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पश्चिम बंगाल SIR: चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया जवाब, कहा- अपील ट्रिब्यूनल पूरी तरह कर रहे काम

Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की SIR को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। यह जवाब प्रसेनजीत बोस बनाम चुनाव आयोग मामले में दाखिल काउंटर एफिडेविट के जरिए दिया गया है।

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चुनाव आयोग (फाइल फोटो)

Bengal SIR: पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की विशेष गहन जांच यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। यह जवाब प्रसेनजीत बोस बनाम चुनाव आयोग मामले में दाखिल काउंटर एफिडेविट के जरिए दिया गया है। चुनाव आयोग ने यह जवाब 16 सितंबर 2026 को दाखिल किया था। आयोग ने अपने जवाब में बताया है कि SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए बनाए गए अपीलीय ट्रिब्यूनल काम कर रहे हैं और इन मामलों की सुनवाई के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यवस्था भी तैयार की गई है।

38.20 लाख अपीलें दाखिल, 37.18 लाख लंबित

चुनाव आयोग के हलफनामे में अपीलों का विस्तृत आंकड़ा दिया गया है। इसके मुताबिक SIR से जुड़े मामलों में कुल 38,20,683 अपीलें दाखिल की गई हैं। इनमें से अभी तक 1,02,231 अपीलों का निपटारा हुआ है, जबकि 37,18,452 अपीलें लंबित हैं। यानी कुल अपीलों में करीब 2.7 फीसदी का ही निपटारा हुआ है और 97 फीसदी से ज्यादा मामले अभी लंबित हैं।

आयोग के हलफनामे के शुरुआती हिस्से में यह भी बताया गया है कि 34 लाख से ज्यादा अपीलें दाखिल हो चुकी थीं। वहीं Annexure R/4 में बाद की स्थिति का कुल आंकड़ा 38.20 लाख दिया गया है। यानी दोनों आंकड़े अलग-अलग चरणों की स्थिति को दर्शाते हैं।

अपीलों में नाम हटाने और नाम जोड़ने दोनों से जुड़े मामले

चुनाव आयोग ने बताया है कि अपीलीय ट्रिब्यूनल के सामने आने वाली अपीलों में उन लोगों के मामले शामिल हैं, जिनके नाम मतदाता सूची में शामिल करने के दावे खारिज किए गए। इसके अलावा ऐसे मामलों में भी अपील का रास्ता रखा गया है, जहां किसी दूसरे व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाने पर आपत्ति की गई है।

हालांकि आयोग के इस ताजा आंकड़े में 38.20 लाख अपीलों का अलग-अलग ब्रेकअप नहीं दिया गया है। यानी यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें कितनी अपीलें वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ हैं और कितनी अपीलें किसी नाम को मतदाता सूची में शामिल किए जाने के खिलाफ दाखिल हुई हैं।

60 लाख से ज्यादा दावों और आपत्तियों पर हुआ फैसला

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में SIR की पिछली प्रक्रिया का भी विवरण दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने और उससे जुड़ी आपत्तियों की सुनवाई के लिए न्यायिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी।

इस प्रक्रिया में पश्चिम बंगाल के न्यायिक अधिकारियों के साथ झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारियों ने भी सहयोग किया। आयोग के जवाब में बताया गया है कि इस प्रक्रिया के दौरान 60 लाख से ज्यादा दावों और आपत्तियों पर न्यायिक अधिकारियों ने फैसला किया।

सुप्रीम कोर्ट ने 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए हैं

SIR की प्रक्रिया में किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होने या किसी नाम के शामिल किए जाने पर आपत्ति से जुड़े विवादों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 मार्च 2026 के आदेश के जरिए यह व्यवस्था बनाई थी। इन ट्रिब्यूनल में कलकत्ता हाईकोर्ट और पड़ोसी राज्यों के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और पूर्व न्यायाधीशों को जिम्मेदारी दी गई। इसका उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों द्वारा SIR के दौरान लिए गए फैसलों के खिलाफ अपील की सुनवाई के लिए एक अलग व्यवस्था उपलब्ध कराना था।

ट्रिब्यूनल को पूरा रिकॉर्ड देखकर देना है फैसला

आयोग के मुताबिक अपीलीय ट्रिब्यूनल सिर्फ पहले दिए गए फैसले को देखकर फैसला नहीं करेंगे। उन्हें संबंधित मामले का पूरा रिकॉर्ड, न्यायिक अधिकारी द्वारा दिए गए कारण और संबंधित दस्तावेज देखने होंगे। इसके बाद ट्रिब्यूनल को अपील पर अंतिम फैसला देना होगा।

आयोग ने बताया है कि ट्रिब्यूनल के फैसले के कारण भी संबंधित पक्षों को बताए जाने हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि SIR से जुड़े मामलों में अपील करने वाले व्यक्ति को अपने मामले पर सुनवाई और फैसले का स्पष्ट कारण मिल सके।

13 अप्रैल से ट्रिब्यूनल शुरू करने की तैयारी

चुनाव आयोग के जवाब में ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को लेकर तैयारियों का भी जिक्र है। ट्रिब्यूनल के लिए Standard Operating Procedure यानी SOP तैयार की गई थी। इसके अलावा ऑनलाइन पोर्टल, जरूरी तकनीकी व्यवस्था और अधिकारियों की ट्रेनिंग का काम भी पूरा किया गया।

आयोग के मुताबिक ट्रिब्यूनल को 13 अप्रैल 2026 से काम शुरू करना था। ट्रिब्यूनल के कामकाज के लिए तय स्थानों का निरीक्षण भी किया गया और ऑनलाइन पोर्टल से संबंधित बैठकें हुईं।

ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से अपील की व्यवस्था

आयोग ने अपने जवाब में कहा है कि अपील दाखिल करने और उसकी सुनवाई के लिए जरूरी व्यवस्था बनाई गई है। इसमें ऑनलाइन पोर्टल के साथ ऑफलाइन प्रक्रिया का भी प्रावधान है। यानी अपील करने वाले लोगों के लिए सिर्फ डिजिटल माध्यम पर निर्भर रहने की व्यवस्था नहीं रखी गई।

ट्रिब्यूनल को संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर मामले की सुनवाई कर फैसला देने की जिम्मेदारी दी गई है।

याचिका में क्या मांग की गई है?

प्रसेनजीत बोस की याचिका में SIR के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को वापस शामिल करने और अपीलीय ट्रिब्यूनल को प्रभावी तरीके से संचालित करने से जुड़ी राहत मांगी गई है।

याचिका में डिलीटेड लिस्ट में डाले गए नामों से जुड़े फैसलों को चुनौती देने की मांग भी की गई है। साथ ही ट्रिब्यूनल में अपील दाखिल करने के लिए उचित ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।

चुनाव आयोग ने कहा- प्रक्रिया पहले से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत

चुनाव आयोग का कहना है कि याचिका में जिन राहतों की मांग की गई है, उनका संबंध मुख्य रूप से SIR के बाद की अपील प्रक्रिया से है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि इन मामलों के लिए पहले ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत न्यायिक अधिकारियों और उसके बाद अपीलीय ट्रिब्यूनल की व्यवस्था बनाई जा चुकी है।

आयोग ने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत दावों और आपत्तियों की सुनवाई के लिए न्यायिक अधिकारियों की व्यवस्था की थी। इसके बाद उन फैसलों के खिलाफ अपील के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल बनाए गए।

लेकिन अब भी 37.18 लाख अपीलें लंबित

आयोग की ओर से ट्रिब्यूनल के पूरी तरह काम करने और व्यवस्था तैयार होने की जानकारी देने के साथ ही Annexure R/4 में लंबित मामलों का बड़ा आंकड़ा भी सामने आया है।

38,20,683 अपीलों में से 1,02,231 का निपटारा हुआ है, जबकि 37,18,452 मामले अभी लंबित हैं। यानी बड़ी संख्या में अपीलों पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।

अगस्त में कपिल सिब्बल ने भी उठाया था धीमे निपटारे का मुद्दा

SIR से जुड़ी अपीलों के धीमे निपटारे का मुद्दा इससे पहले कपिल सिब्बल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उठाया था। अगस्त में उन्होंने उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा था कि बड़ी संख्या में अपीलें लंबित हैं और इनके निपटारे की रफ्तार को लेकर सवाल उठता है। उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि अगर इसी गति से मामले आगे बढ़े तो सभी अपीलों के निपटारे में कितना समय लगेगा।

अब चुनाव आयोग के सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाब में सामने आए ताजा आंकड़ों के मुताबिक कुल 38.20 लाख अपीलों में से सिर्फ 1.02 लाख का निपटारा हुआ है, जबकि 37.18 लाख मामले लंबित हैं। यानी अगस्त में उठाया गया अपीलों के निपटारे की रफ्तार का मुद्दा अब आयोग के ताजा आंकड़ों के साथ फिर सामने आया है।

जिलावार भी सामने आया अपीलों का आंकड़ा

आयोग ने जिलावार भी अपीलों की स्थिति बताई है। मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा 7,47,921 अपीलें दाखिल हुईं। इनमें से सिर्फ 514 का निपटारा हुआ और 7,47,407 मामले लंबित हैं।

मालदा में 5,31,345 अपीलें दाखिल हुईं, जिनमें 1,514 का निपटारा हुआ और 5,29,831 लंबित हैं। उत्तर 24 परगना में 3,59,375 अपीलों में से 301 का निपटारा हुआ और 3,59,074 लंबित हैं। वहीं दक्षिण 24 परगना में 3,21,754 अपीलों में से 22,049 का निपटारा हुआ और 2,99,705 मामले लंबित हैं।

हुगली में 27 हजार से ज्यादा अपीलों का निपटारा

जिलावार आंकड़ों में हुगली में सबसे ज्यादा 27,356 अपीलों का निपटारा हुआ है। यहां कुल 1,07,111 अपीलें दाखिल हुई थीं और 79,755 मामले अभी लंबित हैं।

इसके अलावा दक्षिण 24 परगना में 22,049, दक्षिण दिनाजपुर में 10,254 और उत्तर दिनाजपुर में 9,104 अपीलों का निपटारा हुआ है। पुरुलिया में 15,005 अपीलों में से 8,339 का निपटारा हो चुका है और 6,666 मामले लंबित हैं।

नाम हटाए गए लोगों के मामलों पर भी नजर

SIR से जुड़े मामलों में लंबित अपीलों का एक अहम पहलू यह है कि इनमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जिनमें लोगों ने अपने नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाने को चुनौती दी है। दूसरी तरफ कुछ अपीलें मतदाता सूची में किसी नाम को शामिल किए जाने के खिलाफ भी हैं।

इसलिए 37.18 लाख लंबित अपीलों को सिर्फ हटाए गए मतदाताओं की अपील मानना सही नहीं होगा। चुनाव आयोग के हलफनामे में इन दोनों श्रेणियों का अलग-अलग आंकड़ा फिलहाल उपलब्ध नहीं कराया गया है।

अपील लंबित है तो इसका मतलब अंतिम फैसला नहीं

अपीलीय ट्रिब्यूनल में मामला लंबित होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का दावा सही या गलत तय हो चुका है। ट्रिब्यूनल को रिकॉर्ड और संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर फैसला करना है। सुप्रीम कोर्ट की तय व्यवस्था के मुताबिक अगर अपील स्वीकार होती है तो उसके अनुरूप मतदाता सूची में जरूरी कार्रवाई की जानी है।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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