Parenting: जब भी बच्चे और दोस्ती की बात होती है तो शायद हर माता-पिता की चिंता की यही होती है कि कहीं उनका बच्चा गलत संगत में तो नहीं है। बतौर पेरेंट हम ये सोच भी नहीं पाते कि क्या हमारा बच्चा खुद एक अच्छा दोस्त बनने लायक है?
दरअसल बच्चों की दोस्ती केवल साथ खेलने या समय बिताने भर नहीं है। इसमें सम्मान, भरोसा और दूसरों की भावनाओं को समझने की क्षमता भी शामिल होती है। अगर बचपन में दोस्ती की सही आदतें नहीं सीखीं, तो आगे चलकर रिश्ते निभाने में मुश्किलें आ सकती हैं। ऐसे में माता-पिता को इन गंभीर बातों पर जरूरी नजर रखनी चाहिए:
क्या बच्चा हमेशा अपनी बात मनवाना चाहता है?
अगर बच्चा हर खेल, हर फैसले या हर बातचीत में अपनी ही बात मनवाने की कोशिश करता है, तो यह स्वस्थ दोस्ती की निशानी नहीं है। अच्छी दोस्ती में समझौता करना और दूसरों की राय का सम्मान करना भी जरूरी होता है।
क्या वह दोस्तों पर जरूरत से ज्यादा हक जताता है?
कुछ बच्चे अपने दोस्त को किसी और के साथ खेलते देखकर नाराज हो जाते हैं। वे चाहते हैं कि दोस्त सिर्फ उन्हीं के साथ रहे। यह व्यवहार आगे चलकर असुरक्षा और रिश्तों में नियंत्रण की भावना पैदा करता है।
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गलती होने पर क्या वह माफी मांगता है?
हर रिश्ते में गलतियां होती हैं लेकिन बच्चा कभी अपनी गलती स्वीकार नहीं करता या माफी मांगने से बचता है, तो यह आदत दोस्ती को कमजोर कर सकती है। बच्चों को यह सिखाना जरूरी है कि 'सॉरी' कहना रिश्तों को संभालने की समझ है।
क्या वह दोस्तों का मजाक उड़ाता है?
दोस्ती में हंसी-मजाक सामान्य है, लेकिन अगर बच्चा बार-बार किसी दोस्त की कमजोरी, रंग, पढ़ाई या किसी और बात का मजाक उड़ाता है, तो यह बुलिंग की शुरुआत हो सकती है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि मजाक और अपमान में फर्क होता है।
क्या वह सिर्फ जरूरत पड़ने पर दोस्तों को याद करता है?
अगर बच्चा केवल अपना काम निकलवाने या मदद लेने के लिए दोस्तों से संपर्क करता है, तो यह एकतरफा रिश्ता बन सकता है। सच्ची दोस्ती में दोनों तरफ से सहयोग और अपनापन होता है।
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क्या वह दोस्तों की बात सुनता भी है?
अच्छा दोस्त सिर्फ बोलता नहीं, सुनता भी है। अगर बच्चा हमेशा अपनी ही बातें करता है और दूसरों की भावनाओं या समस्याओं में रुचि नहीं दिखाता, तो उसे सहानुभूति का महत्व समझाने की जरूरत है।
क्या वह दोस्तों की सफलता से खुश होता है?
अगर बच्चा हर समय तुलना करता है या दोस्त की उपलब्धि से जलन महसूस करता है, तो यह रिश्तों में दूरी ला सकता है। बच्चों को सिखाएं कि दोस्त की सफलता का सम्मान करना भी अच्छी दोस्ती का हिस्सा है।
माता-पिता क्या करें?
बच्चों को केवल अच्छे दोस्त चुनने की सलाह देना काफी नहीं है। उन्हें अच्छा दोस्त बनना भी सिखाना जरूरी है। इसके लिए घर में सम्मानजनक व्यवहार, माफी मांगने की आदत, दूसरों की बात सुनना और भावनाओं को समझना जैसे गुणों को डेली लाइफ में अपनाना होगा। बच्चे सबसे ज्यादा सीख अपने माता-पिता को देखकर ही लेते हैं।
