महाभारत काल के समय पांडवों से जुड़ी मान्यताएं हैं और कहीं रावण और मंदोदरी की कथा मिलती है तो कोई प्राचीन शिव परंपरा और गंगा तीर्थ की धार्मिक विरासत को समेटे हुए है। 28 अगस्त को सावन खत्म होने से पहले इन मंदिरों की एक यात्रा की जा सकती है। आइए जानते हैं कि ये मंदिर कौन से हैं।
दिल्ली के निगम बोध घाट और यमुना बाजार के पास स्थित नीली छतरी मंदिर को दिल्ली के प्राचीन शिव मंदिरों में गिना जाता है। मंदिर का इतिहास महाभारत के पांडवों और विशेष रूप से राजा युधिष्ठिर से जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार युधिष्ठिर ने यहां भगवान शिव की स्थापना की थी और इसी क्षेत्र में अश्वमेध यज्ञ भी किया था। मंदिर की नीली छतरीनुमा संरचना इसकी सबसे अलग पहचान है। इसी वजह से इसे नीली छतरी मंदिर कहा जाता है। मंदिर यमुना के पुराने तटवर्ती क्षेत्र और निगम बोध घाट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बीच स्थित है। सावन में यहां भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने के लिए भक्त पहुंचते हैं।
गाजियाबाद का दूधेश्वर नाथ महादेव मंदिर दिल्ली-NCR के सबसे प्रसिद्ध प्राचीन शिव मंदिरों में शामिल है। इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है। स्थानीय धार्मिक इतिहास में इस स्थल को रावण और उनके पिता विश्रवा की तपस्या का स्थान बताया गया है। मंदिर का नाम दूधेश्वर पड़ने के पीछे भी धार्मिक कथा है। मान्यता है कि यहां एक गाय अपना दूध चढ़ा देती थी, जब यहां खुदाई की गई तो शिवलिंग धरती से प्रकट हुआ। माना जाता है कि वर्तमान मंदिर में छत्रपति शिवाजी महाराज ने पूजा की थी और इसका जीर्णोद्धार कराया था। सावन में दूधेश्वर नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ रहती है। दिल्ली-NCR में रहने वालों के लिए यह एक ऐसा शिवधाम है जहां प्राचीन धार्मिक कथा और जीवंत मंदिर परंपरा दोनों साथ मिलती हैं।
पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित गौरी शंकर मंदिर दिल्ली के सबसे पुराने शिव मंदिरों में से एक है। दिल्ली पर्यटन की पुरानी दिल्ली हेरिटेज वॉक में भी इसे प्रमुख ऐतिहासिक पड़ाव के रूप में शामिल किया गया है। मंदिर में मौजूद शिवलिंग को करीब 800 वर्ष पुराना बताया गया है। मंदिर की धार्मिक पहचान भगवान शिव और माता गौरी के संयुक्त स्वरूप से जुड़ी है। मंदिर का इतिहास मराठा काल की परंपरा से भी जुड़ा हुआ है। उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार मंदिर की वर्तमान इमारत का निर्माण 18वीं शताब्दी में मराठा सैनिक आपा गंगाधर ने कराया था। यहां विराजमान शिवलिंग इससे कहीं पुराना बताया जाता है। यह मंदिर उन लोगों के लिए खास है जो सावन में दर्शन के साथ पुरानी दिल्ली की विरासत भी देखना चाहते हैं। यहां दर्शन के बाद चांदनी चौक की ऐतिहासिक गलियों और आसपास के पुराने बाजारों की सैर भी की जा सकती है।(Photo Credit ani)
दिल्ली-NCR से थोड़ा बाहर लेकिन NCR की सीमा में आने वाला गढ़मुक्तेश्वर प्राचीन धार्मिक नगर है। हापुड़ जिला प्रशासन के अनुसार इसका प्राचीन नाम शिववल्लभिबपुर था और यह स्थान प्राचीन काल से धार्मिक केंद्र रहा है। गढ़मुक्तेश्वर की धार्मिक पहचान मुक्तेश्वर महादेव मंदिर से भी जुड़ी है। मुक्तेश्वर महादेव के दर्शन के साथ गंगा स्नान और ब्रजघाट की शाम की आरती इस यात्रा को और खास बना देती है। दिल्ली-NCR से सड़क के रास्ते यहां पहुंचना भी आसान है। हापुड़ जिला प्रशासन के मुताबिक गढ़मुक्तेश्वर दिल्ली से लगभग 98 किलोमीटर दूर स्थित है।(प्रतीकात्मक फोटो)
मेरठ का बिल्वेश्वर नाथ मंदिर भी प्राचीन शिवधाम है। मंदिर से जुड़ी धार्मिक कथा के अनुसार यहां पर रावण की पत्नी मंदोदरी ने भगवान शिव की पूजा की थी। मंदिर का वातावरण दूसरे बड़े शहरी मंदिरों से अलग दिखाई देता है। यहां सावन और शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर का प्राचीन धार्मिक संबंध और मंदोदरी की कथा इसे सामान्य शिव मंदिर से अलग पहचान देता है।(प्रतीकात्मक फोटो)