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Rahat Indori Shayari: ​किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है..., पुण्यतिथि पर पढ़ें राहत इंदौरी के ये मशहूर शेर

  • Authored by: कुलदीप राघव
  • Updated Aug 11, 2023, 06:31 AM IST

Rahat Indori Shayari: राहत इंदौरी का जन्म राहत कुरैशी के रूप में 1 जनवरी, 1950 को इंदौर में रफतुल्लाह कुरैशी (पिता) और मकबूल उन निसा बेगम (मां) के घर हुआ था। राहत इंदौरी को शायरी करने का शौक था और वह मंचों पर ऐसे प्रस्तुति देते कि सुनने वाले खूब ठहाके लगाते। हिंदुस्तान के लोकप्रिय शायरों में शुमार डॉ राहत इंदौरी की आज (11 अगस्त) पुण्यतिथि है।

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Rahat Indori Shayari

Rahat Indori Shayari, Rahat Indori Famous Shayari: देश-दुनिया में मशहूर हिंदुस्तान के लोकप्रिय शायरों में शुमार डॉ राहत इंदौरी की आज (11 अगस्त) पुण्यतिथि है। राहत इंदौरी का जन्म राहत कुरैशी के रूप में 1 जनवरी, 1950 को इंदौर में रफतुल्लाह कुरैशी (पिता) और मकबूल उन निसा बेगम (मां) के घर हुआ था। उनके पिता एक कपड़ा मिल मजदूर थे और उनकी मां एक गृहिणी थीं। राहत इंदौरी ने अपनी स्कूली शिक्षा नूतन स्कूल से पूरी की। साल 1973 में उन्होंने इस्लामिया करीमिया कॉलेज, इंदौर से ग्रेजुएशन किया।

वर्ष 1975 में, उन्होंने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल से उर्दू साहित्य में स्नातकोत्तर किया। वर्ष 1985 में उनकी थीसिस 'उर्दू में मुशायरा' के लिए उन्हें मध्य प्रदेश के भोज विश्वविद्यालय से उर्दू साहित्य में पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया। राहत इंदौरी को शायरी करने का शौक था और वह मंचों पर ऐसे प्रस्तुति देते कि सुनने वाले खूब ठहाके लगाते। कोरोना से जंग के दौरान आज उनका निधन हो गया था। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम आपके लिए लाए हैं राहत इंदौरी के कुछ मशहूर शेर जिन्हें पढ़कर आप रोमांचित हो जाएंगे।

Rahat Indori Shayari in Hindi, Urdu

कॉलेज के सब बच्चे चुप हैं काग़ज़ की इक नाव लिए

चारों तरफ़ दरिया की सूरत फैली हुई बेकारी है

कहीं अकेले में मिल कर झिंझोड़ दूँगा उसे

जहाँ जहाँ से वो टूटा है जोड़ दूँगा उसे

रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है

चाँद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है

सभी का खून है शामिल यहाँ की मिटटी में

किसी के बाप का हिंदुस्तान थोड़ी है

Rahat Indori ki Shayari

हम से पहले भी मुसाफ़िर कई गुज़रे होंगे

कम से कम राह के पत्थर तो हटाते जाते

मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए

और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूं हैं

तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो

मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो

Rahat Indori ki Famous Shayari

ऐसी सर्दी है कि सूरज भी दुहाई मांगे

जो हो परदेस में वो किससे रज़ाई मांगे

अपने हाकिम की फकीरी पे तरस आता है

जो गरीबों से पसीने की कमाई मांगे

जुबां तो खोल, नजर तो मिला, जवाब तो दे

मैं कितनी बार लुटा हूँ, हिसाब तो दे

Rahat Indori Love Shayari

फूलों की दुकानें खोलो, खुशबू का व्यापार करो

इश्क़ खता है तो, ये खता एक बार नहीं, सौ बार करो

बहुत ग़ुरूर है दरिया को अपने होने पर

जो मेरी प्यास से उलझे तो धज्जियां उड़ जाएं

किसने दस्तक दी, दिल पे, ये कौन है

आप तो अन्दर हैं, बाहर कौन है

आँख में पानी रखो होंटों पे चिंगारी रखो

ज़िंदा रहना है तो तरकीबें बहुत सारी रखो

Rahat Indori Shayari in Hindi

उस आदमी को बस इक धुन सवार रहती है

बहुत हसीन है दुनिया इसे ख़राब करूं

ये हादसा तो किसी दिन गुजरने वाला था

मैं बच भी जाता तो एक रोज मरने वाला था

मेरा नसीब, मेरे हाथ कट गए वरना

मैं तेरी माँग में सिन्दूर भरने वाला था

अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए

कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए

कुलदीप राघव
कुलदीप राघवauthor

कुलदीप राघव प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों से अधिक अनुभव का रखने वाले पत्रकार हैं। टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में वह एजुकेशन सेक्शन को लीड कर रहे हैं। एजुकेशन सेक्टर की गहरी समझ और लगातार फील्ड-ओरिएंटेड रिपोर्टिंग के कारण कुलदीप इस बीट के भरोसेमंद पत्रकारों में गिने जाते हैं। वे स्कूल और उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाएं, एडमिशन और काउंसलिंग प्रोसेस, स्कॉलरशिप, करियर गाइडेंस, जॉब अलर्ट, स्किल डेवलपमेंट और युवाओं से जुड़े सामाजिक-शैक्षणिक मुद्दों पर तथ्यात्मक और आसान भाषा में खबरें पब्लिश करते हैं। कुलदीप ने अब तक 18,000 से अधिक बाइलाइन स्टोरीज लिखी हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, विश्लेषण, डेटा आधारित रिपोर्ट्स और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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