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हिमालय के वो चेहरे जो धीरे-धीरे हो रहे ‘गायब’, सद्गुरु की नई किताब में दिखेगी अनदेखी दुनिया

Sadhguru Photography Book: सद्गुरु की नई किताब 'Disappearing Faces' हिमालय के दूरदराज इलाकों में रहने वाले लोगों और समुदायों की अनदेखी दुनिया को तस्वीरों के जरिए सामने लाई है। आइए जानते हैं इस अनोखी पुस्तक के बारे में...

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सद्गुरु की किताब में दिखी हिमालय की दुनिया!

Sadhguru Photography Book: हिमालय सिर्फ बर्फ से ढकी चोटियों, गहरी घाटियों और तीर्थस्थलों का नाम नहीं है। इसकी असली पहचान उन लोगों से भी है, जिन्होंने सदियों से कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच प्रकृति के साथ अपना जीवन बुना है। अब इन्हीं लोगों के चेहरों और उनकी अनकही कहानियों को सद्गुरु की नई फोटो पुस्तक 'Disappearing Faces' में जगह मिली है। पेंगुइन इंडिया प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक हिमालय के उन दूरदराज इलाकों और समुदायों की झलक देती है, जो आधुनिकता के बढ़ते प्रभाव के बीच तेजी से बदल रहे हैं।

कैमरे में कैद हिमालय की अनदेखी दुनिया

नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में 11 अगस्त को लॉन्च हुई इस पुस्तक में नेपाल और तिब्बत के सुदूर हिमालयी क्षेत्रों में सद्गुरु द्वारा खींची गई तस्वीरों का संग्रह है। ये तस्वीरें किसी पर्यटन स्थल की सामान्य तस्वीरों से अलग हैं। इनमें पहाड़ों के बीच रहने वाले आम लोगों के चेहरे केंद्र में हैं। इसमें ऐसे चेहरे शामिल हैं, जिन पर मौसम, ऊंचाई, कठिन जीवन और प्रकृति के साथ लंबे जुड़ाव की छाप साफ दिखाई देती है।

सद्गुरु दशकों से हिमालय की यात्राएं करते रहे हैं। इन्हीं यात्राओं में कैमरा उनके साथ रहा और धीरे-धीरे उनके सामने आए चेहरों ने एक दृश्य कहानी का रूप ले लिया है।

चेहरों पर दिखती है मौसम की कहानी

पुस्तक की सबसे खास बात यह है कि इसमें हिमालय को केवल प्राकृतिक सुंदरता के नजरिए से नहीं देखा गया है। यहां चेहरे खुद एक दस्तावेज बन जाते हैं। तेज धूप, बर्फीली हवाएं, ठंड, गर्मी और बदलते मौसमों के बीच जीने वाले लोगों के चेहरे अपने आप में एक लंबी कहानी कहते हैं। सद्गुरु के मुताबिक, ये चेहरे ऐसे दौर की झलक देते हैं जो आने वाले समय में शायद दिखाई न दे। उनके अनुसार इन चेहरों पर आधुनिक सूचनाओं के बजाय प्रकृति और इंद्रियों से मिले अनुभवों की छाप नजर आती है।

बदलते समय का दस्तावेज है ये पुस्तक

सद्गुरु द्वारा तैयार की गई ‘Disappearing Faces’ नाम की पुस्तक को केवल फोटोग्राफी की किताब कहना शायद इसके उद्देश्य को सीमित कर देगा। यह उन समुदायों का दृश्य दस्तावेज भी है, जिनका जीवन जमीन, पानी, हवा और मौसम के साथ बेहद गहरे रिश्ते पर टिका रहा है। आधुनिक जीवनशैली, बेहतर कनेक्टिविटी और तेजी से बदलती सामाजिक परिस्थितियों के बीच हिमालय के कई पारंपरिक समुदायों का जीवन भी परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में ये तस्वीरें बीते और बदलते समय के बीच एक पुल की तरह दिखाई देती हैं।

कैलाश से जुड़ा दशकों पुराना रिश्ता

सद्गुरु का हिमालय से जुड़ाव भी इस पुस्तक की पृष्ठभूमि को खास बनाता है। उन्होंने 2006 में मानसरोवर और माउंट कैलाश की यात्रा की थी और इसके बाद भी कई बार हिमालय की यात्रा करते रहे हैं। वे कैलाश की यात्राओं पर जाने वाले साधकों का मार्गदर्शन भी करते रहे हैं। साल 2025 में कैलाश की मोटरसाइकिल यात्रा के बाद उनके इस वर्ष भी मोटरसाइकिल से वहां लौटने की बात सामने आई है। इस तरह हिमालय उनके लिए केवल यात्रा का गंतव्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभव, प्रकृति और मानव जीवन को करीब से देखने का माध्यम भी रहा है।

जब तस्वीरें सुनाती है असली कहानी!

‘Disappearing Faces’ की खासियत शायद यही है कि इसमें तस्वीरें केवल चेहरे नहीं दिखातीं, बल्कि उनके पीछे छिपे जीवन को महसूस करने का अवसर देती हैं। बदलते हिमालय के बीच ये चेहरे आने वाली पीढ़ियों के लिए उस दुनिया की याद बन सकते हैं, जहां इंसान और प्रकृति के बीच दूरी आज की तुलना में कहीं कम थी।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

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