R Madhavan Parenting Advice: एक्टर आर माधवन एक बेटे के पिता हैं। बेटे का नाम वेदांत है। माधवन ने वेदांत की परवरिश काफी बेहतरीन तरीके से की है। हाल ही में माधवन ने बताया कि 15 साल के होने तक उन्होंने वेदांत को कभी खाली नहीं छोड़ा। उसे हमेशा किसी ना किसी क्रिएटिव काम में बिजी रखा। ऐसा करने के पीछे माधवन ने अपनी सीख और सोच को भी शेयर किया है। राधिका गुप्ता के यू ट्यूब चैनल पर बात करते हुए एक्टर ने अपने पेरेंटिंग स्टाइल की और भी कई दिलचस्प बातें साझा की हैं।
माधवन ने बताया कि आज के दौर की पेरेंटिंग में सबसे बड़ी समस्या यह है कि बच्चे बहुत जल्दी सुविधाओं और दिखावे के माहौल में बड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई माता-पिता बच्चों के जन्मदिन और स्कूलिंग पर इतना खर्च कर देते हैं कि वह खुद अपनी पूरी पढ़ाई या शादी में भी उतना पैसा नहीं खर्च कर पाए थे।
बेटे को पढ़ाया कृतज्ञता का पाठ
बकौल माधवन उन्होंने अपने बेटे वेदांत को बचपन से ही ग्रैटिट्यूड यानी कृतज्ञता की भावना सिखाने की कोशिश की। वह चाहते थे कि उनका बेटा यह समझे कि उसे जो सुविधाएं मिली हैं, उसके पीछे कई लोगों की मेहनत होती है। इसी वजह से उन्होंने वेदांत को घर में काम करने वाले लोगों के संघर्ष और मेहनत के बारे में भी बताया।
एक्टर ने कहा कि वेदांत को उन्होंने हमेशा हर इंसान का सम्मान करना सिखाया। चाहे वह सिक्योरिटी गार्ड हो, ड्राइवर हो या लिफ्टमैन, माधवन चाहते थे कि उनका बेटा हर किसी से विनम्रता से बात करे। उनके मुताबिक, अगर कोई चौकीदार आकर कह दे कि “आपका बेटा बहुत अच्छे संस्कार वाला है”, तो उन्हें लगता था कि उन्होंने एक पिता के तौर पर वह सफल रहे हैं।

बेटे वेदांत के साथ माधवन (Photo: Madhavan/insta)
कनाडा के कपल से मिली सीख
माधवन ने अपनी पेरेंटिंग का सबसे खास नियम भी बताया। उन्होंने कहा कि जब वह कनाडा के एक छोटे शहर में पढ़ाई कर रहे थे, तब वहां ड्रग्स, शराब और टीनएज प्रेग्नेंसी जैसी समस्याएं बहुत आम थीं। लेकिन जिस परिवार के साथ वह रहते थे, उनके बच्चे बेहद अनुशासित और सामान्य थे। जब माधवन ने उस परिवार की महिला से पूछा कि उन्होंने अपने बच्चों को कैसे संभाला, तो उन्होंने एक सलाह दी - अपने बच्चों को खाली समय मत दो।
15 साल तक बेटे को रखा बिजी
माधवन ने बताया कि उन्होंने इस सलाह को पूरी तरह अपनाया। उनका मानना था कि बच्चों को किसी न किसी रचनात्मक गतिविधि में व्यस्त रखना चाहिए। चाहे वह खेल हो, संगीत हो, पढ़ाई हो या कोई हॉबी, लेकिन बच्चे का समय सकारात्मक चीजों में लगना चाहिए। उन्होंने 15 साल के होने तक वेदांत पर यही नियम लगाए रखा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह सब बच्चे पर बोझ की तरह नहीं लगना चाहिए, बल्कि उसे मजा आना चाहिए।
आज वेदांत माधवन एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के तैराक हैं और कई प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। माधवन मानते हैं कि अनुशासन, विनम्रता और सही माहौल ने उनके बेटे को मजबूत व्यक्तित्व दिया।
