RSS Dattatreya Hosabale Caste Bias Statement: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को भोपाल के ऐतिहासिक लाल परेड ग्राउंड में स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए जातिगत भेदभाव और छुआछूत को हिंदू समाज पर एक 'कलंक' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जन्म के आधार पर कोई भेदभाव हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है और इसे केवल कानूनों या उपदेशों के जरिए नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के अपने व्यवहार में बदलाव लाकर ही पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।
अपने संबोधन में उन्होंने भारत के वैश्विक उत्थान, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय कद पर भी विस्तृत विचार व्यक्त किए।
'जन्म के आधार पर भेदभाव हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं'
दत्तात्रेय होसबाले ने सामाजिक समरसता पर बल देते हुए कहा कि समाज को भीतर से मजबूत करने के लिए जातिगत ऊंच-नीच का अंत बेहद आवश्यक है:
शबरी का उदाहरण: रामायण में भगवान राम द्वारा माता शबरी के जूठे बेर स्वीकार करने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि जब हमारे धर्मग्रंथ और आदर्श भेदभाव नहीं सिखाते, तो समाज में जाति के नाम पर भेद कैसे हो सकता है?
आचरण में बदलाव जरूरी: होसबाले ने कहा, 'जातिवाद और अस्पृश्यता को केवल कानूनी प्रावधानों या भाषणों से नहीं मिटाया जा सकता। इसके लिए बदलाव की शुरुआत हर व्यक्ति को अपने घर और अपने आचरण से करनी होगी। जाति के नाम पर किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार पूरे समाज को कमजोर करता है।'
भारत का उत्थान मानवता की सेवा के लिए, प्रभुत्व स्थापित करने के लिए नहीं
आरएसएस के वरिष्ठ नेता ने भारत की 5,000 साल पुरानी सभ्यतागत यात्रा और उसके वैश्विक दृष्टिकोण को रेखांकित किया:
वैश्विक साख में वृद्धि: उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों और नागरिकों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन किया है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत का वैश्विक गौरव और सम्मान काफी बढ़ा है।
मानवता का कल्याण लक्ष्य: होसबाले ने जोर देकर कहा कि भारत की प्रगति केवल आर्थिक या भौतिक प्रगति तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भारत का उत्थान किसी अन्य देश पर दबदबा बनाने, शोषण करने या अहंकार से किसी को दबाने के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता की सेवा और सहायता के लिए होना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समाज की सामूहिक जिम्मेदारी और दैनिक जीवन में पर्यावरण सुरक्षा की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया। हाल ही में असम में आई बाढ़ का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आरएसएस की संबद्ध संस्था 'सेवा भारती' के साथ-साथ कॉलेज के छात्र और समाज के सभी वर्गों के युवा मदद के लिए आगे आए। संकट के समय पूरे समाज को एक साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल मंचों से प्रस्ताव पारित करने से पर्यावरण की रक्षा नहीं होगी। इसके लिए नदियों की सफाई और संरक्षण को घरों, स्कूलों, कार्यस्थलों और बाजारों में दैनिक जीवन के आचरण में शामिल करना होगा।
