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4,06,771 KM दूरी...दुनिया ने देखा अद्भुत नजारा! चांद को चूमता निकला Artemis-2; टूटा 50 साल पुराना रिकॉर्ड

अंतरिक्ष की दुनिया से ऐतिहासिक और रोमांचित करने वाली तस्वीरों ने नई उम्मीद जगाई है। NASA के आर्टेमिस-2 (Artemis II) मिशन ने एक बार फिर इंसानों की चांद तक पहुंच को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। इस मिशन से जुड़ा एक शानदार वीडियो Elon Musk ने साझा किया, जिसमें Orion spacecraft चंद्रमा की सतह के बेहद करीब से गुजरता नजर आता है। इन दृश्यों ने आधी सदी पहले के अपोलो मिशनों की यादें ताजा कर दी हैं।

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आर्टेमिस-2 मिशन (फोटो-AI)

Artemis II : अंतरिक्ष से एक ऐसी तस्वीरें आई हैं, जिसने पूरी दुनिया के विज्ञान प्रेमियों को रोमांचित कर दिया है। हालिया के दिनों में एलन मस्क ने नासा के आर्टेमिस-2 (Artemis-2) अंतरिक्ष यान का एक बेहद खास वीडियो साझा किया है, जिसमें ओरियन कैप्सूल चांद की सतह के बिल्कुल करीब से गुजरता हुआ दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन तस्वीरों में चांद की सतह बेहद स्पष्ट और विस्तृत दिख रही है। इन तस्वीरों ने उन यादों को ताजा कर दिया है जब आधी सदी पहले इंसान पहली बार चांद के इतने करीब पहुंचा था।

इस ऐतिहासिक मिशन के दौरान एक ऐसा पल भी आया जब पूरी दुनिया की सांसें थम गईं। जब ओरियन कैप्सूल चांद के 'डार्क साइड' (वह हिस्सा जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता) के पीछे पहुंचा, तो नासा के 'डीप स्पेस नेटवर्क' से उसका संपर्क पूरी तरह टूट गया। यह 40 मिनट का ब्लैकआउट मिशन का एक रूटीन लेकिन सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा था। जैसे ही यान चांद के पिछले हिस्से से बाहर निकला और सिग्नल वापस आए, वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। मशहूर उद्यमी मारियो नॉफल ने इस पल पर अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए लिखा कि इंसान का फिर से चांद की कक्षा में होना किसी सपने जैसा है।

आर्टेमिस-2 मिशन सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह मानव जाति के साहस की नई कहानी है। 1970 के दशक के अपोलो-13 मिशन के बाद यह पहली बार है जब इंसान फिर से चांद के घेरे में पहुंचा है। ये दृश्य न सिर्फ तकनीकी प्रगति का प्रमाण हैं, बल्कि यह भी बताते हैं कि अंतरिक्ष में हमारी पहुंच पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है। इन अद्भुत नजारों ने एक बार फिर लोगों के मन में अंतरिक्ष के प्रति जिज्ञासा और उत्साह जगा दिया है।

चांद का चक्कर लगाकर लौटा आर्टेमिस-2

आर्टेमिस-2 (Artemis-2) अब चांद का चक्कर (फ्लाई-बाय) पूरा कर पृथ्वी की ओर वापस लौट रहा है। फ्लाईबाय के दौरान स्पेसक्राफ्ट चांद की सतह से केवल 6,545 किमी दूर था। इस मिशन ने अपोलो 13 मिशन द्वारा 50 साल पहले बनाया गया दूरी का रिकॉर्ड भी तोड़ दिया है। साल 1970 में अपोलो-13 मिशन ने पृथ्वी से 4,00,171 किलोमीटर की दूरी तय की थी, लेकिन आर्टेमिस-2 मिशन ने नया रिकॉर्ड बनाते हुए 4,06,771 किलोमीटर की दूरी तय की है।

आर्टेमिस-2 अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा (NASA) के आर्टेमिस कार्यक्रम के अंतर्गत ओरियन अंतरिक्ष यान की पहली मानवयुक्त उड़ान है। यह चंद्रमा पर उतरने वाला मिशन नहीं है, बल्कि यह एक ‘लूनर फ्लाईबाय’ मिशन है, जिसमें अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर बिना सतह पर उतरे पृथ्वी पर वापस लौटेंगे। NASA का चंद्रमा पर अंतिम मिशन अपोलो 17 था, जिसे दिसंबर 1972 में लॉन्च किया गया था।

आर्टेमिस-2 मिशन को 1 अप्रैल, 2026 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट के माध्यम से लॉन्च किया गया था। करीब 10 दिन के इस मिशन के बाद 10 अप्रैल को अंतरिक्ष यान 'ओरियन' प्रशांत महासागर में उतरकर पृथ्वी पर लौटेगा। इस मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स अंजाम दे रहे हैं जिनमें रीड वाइजमैन (कमांडर), विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टिना कोच और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी के जेरेमी हैनसेन शामिल हैं।

प्रशांत महासागर में उतरेंगे अंतरिक्ष यात्री

बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्री एक ऐतिहासिक चंद्र उड़ान भरने के बाद घर लौट रहे हैं। चार सदस्यीय दल चंद्रमा पर नहीं उतरा, लेकिन उनके मिशन ने 1960 और 70 के दशक के बाद पहली बार भविष्य में मानव लैंडिंग के लिए मंच तैयार किया है। अंतरिक्ष यात्रियों के शुक्रवार 10 अप्रैल को पूर्वी अमेरिकी समयानुसार 20:07 बजे (शनिवार 11 अप्रैल को 01:07 बीएसटी) अमेरिका के पश्चिमी तट से दूर प्रशांत महासागर में उतरने की उम्मीद है।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमार author

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ... और देखें

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