Aaj 12 July Ko Kya Hai : भगवान शिव की आराधना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। यदि प्रदोष व्रत रविवार के दिन पड़े तो उसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस बार आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत कई मायनों में खास है, क्योंकि इसी दिन आषाढ़ मासिक शिवरात्रि का भी दुर्लभ संयोग बन रहा है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या आज 12 जुलाई को प्रदोष व्रत है? क्या आज त्रयोदशी तिथि है? जुलाई का पहला प्रदोष कब पड़ रहा है?
क्या आज 12 जुलाई को प्रदोष व्रत है
जी हां। वैदिक पंचांग के अनुसार 12 जुलाई 2026, रविवार को आषाढ़ कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि होने के कारण रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। रविवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत सूर्य देव और भगवान शिव दोनों की कृपा प्राप्त करने वाला माना जाता है।
इस बार का रवि प्रदोष इसलिए भी विशेष माना जा रहा है क्योंकि इसी दिन आषाढ़ मासिक शिवरात्रि का शुभ संयोग भी बन रहा है। ऐसे दुर्लभ योग में भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक और व्रत का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
क्या आज त्रयोदशी तिथि है
हां, आज आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 12 जुलाई 2026, सुबह 2:04 बजे हुआ था और यह तिथि 12 जुलाई 2026, रात 10:29 बजे समाप्त हो जाएगी। प्रदोष काल के दौरान त्रयोदशी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए 12 जुलाई को ही रवि प्रदोष व्रत रखा जाएगा।
जुलाई का पहला प्रदोष व्रत कब है
जुलाई 2026 का पहला प्रदोष व्रत 12 जुलाई, रविवार को पड़ रहा है। इसे रवि प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से पापों का क्षय होता है, रोग और कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
प्रदोष व्रत का शुभ पूजा मुहूर्त
प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करना सबसे श्रेष्ठ माना गया है। प्रदोष काल शाम 7:22 बजे से रात 9:24 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में शिवलिंग का अभिषेक, मंत्र जाप, शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है।
रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
प्रदोष व्रत के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। इसके बाद शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शुद्ध जल से अभिषेक करें। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक के पुष्प, चंदन, अक्षत, धूप, दीप, लौंग, इलायची, सुपारी, मौसमी फल और मिष्ठान अर्पित करें। पूजा के दौरान 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें, शिव चालीसा और प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें। अंत में घी का दीपक जलाकर भगवान शिव की आरती करें। शाम को पुनः स्नान कर प्रदोष काल में विधि-विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।
रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल वह समय है जब भगवान शिव कैलाश पर्वत पर अपने भक्तों को विशेष आशीर्वाद प्रदान करते हैं। रविवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत सूर्य ग्रह से जुड़े दोषों को शांत करने वाला भी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत और पूजा करने से स्वास्थ्य, मान-सम्मान, यश और आयु में वृद्धि होती है। इस बार प्रदोष व्रत के साथ मासिक शिवरात्रि का संयोग बनने से शिव उपासना का महत्व और भी बढ़ गया है। ऐसे में शिवभक्त रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप और शिवपुराण का पाठ भी कर सकते हैं।
