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Raag Bhatiyaar: पत्नी से धोखा खाये राजा ने रचा था ऐसा संगीत, बेवफाई के दौर में उम्मीद का सुर है राग भटियार

What is Raag Bhaityaar: राग भटियार जितना मधुर है इसकी उत्पत्ति की कहानी उतनी ही रोचक है। उम्मीद की किरण जगाने वाले इस राग का मूल बेवफाई में छिपा है। दरअसल सदियों से लोग रिश्तों में धोखा देते आ रहे हैं। इस धोखे से कोई बिखरा तो किसी ने कुछ ऐसा संवार दिया कि वह हमेशा के लिए अमर हो गया। ऐसे ही एक धोखे से बना था राग भटियार।

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कहानी राग भटियार की

90 के दशक में दूरदर्शन पर एक ऐड आता था। इस ऐड में सिर्फ एक लाइन थी- पूरब से सूर्य उगा, फैला उजियारा, जागी हर दिशा-दिशा, जागा जग सारा..। इस ऐड को अपनी आवाज से सजाया था बॉलीवुड सिंगर कविता कृष्णमूर्ति ने। यह ऐड पूरे देश में अलग-अलग भाषाओं में लॉन्च किया गया था। सरकार ने ये ऐड इस मकसद से बनाया था कि भारत में कश्मीर से कन्याकुमारी तक उस बड़ी आबादी को साक्षरता अभियान से जोड़ा जाए जो किसी ना किसी कारण से शिक्षा से दूर रह गई है। ऐड में इस मकसद को पूरा करने के लिए चुना गया था एक खास राग। दरअसल यह राग सिर्फ राग नहीं बल्कि उम्मीदों के उस सूर्य की तरह है, जिसकी किरणें सुरों के बीच झिलमिलाती और जगमगाती हैं। इस खास राग का नाम है राग भटियार। जानकार मानते हैं कि किसी भी मिशन को पूरा करने के लिए जिस सकारात्मक जागरूकता और गंभीरता की जरूरत होती है राग भटियार उस ओर कदम बढ़ाने का राग है।

राग भटियार: उम्मीदों का राग

भारत को शास्त्रीय संगीत का जनक माना जाता है। हिंदुस्तान की इसी धरती से सदियों पहले संगीत की ऐसी धाराएं फूटी हैं कि वह आज भी लोगों को तृप्त कर रही हैं। भारतीय शास्त्रीय संगीत में कई तरह के रागों का वर्णन है। राग यमन से राग भैरवी तक और राग मल्हार से राग दरबारी तक। इन्हीं रागों में से एक राग है जो आपको तब याद आता है, जब आपकी रूह किसी रूहानी सुकून की तलाश में हो। जब आप जिंदगी के थपेड़ों से इतना तंग आ चुके रहते हैं कि आप उम्मीद की एक नई किरण तलाशते हैं। तब आपको याद आता है राग भटियार। यह राग आपको खुद को रीस्टार्ट करने का हौसला देता है।

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राग भटियार

पत्नी के धोखे से उपजा था राग भटियार

राग भटियार जितना मधुर है इसकी उत्पत्ति की कहानी उतनी ही रोचक है। उम्मीद की किरण जगाने वाले इस राग का मूल बेवफाई में छिपा है। दरअसल सदियों से लोग रिश्तों में धोखा देते आ रहे हैं। इस धोखे से कोई बिखरा तो किसी ने कुछ ऐसा संवार दिया कि वह हमेशा के लिए अमर हो गया। ऐसे ही एक धोखे से बना था राग भटियार। कहा जाता है कि कहते हैं कि भर्तृहरि नाम से प्राचीन उज्जैन के एक राजा हुआ करते थे। वह दिन रात राज धर्म के पालन में लीन रहते थे। महाकाल की विशेष कृपा प्राप्त राजा भर्तृहरि संतों की सेवा को परम धर्म मानते थे। एक दिन राजा भर्तृहरि की सेवा से खुश होकर एक संत ने उन्हें एक दिव्य फल का प्रसाद दिया। राजा ने प्रसाद में मिला यह फल अपनी पत्नी पिंगला, जिसे वह जान से अधिक प्रेम करते थे, को दे दिया।

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राजा भर्तृहरि

लेकिन राजा भर्तृहरि को शायद मालूम ना था कि रानी पिंगला उन्हीं के सेनापति के प्रेम जाल में कैद थीं। एक रात जब वह सेनापति रानी पिंगला से मिलने महल पहुंचा तो रानी ने वह फल उस सेनापति को दे दिया। सेनापति एक ओर जहां रानी पिंगला के साथ संबंध में था वहीं वह एक वेश्या के पास भी नियमित तौर पर जाता था। अगले दिन जब वह सेनापति वेश्या के पास गया तो उसने वह फल उसे उपहार स्वरूप दे दिया।

अब वेश्या के पास आने वाले तो बहुत थे। उसकी सेवा लेने वालों में एक धनी सेठ का जवान लड़का भी शामिल था। वह वेश्या उस पर जान छिड़कती थी। सेनापति का दिया फल उसने अपने उस खास सेठ को दे दिया। सेठ का लड़की शादीशुदा था। उसने वेश्या से उपहार में मिले उस खास फल को मंदिर जा रही अपनी पत्नी को दे दिया।

सेठ की बहू ने उस फल को महाकाल मंदिर में चढ़ाया। मंदिर के पुजारी ने भगवान का स्पर्श करा वह फल महिला को लौटा दिया। पूजा करके लौटते वक्त सेठ की बहू को सामने से राजा भर्तृहरि आते दिखाई दिए। उसने सोचा यह फल इतना दिव्य है कि इसपर पहला अधिकार राज्य के राजा का ही होना चाहिए। सम्मान वश महिला ने वह फल राजा भर्तृहरि को दे दिया। वह फल देखकर राजा सन्न रह गए। उन्होंने बिना कुछ कहे वह फल स्वीकार किया और सीधे पहुंच गए अपनी रानी पिंगला के पास।

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टूटा राजा का विश्वास

राजा भर्तृहरि ने अपने आप को संभालते हुए रानी पिंगला से पूछा कि मैंने जो आपको संत के प्रसाद का फल दिया था वह कहां है? रानी पिंगला ने झूठ बोलते हुए कहा कि अरे, वह तो मैंने तभी खा लिया था, बहुत स्वादिष्ट था। इतना सुनते ही राजा भर्तृहरि का क्रोध सातवें आसमान पहुंच गया। उन्होंने वह फल निकालकर रानी पिंगला के सामने रख दिया। थोड़ी सी तहकीकात हुई तो उस फल के पूरे सफर के बारे में पता चला कि वह किस-किस के हाथों में किस मकसद से पहुंची।

रानी की बेवफाई ने राजा को बना दिया फकीर

इस पूरी घटना ने राजा को जितना क्रोधित नहीं किया उससे कहीं ज्यादा उन्हें धक्का लगा। उन्हें लगा कि उनके राज्य में सच्चे प्रेम का कोई अस्तित्व ही नहीं है। राज्य में आम से खास तक, हर कोई किसी ना किसी तरह से अपने साथी को धोखा देने में लगा है। इस पूरी घटना ने राजा के मस्तिष्क पर ऐसा आघात किया कि उन्होंने राजपाट छोड़ वैराग्य की राह पर चलने का तय कर लिया। वह नंगे पांव महल से निकल गए और सच की तलाश में दर-दर भटकने लगे। वैराग्य अपनाने के बाद वह राजा भर्तृहरि से फकीर भरथरी हो गए। भटकते-भटकते एक दिन उनका सामना गुरु गोरखनाथ से हुआ।

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वैरागी बन गए राज

जब भरथरी के कंठ से निकला राग भटियार

गोरखनाथ ने फकीर भरथरी को सच से मुखातिब कराया। उन्होंने बताया कि जो सच तुम देख कर आए हो उसके अलावा भी बहुत कुछ है जो सत्य है। हर किसी का अपना-अपना सत्य होता है। उन्होंने समझाया कि अगर कहीं किसी के लिए रात है तो उसी पल किसी के लिए दिन भी होगा। उन्होंने समझाया कि यह जीवन बहुत सुंदर है। उसकी सुंदरता तुम्हें दिखनी चाहिए। कुछ निजी कटु अनुभवों से हम इस जीवन और उसके सत्य को नकार नहीं सकते। बस फिर क्या था।

फकीर भरथरी को सत्य मिल चुका था। गुरु गोरखनाथ का ज्ञान उनके लिए नए दिन के सूर्योदय की तरह था। उन्हें नई चेतना का एहसास हुआ। उनके कंठ से एक खास राग फूट पड़ा। राग भोर की सुंदरता और आशा का राग है। भरथरी का यह राग उस परम ब्रह्म की आराधना की तरह है जो सृजन करता है तो विनाश भी करता है और फिर अगली सुबह कुछ नया सृजित करता है। राजा भरथरी के कंठ से निकला यही राग कहलाया राग भटियार।

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राग भटियार

बॉलीवुड को भी खूब भाया राग भटियार

साल 1985 में आई फिल्म सुर संगम का गाना आयो प्रभात, सब मिल गावो जी हो या फिर साल 2005 में आई फिल्म वॉटर का नैना नीर बहाए गीत, बॉलीवुड ने अपनी कई फिल्मों में राग भटियार का इस्तेमाल किया है। फिल्म कहानी घर-घर की में भी राग भटियार को बेस बनाकर ही लता मंगेशकर की आवाज में एक भजन बनाया गया है जिसके बोल हैं - जय नंदलाला जय जय गोपाला।

भारतीय शास्त्रीय संगीत में हर प्रवृत्ति के लिए अलग तरह का राग है। प्रेम के लिए अलग राग है तो श्रृंगार के लिए अलग। लेकिन जब भी बात उम्मीद, आशा की किरण या फिर प्रेरणा की होती है तो उसके लिए सबसे प्रमुख राग है राग भटियार। इस राग भटियार की खासियत उसके उत्पत्ति के मूल कारण में ही निहित है। यह राग निकला उस पावन माने जाने वाले अंधे प्रेम से जो सही मायने में आपको छल रहा था। यह राग हमें सिखाता है कि जो हो गया उसे भूलो और एक नई शुरुआत करो। सही मायने में जीवन की मायूसियों के अंधकार में नया सूर्य उगाने का नाम ही है राग भटियार।

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सोर्स- Pexels

और अंत में..

इंटरनेट पर उपलब्ध एक सर्वे के अनुसार, भारत में 55% शादीशुदा लोग किसी न किसी रूप में बेवफाई में शामिल रहे हैं, जिसमें भावनात्मक और शारीरिक दोनों तरह की बेवफाई शामिल है। इंटरनेट से निकल अगर आप खबरों की दुनिया में जाएंगे तो वहां भी आपको बेवफाई की रूह कंपा देने वाली घटनाएं देखने को मिलेंगी। कहीं कोई बेवफा पत्नी अपने पति को ड्रम में चुनवा दे रही है तो कहीं कोई बेवफा प्रेमी अपनी माशूक के टुकड़े कर फ्रीजर में ठूस दे रहा है। राग भटियार की उत्पत्ति की कहानी जान आप इस नतीजे पर आसानी से पहुंच सकते हैं कि रिश्तों में बेवफाई कोई आज का फितूर नहीं है। हमें जरूरत है उस धोखे को कैसे सकारात्मकता में बदला जाए और उम्मीद के किसी नए राग को जन्म दिया जाए।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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