Kamil, Fazil degrees: उत्तर प्रदेश सरकार ने मदरसों में संचालित उच्च शिक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि अब प्रदेश के मदरसों में केवल आलिम स्तर (12वीं/इंटरमीडिएट तक) की शिक्षा ही संचालित होगी। इसके साथ ही कामिल (स्नातक) और फाजिल (परास्नातक) स्तर के पाठ्यक्रम समाप्त कर दिए जाएंगे।
'उच्च शिक्षा की डिग्रियां प्रदान नहीं कर सकते मदरसे'
सरकार के अनुसार यह फैसला 5 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में लिया गया है। सरकार का कहना है कि मदरसे उच्च शिक्षा की डिग्रियां प्रदान नहीं कर सकते और कामिल व फाजिल डिग्रियों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से मान्यता भी प्राप्त नहीं है। ऐसे में अब प्रदेश के मदरसों में शिक्षा केवल माध्यमिक और इंटरमीडिएट स्तर तक ही सीमित रहेगी।
'हजारों छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं'
इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि सरकार ने कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों को समाप्त करने का निर्णय लिया है, लेकिन इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से हजारों छात्र उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और कई लोग इन्हीं योग्यताओं के आधार पर विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने स्पष्ट किया है कि पहले से नौकरी कर रहे लोगों के अधिकार प्रभावित नहीं होंगे, लेकिन भविष्य में मदरसों से इस तरह की डिग्रियां जारी नहीं की जाएंगी।
फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील
मौलाना रज़वी ने सरकार से छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि कामिल और फाजिल पाठ्यक्रमों को समाप्त करने के बजाय उनकी संबद्धता किसी विश्वविद्यालय से कर दी जाए, ताकि छात्रों की पढ़ाई और भविष्य प्रभावित न हो। उनका कहना था कि मदरसा शिक्षा बोर्ड के गठन के बाद से करीब 50 वर्षों तक ये डिग्रियां मान्य और स्वीकार्य रही हैं, इसलिए इन्हें अचानक समाप्त करने से बड़ी संख्या में छात्रों के सामने कठिनाइयां खड़ी हो सकती हैं।
मौलाना ने यह भी कहा कि पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसा शिक्षा बोर्ड के अस्तित्व पर सवाल उठाए थे, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाते हुए मदरसा शिक्षा बोर्ड को यथावत रखने का आदेश दिया था, जबकि कामिल और फाजिल डिग्रियों के संबंध में निर्णय सरकार के विवेक पर छोड़ दिया था।
