Kiara Advani Postpartum Depression Struggle: बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी इन दिनों अपनी फिल्मों से ज्यादा पर्सनल लाइफ को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में बेटी ‘सरायाह’ के जन्म के बाद कियारा ने पहली बार खुलकर अपने पोस्टपार्टम दौर के बारे में बात की। हाल ही में पति सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ पैरेंटहुड एंजॉय कर रहीं कियारा एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में काफी इमोशनल नजर आईं। उन्होंने बताया कि मां बनने के बाद उनकी जिंदगी पहले जैसी नहीं रही। डिलीवरी के बाद उन्हें कई बार ऐसा महसूस हुआ कि उनकी पुरानी पहचान कहीं पीछे छूट गई है। कियारा ने माना कि इस बदलाव को स्वीकार करना उनके लिए आसान नहीं था।
दरअसल, मां बनने के बाद की खूबसूरत तस्वीरें तो अक्सर दिखाई जाती हैं, लेकिन इसके पीछे छिपी मानसिक थकान, डर, अकेलापन और भावनात्मक संघर्ष पर कम ही बात होती है। यही वजह है कि कियारा की बातें कई महिलाओं को खुद से जुड़ी हुई लग रही हैं।
मां बनने के बाद क्यों पूरी तरह बदल जाती है जिंदगी
कियारा ने बताया कि बेटी के आने के बाद उनकी पूरी दिनचर्या बदल गई। पहले जहां उनका ध्यान काम, शूटिंग और खुद पर ज्यादा होता था, अब हर चीज बेटी के हिसाब से तय होने लगी। असल में यह बदलाव लगभग हर नई मां की जिंदगी में आता है। प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के बाद शरीर में हार्मोन तेजी से बदलते हैं। ऊपर से नींद पूरी नहीं होती, शरीर कमजोर महसूस करता है और अचानक बढ़ी जिम्मेदारियां मानसिक दबाव बढ़ा देती हैं।
इसी वजह से कई महिलाएं खुद को पहले जैसा महसूस नहीं कर पातीं। कुछ छोटी-छोटी बातों पर भावुक हो जाती हैं, तो कुछ हर समय बेचैनी और थकान महसूस करती हैं।
किस बात को लेकर भावुक हुईं कियारा
इंटरव्यू के दौरान कियारा ने स्वीकार किया कि शुरुआती कुछ महीने उनके लिए काफी मुश्किल भरे थे (kiara advani postpartum struggle)। उन्होंने कहा कि खुद को नए रूप में स्वीकार करने में उन्हें समय लगा। कई बार उन्हें लगता था कि सब कुछ अचानक बदल गया है और वह खुद को पहचान नहीं पा रही हैं। हालांकि धीरे-धीरे उन्होंने खुद पर ज्यादा दबाव डालना बंद किया और खुद को समय देना सीखा।
कियारा ने यह भी महसूस किया कि हर दिन परफेक्ट होना जरूरी नहीं है। मां बनने के बाद खुद को संभालना भी उतना ही जरूरी होता है, जितना बच्चे का ख्याल रखना।
आखिर क्या होता है पोस्टपार्टम डिप्रेशन
अमृता अस्पताल फरीदाबाद की प्रसूति एंव स्त्रीरोग विभाग की प्रमुख डॉ. दीपती शर्मा बताती हैं कि डिलीवरी के बाद कई महिलाएं जिस मानसिक परेशानी से गुजरती हैं, उसे पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहा जाता है। इसे सिर्फ साधारण मूड स्विंग समझना गलत है। इस दौरान महिला लगातार उदासी, चिड़चिड़ापन, डर या बेचैनी महसूस कर सकती है। कई बार बिना वजह रोना आता है या बच्चे के साथ जुड़ाव महसूस करने में भी परेशानी होती है। इसके कुछ आम लक्षण हो सकते हैं:
- हर समय थकान महसूस होना
- छोटी-छोटी बातों पर रोना
- बेचैनी और घबराहट
- खुद को अकेला महसूस करना
- नींद और भूख में बदलाव
- किसी भी काम में मन न लगना
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
सोशल मीडिया भी बढ़ा देता है दबाव
डॉ. दीपती शर्मा के अनुसार, आजकल सोशल मीडिया पर 'परफेक्ट मॉम लाइफ' देखकर कई महिलाएं खुद की तुलना करने लगती हैं। उन्हें लगता है कि बाकी लोग सबकुछ आसानी से संभाल रहे हैं और सिर्फ वही संघर्ष कर रही हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि हर महिला का अनुभव अलग होता है। मां बनना जितना खूबसूरत एहसास है, उतना ही भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण भी हो सकता है। इसलिए खुद पर हर समय परफेक्ट दिखने का दबाव बनाना सही नहीं है।
नई मां को सबसे ज्यादा जरूरत होती है समझ और सपोर्ट की
डॉक्टर आगे कहती हैं कि हमारे समाज में आज भी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात नहीं होती। खासकर अगर कोई नई मां अपनी थकान, तनाव या उदासी जाहिर करे, तो लोग अक्सर उसे “ये तो नॉर्मल है” कहकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि यही वह समय होता है, जब महिला को सबसे ज्यादा भावनात्मक सपोर्ट, प्यार और समझ की जरूरत होती है। परिवार और पार्टनर का साथ पोस्टपार्टम फेज को काफी आसान बना सकता है।
कियारा की बातों से खुद को जोड़ रही हैं महिलाएं
कियारा आडवाणी ने जिस खुलेपन के साथ अपने अनुभव शेयर किए, उससे कई महिलाओं को यह एहसास हुआ कि वे अकेली नहीं हैं। मां बनने के बाद खुद को खोया हुआ महसूस करना, बार-बार रोना या मानसिक रूप से कमजोर पड़ जाना कोई कमजोरी नहीं, बल्कि एक सामान्य मानवीय अनुभव है।
जरूरत इस बात की है कि नई मांओं को जज करने के बजाय उन्हें सुना जाए, समझा जाए और उनका साथ दिया जाए।
