Chhatron Ki Goonj: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में 19 सितंबर को कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi Indore Visit) का 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम होना है। इस बड़े आयोजन से पहले इंदौर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। कार्यक्रम की प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी अनुमति देने के लिए पुलिस ने आयोजकों के सामने 31 शर्तों की एक लंबी सूची रखी है। इसके साथ ही आयोजकों से इन सभी नियमों का अक्षरशः पालन करने के लिए एक औपचारिक शपथ पत्र भी मांगा गया है।
पुलिस द्वारा जारी इन 31 शर्तों में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी की हत्या के बाद गठित किए गए जस्टिस जे.एस. वर्मा आयोग की रिपोर्ट का विशेष संदर्भ दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि 1991 में हुए उस दर्दनाक हादसे के बाद वीआईपी सुरक्षा और राजनीतिक आयोजनों को लेकर आयोग ने कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और सिफारिशें दी थीं। राहुल गांधी की सुरक्षा श्रेणी और अतीत की घटनाओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस इस बार किसी भी स्तर पर चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहती।
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एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया क्या बोले?
इंदौर के एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने साफ किया है कि आयोजन स्थल पर भीड़ नियंत्रण, मजबूत बैरिकेडिंग, आपातकालीन निकासी (एग्जिट) और प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा जांच जैसी जिम्मेदारियां पूरी तरह आयोजकों के साथ समन्वय में तय की गई हैं। सुरक्षा मानकों का पालन करना इस अनुमति प्रक्रिया का सबसे अहम हिस्सा है।
इस पूरे मामले पर क्या बोली कांग्रेस?
इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश का सियासी माहौल भी गर्मा गया है। जहां कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बरोलिया का कहना है कि वे सभी कानूनी और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाएंगे, वहीं बीजेपी प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने इसे सुरक्षा के लिहाज से एक जरूरी और सामान्य प्रशासनिक कदम बताया है। फिलहाल पुलिस प्रशासन और रेकी टीमें आयोजन स्थल की हर बारीक व्यवस्था पर नजर बनाए हुए हैं।
