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Psychology: खाते या खेलते समय आपका बच्चा भी गाता है गाना? मनोविज्ञान से समझें कारण

कई बच्चे किसी को सुनाने के लिए नहीं, बल्कि खुद से ही गाते हैं। वे अकेले खेलते समय या कोई काम करते हुए धीमे-धीमे गुनगुना सकते हैं।

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रूटीन के कामों में बच्चा क्यों गाता है गाना, जानिए क्या कहता है मनोविज्ञान (Photo: Canva)

क्या आपका बच्चा भी कपड़े पहनते समय, खाना खाते समय या फिर खेलते समय गाना गाता है? अपनी ही धुन में गाने लगता है? मनोविज्ञान की नजर बच्चों का इस तरह से गाना एक तरह का दिलचस्प व्यवहार है। रिसर्च बताती है कि बच्चों का सहज रूप से गाना भाषा, याददाश्त, रचनात्मकता और रूटीन एक्टिविटीज से कनेक्ट होने का एक तरीका हो सकता है।

बच्चा हर काम को गाने में क्यों बदल देता है?

छोटे बच्चे अक्सर कोई काम करते हुए साथ-साथ गुनगुनाते रहते हैं। वे तैयार होते समय, खाना खाते हुए, खेलते हुए या घर में इधर-उधर घूमते हुए अपनी धुन बना सकते हैं। कई बार उनके गाने के शब्द बड़ों को बिल्कुल बेतुके लगते हैं। बच्चे कई बार एक ही लाइन बार-बार दोहराते हैं और कभी-कभी बच्चा अपनी धुन और बोल खुद बना लेता है।

एक अध्ययन में 3 और 4 साल के बच्चों को उनके घर के सामान्य माहौल में देखा गया। इसमें पाया गया कि बच्चे रोजमर्रा के कामों के दौरान अपने आप गाने बना सकते हैं। खास बात यह है कि ये गाने हमेशा किसी बड़े ने उन्हें सिखाए हुए नहीं होते। बच्चे खुद शब्द बनाते, पुराने पैटर्न दोहराते और जरूरत के हिसाब से बोल बदलते रहते हैं।

बार-बार एक ही लाइन क्यों बोलता है बच्चा?

बच्चों के बनाए गानों में एक चीज बहुत आम होती है- दोहराव। बच्चा एक ही शब्द या लाइन कई बार बोल सकता है। कभी किसी काम को ही गाने का हिस्सा बना देता है तो कभी एक ही धुन पर अलग-अलग शब्द जोड़ता रहता है।

रिसर्च के मुताबिक, लय और दोहराव बच्चों को शब्दों और जानकारी से जुड़ने का एक अलग तरीका देते हैं। 2022 की एख स्टडी में प्री-स्कूल बच्चों को शब्द सिखाने के लिए गाने और लय के इस्तेमाल की तुलना तस्वीरों के जरिए शब्द सिखाने से की गई। इसमें गाने या लय के जरिए शब्द सिखाने पर शब्दों की समझ में ज्यादा गहराई देखी गई। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर चीज गाकर बताने से बच्चे की याददाश्त अपने आप बेहतर हो जाएगी।

अकेले में गाना भी सामान्य है

कई बच्चे किसी को सुनाने के लिए नहीं, बल्कि खुद से ही गाते हैं। वे अकेले खेलते समय या कोई काम करते हुए धीमे-धीमे गुनगुना सकते हैं। 4 से 8 साल के 58 बच्चों पर हुए एक अध्ययन में बच्चों के खुद से बात करने, गाने और गुनगुनाने के व्यवहार को देखा गया। करीब एक-तिहाई बच्चों ने किसी काम के दौरान अपने लिए गाने का इस्तेमाल किया। हालांकि, अध्ययन ने यह साबित नहीं किया कि अकेले गाने से बच्चों का आत्म-नियंत्रण बेहतर होता है। इससे सिर्फ इतना पता चलता है कि यह बच्चों में स्वाभाविक रूप से दिखने वाला व्यवहार है।

यह बच्चे की क्रिएटिविटी भी है

बच्चे जब खुद गाना बनाते हैं तो वे सिर्फ सुनी हुई चीज को दोहरा नहीं रहे होते। वे शब्दों को बदलते हैं, नई धुन बनाते हैं और आसपास हो रही घटनाओं को गाने में शामिल कर लेते हैं। यही प्रक्रिया भाषा और संगीत के साथ प्रयोग करने का एक तरीका हो सकती है। शोध में बच्चों के इस तरह के बनाए हुए गानों को उनकी शुरुआती संगीत रचनात्मकता से जोड़ा गया है।

हर गाने में छिपा मतलब ढूंढना जरूरी नहीं

अगर बच्चा अचानक स्कूल, दोस्तों या किसी खास घटना पर गाने लगे, तो इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि वह किसी परेशानी का संकेत दे रहा है। बच्चे उन चीजों के बारे में भी गाते हैं जिनमें उनकी दिलचस्पी होती है। इसलिए माता-पिता को बच्चे के हर गाने का मनोवैज्ञानिक अर्थ निकालने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय यह देखना ज्यादा उपयोगी हो सकता है कि बच्चा कौन से शब्द बार-बार दोहरा रहा है, धुन कैसे बदल रहा है और किन कामों के दौरान ज्यादा गाता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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