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बच्चों संग दोस्ती बढ़ाने का नया तरीका है ‘Teen-ternity’, जानिए क्यों पैरेंट्स अपना रहे हैं यह ट्रेंड

आज के बच्चे इंटरनेट, सोशल मीडिया और तेजी से बदलती दुनिया के बीच बड़े हो रहे हैं। उनके सामने ऐसी कई चुनौतियां हैं, जिन्हें पिछली पीढ़ियों ने उसी रूप में अनुभव नहीं किया था।

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पेरेंटिंग में ये Teen-ternity ट्रेंड क्या है? (Photo: iStock)

आज माता-पिता और बच्चों के रिश्ते तेजी से बदल रहे हैं। पहले जहां पैरेंट्स और बच्चों के बीच एक औपचारिक दूरी दिखाई देती थी, वहीं अब कई माता-पिता अपने बच्चों के साथ दोस्त जैसा रिश्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बदलते नजरिए से जुड़ा एक नया ट्रेंड सामने आया है, जिसे ‘Teen-ternity’ कहा जा रहा है।

यह शब्द Teen (किशोर) और Eternity (हमेशा बना रहने वाला रिश्ता) को मिलाकर बनाया गया है। इसका मतलब है कि माता-पिता अपने बच्चों के टीनएज दौर को सिर्फ अनुशासन और नियमों के नजरिए से नहीं देखते। इस उम्र के बदलावों को समझते हुए उनके साथ एक मजबूत और लंबे समय तक चलने वाला रिश्ता बनाने की कोशिश करते हैं।

क्या है Teen-ternity ट्रेंड?

किशोरावस्था बच्चों के जीवन का बेहद संवेदनशील दौर होता है। इस उम्र में बच्चे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से कई बदलावों से गुजरते हैं। वे अपनी पहचान तलाश रहे होते हैं, अपनी पसंद-नापसंद समझ रहे होते हैं और धीरे-धीरे आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करते हैं।

ऐसे समय में कई पैरेंट्स महसूस कर रहे हैं कि सिर्फ डांटने, रोकने या हर बात पर नियंत्रण रखने से बच्चे उनसे दूर हो सकते हैं। इसलिए वे अपने पैरेंटिंग स्टाइल में बदलाव ला रहे हैं। Teen-ternity इसी सोच को दर्शाता है, जिसमें माता-पिता बच्चों के टीनएज को यादगार बनाने और उनके साथ भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने पर ध्यान देते हैं।

क्यों लोकप्रिय हो रहा है यह ट्रेंड?

आज के बच्चे इंटरनेट, सोशल मीडिया और तेजी से बदलती दुनिया के बीच बड़े हो रहे हैं। उनके सामने ऐसी कई चुनौतियां हैं, जिन्हें पिछली पीढ़ियों ने उसी रूप में अनुभव नहीं किया था। ऐसे में माता-पिता को लगता है कि बच्चों को सिर्फ निर्देश देने के बजाय उन्हें समझना ज्यादा जरूरी है।

Teen-ternity में पैरेंट्स बच्चों के साथ ज्यादा समय बिताने, उनकी बातें सुनने और उनकी भावनाओं को महत्व देने की कोशिश करते हैं। वे चाहते हैं कि बच्चा किसी परेशानी में सबसे पहले अपने माता-पिता के पास आए, न कि उनसे कुछ छिपाए।

दोस्त बनना, लेकिन माता-पिता की भूमिका बनाए रखना

बच्चों के साथ दोस्त जैसा व्यवहार करने का मतलब यह नहीं है कि माता-पिता अपनी जिम्मेदारियां छोड़ दें। विशेषज्ञों के अनुसार, एक अच्छा पैरेंट वह है जो बच्चे को स्वतंत्रता भी दे और सही दिशा भी दिखाए।

कई बार माता-पिता बच्चों के दोस्त बनने के चक्कर में सीमाएं तय करना भूल जाते हैं। इससे बच्चे अनुशासन और जिम्मेदारी को गंभीरता से नहीं लेते। इसलिए जरूरी है कि दोस्ती और पैरेंटिंग के बीच संतुलन बनाया जाए।

कैसे अपनाएं Teen-ternity का तरीका?

बच्चों की बात सुनें:

कई बार बच्चे सलाह नहीं, सिर्फ अपनी बात साझा करने के लिए माता-पिता के पास आते हैं। उनकी बात ध्यान से सुनना रिश्ते को मजबूत बनाता है।

उनकी पसंद का सम्मान करें:

हर पीढ़ी की पसंद अलग होती है। बच्चों के कपड़े, संगीत या शौक को तुरंत गलत ठहराने के बजाय उन्हें समझने की कोशिश करें।

साथ में समय बिताएं:

मोबाइल और व्यस्त दिनचर्या के बीच परिवार के लिए समय निकालना जरूरी है। छोटी-छोटी गतिविधियां भी रिश्ते को मजबूत बना सकती हैं।

भरोसे का माहौल बनाएं:

अगर बच्चे को डर रहेगा कि गलती करने पर उसे सिर्फ डांट मिलेगी, तो वह बातें छिपाने लगेगा।

बदलते समय की नई पैरेंटिंग सोच

Teen-ternity असल में पैरेंटिंग के बदलते नजरिए को दिखाता है। यह बच्चों को पूरी आजादी देने की बात नहीं करता, बल्कि उनके साथ ऐसा रिश्ता बनाने की कोशिश करता है जिसमें प्यार, भरोसा और समझ शामिल हो।

आज के दौर में जब बच्चे कई तरह के दबावों से गुजर रहे हैं, ऐसे में माता-पिता का दोस्त, मार्गदर्शक और सुरक्षित जगह बनना उनके मानसिक और भावनात्मक विकास के लिए बेहद जरूरी हो सकता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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