लाइफस्टाइल

गर्म खाना प्लास्टिक कंटेनर में पैक क्यों नहीं करना चाहिए? जानें Chemical Migration का पूरा खेल

Food Safety Packaging: गर्म खाना प्लास्टिक कंटेनर में पैक करना सुविधाजनक है, लेकिन सेहत के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। ये कंटेनर की Chemical Migration प्रक्रिया का कारण बन सकता है। आइए जानते हैं इसके बारे में विस्तार से...

Image

खाने की पैकेजिंग के नियम‌!

Food Safety Packaging: गरमा-गरम खाना बनते ही उसे प्लास्टिक के डिब्बे में भरकर फ्रिज या ऑफिस बैग में रख देना आज की व्यस्त जिंदगी का आम हिस्सा बन चुका है। सुविधाजनक होने के बावजूद यह आदत हमेशा सुरक्षित नहीं मानी जाती। खासकर जब खाना बहुत गर्म, तैलीय या अम्लीय हो, तो उसके संपर्क में आने वाले प्लास्टिक से कुछ रासायनिक पदार्थ भोजन में पहुंच सकते हैं। इसी प्रक्रिया को Chemical Migration कहा जाता है। आखिर यह क्या है और गर्म खाने के साथ प्लास्टिक का इस्तेमाल कब चिंता का विषय बन सकता है? आइए समझते हैं।

क्या है Chemical Migration?

Chemical Migration का मतलब है प्लास्टिक में मौजूद कुछ रासायनिक पदार्थों का धीरे-धीरे खाद्य पदार्थ में स्थानांतरित होना। प्लास्टिक की पैकिंग बनाने के दौरान अलग-अलग तरह के additives, stabilizers, plasticizers या अन्य रसायनों का इस्तेमाल किया जा सकता है। सामान्य परिस्थितियों में इनका भोजन में जाना बहुत कम हो सकता है, लेकिन तापमान, भोजन की प्रकृति और संपर्क का समय बढ़ने पर migration की संभावना भी बढ़ सकती है।

यानी समस्या सिर्फ प्लास्टिक की मौजूदगी नहीं, बल्कि यह भी है कि किस तरह का प्लास्टिक, किस तापमान पर और किस भोजन के संपर्क में है।

गर्म खाना क्यों बढ़ा देता है सेहत के लिए जोखिम?

तापमान बढ़ने पर कई रासायनिक पदार्थों की प्लास्टिक से भोजन में जाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। यही वजह है कि बहुत गर्म खाना सीधे ऐसे प्लास्टिक कंटेनर में डालना उचित नहीं माना जाता, जो गर्म खाद्य पदार्थों के लिए डिजाइन नहीं किया गया हो। मसलन, ताजा निकली गर्म सब्जी, दाल या चावल को तुरंत प्लास्टिक बॉक्स में बंद करने के बजाय कुछ देर ठंडा होने देना बेहतर विकल्प हो सकता है। खासकर पतले, एक बार इस्तेमाल होने वाले या बिना स्पष्ट food-grade/heat-use labeling वाले प्लास्टिक से बचना समझदारी है।

तेल-मसाले वाले खाने में क्यों रखें ज्यादा सावधानी?

Chemical migration केवल गर्मी से प्रभावित नहीं होती। भोजन में मौजूद तेल और वसा भी कुछ रसायनों को प्लास्टिक से निकालने की क्षमता बढ़ा सकते हैं। इसी तरह अत्यधिक अम्लीय या नमकीन खाद्य पदार्थ भी प्लास्टिक के साथ अलग तरह से प्रतिक्रिया कर सकते हैं। इसलिए गरमा-गरम तड़के वाली दाल, करी, ग्रेवी, अचार या बहुत तेल वाला खाना लंबे समय तक ऐसे प्लास्टिक कंटेनर में रखना उचित नहीं है, जो इसके लिए निर्धारित न हो।

सभी पैकेजिंग खतरनाक नहीं?

यह समझना भी जरूरी है कि हर प्लास्टिक कंटेनर जहरीला या असुरक्षित नहीं होता। खाद्य पदार्थों के लिए बनाए गए कई प्लास्टिक कंटेनर निर्धारित उपयोग और तापमान सीमा के भीतर इस्तेमाल किए जा सकते हैं। कंटेनर के नीचे दिए गए Labeling और निर्माता के निर्देश देखें। अगर उस पर microwave-safe, food-safe या गर्म भोजन के इस्तेमाल से जुड़ी स्पष्ट जानकारी नहीं है, तो उसमें बहुत गर्म खाना भरने से बचें।

गर्म खाने के की पैकेजिंग के लिए बेहतर विकल्प

अगर सुविधा के साथ सुरक्षा भी प्राथमिकता है, तो गर्म भोजन के लिए स्टेनलेस स्टील, कांच या उपयुक्त सिरेमिक कंटेनर बेहतर विकल्प हो सकते हैं। ऑफिस या यात्रा के लिए स्टील के टिफिन भी लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकते हैं। अगर प्लास्टिक कंटेनर इस्तेमाल करना ही है, तो उसे निर्धारित तापमान सीमा के भीतर ही इस्तेमाल करें और पुराने, खरोंच वाले, बदरंग या विकृत कंटेनर को बदल दें।

फूड पैकेजिंग कंटेनर के नियम

प्लास्टिक को पूरी तरह “जहरीला” मानना सही नहीं है, लेकिन गलत प्लास्टिक को गलत तापमान और गलत भोजन के साथ इस्तेमाल करना समस्या पैदा कर सकता है। खासकर गर्म, तैलीय या अम्लीय भोजन के मामले में सावधानी जरूरी है। इसलिए अगली बार गरमा-गरम खाना पैक करते समय सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि कंटेनर की material, labeling और intended use भी जरूर देखें।

gulshan kumar
गुलशन कुमारauthor

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लोगों की जीवनशैली, सेहत और वेलनेस से जुड़े विषयों पर लगातार काम कर रहे हैं। गुलशन अबतक 2,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। उनके लेखों में आसान भाषा में दी गई जानकारी, रिसर्च-बेस्ड टिप्स और रोजमर्रा की सेहत से जुड़े विषयों की स्पष्ट समझ दिखाई देती है। हेल्थ अवेयरनेस को बढ़ावा देना, फिटनेस को सरल तरीके से समझाना और बेहतर लाइफस्टाइल के लिए उपयोगी सुझाव देना—गुलशन की लेखन शैली की खासियत है।

और पढ़ें
End of Article