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क्या स्पेस में जाने पर ब्रश करते हैं अंतरिक्ष यात्री, कितनी परेशान करती है मुंह की बदबू, कैसे नहाते हैं वहां इंसान

अंतरिक्ष का जीवन धरती से हर मायनों में अलग होता है। आप धरती पर जैसे रह सकते है , चल सकते है ,घूम सकते है वहां कतई नहीं कर सकते है। क्योंकि उसकी सबसे बड़ी वजह होती है स्पेस में गुरुत्वाकर्षण का बहुत कम होना ।

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अंतरिक्ष में कितना मुश्किल है जीवन

नई दिल्ली: अंतरिक्ष का जीवन धरती से हर मायनों में अलग होता है। आप यहां जैसे रह सकते है , चल सकते है ,घूम सकते है वहां कतई नहीं कर सकते है। क्योंकि उसकी सबसे बड़ी वजह होती है स्पेस में गुरुत्वाकर्षण का बहुत कम होना । अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण बहुत कम होता है, इसलिए अंतरिक्ष यात्री तैरते हैं, चलने या बैठने का तरीका भी वहां बिल्कुल ही अलग हो जाता है। वहां कोई भी चीज धरती की तरह नहीं की जा सकती।

अंतरिक्ष में सामान्य खाना-खाना मुश्किल होता है क्योंकि हवा में उड़ते टुकड़ों की वजह से ऐसा कतई मुमकिन नहीं होता है। लिहाजा इसलिए अंतरिक्ष यात्रियों के पास विशेष रूप से पैक किए गए खाने होते हैं, जो वो लेकर जाते हैं , जो वैक्यूम-सील्ड होते हैं या जिनको एक खास तकनीक के जरिए फ्रीज-ड्रॉय किया जाता है। साथ ही पानी और जूस भी सीलबंद पैकेट में होते हैं।

पानी का इस्तेमाल ना के बराबर

अंतरिक्ष में पानी बहुत सीमित होता है इसलिए पहले अंतरिक्ष यात्री अपने दांतों पर टूथपेस्ट लगाते हैं। फिर टूथब्रश से दांत ध्यान से ब्रश करते हैं, जैसे हम सभी करते है। पानी कम होने की वजह से अंतरिक्ष यात्री टूथपेस्ट को पानी से नहीं धोते। साथ ही वहां मुंह धोना या कुल्ला करना भी संभव नहीं होता इसलिए दांतों की सफाई के दौरान बगैर पानी के इस्तेमाल के ही काम चलाना होता है। एक तरह से देखा जाए तो एक विशेष प्रक्रिया के तहत वहां वॉटरलेस ब्रशिंग होती है जिसमें दांत पूरी तरह साफ हो जाते है।

कैसे नहाते हैं अंतरिक्ष यात्री ?

अंतरिक्ष यात्री के लिए नहाना एक बेहद टेढ़ी खीर होता है जो धरती जैसे तो कतई नहीं हो सकता। यहां नहाने के लिए नो-रिंस वाइप्स और वॉटरलेस शैम्पू का इस्तेमाल करते हैं। अंतरिक्ष में सामान्य तरह से पानी में नहाना मुश्किल होता है, क्योंकि पानी तरल रूप में नहीं रहता।

गुरुत्वाकर्षण कम होने से चुनौती

अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण (पृथ्वी की तरह जमीन पर खिंचने वाली ताकत) बहुत कम होती है। इसलिए जब पानी निकलता है, तो वो हवा में छोटे-छोटे गुब्बारे की तरह तैरने लगता है। इसलिए सामान्य तरीके से शावर लेना कतई मुमकिन नहीं होता है।

नो-रिंस" वाइप्स का इस्तेमाल

अंतरिक्ष यात्री अपने शरीर को साफ करने के लिए विशेष "नो-रिंस" वाइप्स का इस्तमाल करते हैं। ये वाइप्स ऐसे होते हैं जो बिना पानी के त्वचा की गंदगी और पसीना साफ कर देते हैं। वाइप्स को अंतरिक्ष यात्री अपने शरीर पर अच्छे से रगड़ कर वो अपनी सफाई करते हैं। बाल धोने के लिए वॉटरलेस शैम्पू या ड्राई शैम्पू का इस्तेमाल किया जाता है।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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