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यूपी में 'बाबा' को रोकने के लिए AIMIM से मिलाएं हाथ, चुनाव के बाद रोना मत, ओवैसी का विपक्षी दलों को अल्टीमेटम

कानपुर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को तीसरी बार सरकार बनाने से रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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कानपुर में ओवैसी की रैली

Photo : ANI

Asaduddin Owaisi: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया सियासी घमासान छेड़ दिया है। कानपुर में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने ऐलान किया कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को तीसरी बार सरकार बनाने से रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसके लिए उन्होंने राज्य के तमाम विपक्षी दलों को AIMIM के साथ गठबंधन करने का खुला प्रस्ताव दिया है।

कमजोरी न समझें मेरी खामोशी

ओवैसी ने विपक्षी दलों (खासकर समाजवादी पार्टी और अन्य गैर-भाजपा दलों) को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उनकी सुलह की कोशिशों को कोई कमजोरी न समझे। अगर किसी राजनीतिक दल के लोग मेरे बार-बार दिए जा रहे बयानों को कमजोरी का संकेत समझने की भूल कर रहे हैं, तो मैं बेहद सम्मान के साथ उनसे कहना चाहता हूं—यह खामोशी केवल तूफान से पहले की शांति है। इसे हमारी कमजोरी मत समझिए... हम आपके साथ हाथ मिलाने को तैयार हैं।

अखिलेश यादव पर तीखा हमला

अपने भाषण के दौरान ओवैसी ने बिहार विधानसभा चुनाव और हालिया राजनीतिक गतिविधियों का जिक्र करते हुए समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा। ओवैसी ने याद दिलाया कि बिहार चुनाव के दौरान AIMIM ने सिर्फ 6 सीटें मांगकर एकजुट होकर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन विपक्षी दलों ने उनका मजाक उड़ाया और उन पर झूठे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने सीमांचल में AIMIM के खिलाफ प्रचार करने के लिए अपनी पार्टी के 3-4 मुस्लिम सांसदों (किशनगंज, कटिहार, अररिया) को मैदान में उतारा था। लेकिन सीमांचल की जनता—खासकर माताओं, बहनों और बेटियों ने एकजुट होकर उनके झूठे दावों को खारिज कर दिया और AIMIM के पक्ष में मतदान कर अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराया।

2 अक्टूबर तक का अल्टीमेटम

उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति स्पष्ट करते हुए ओवैसी ने सभी विपक्षी दलों को फैसला लेने के लिए 2 अक्टूबर तक की समयसीमा दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बाद में चुनाव खत्म होने के बाद रोना मत... हम 2 अक्टूबर तक इंतजार करेंगे। उसके बाद, हम जिसके साथ भी गठबंधन करेंगे, उसका ऐलान उसी दिन करेंगे और उनके साथ मिलकर उत्तर प्रदेश का चुनाव पूरी मजबूती से लड़ेंगे।

बयान के सियासी मायने

कानपुर से दिया गया ओवैसी का यह बयान उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम मतदाताओं के ध्रुवीकरण और 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। 2 अक्टूबर की तारीख तय करके ओवैसी ने गेंद अब सपा, बसपा और कांग्रेस जैसी मुख्य विपक्षी पार्टियों के पाले में डाल दी है। अब देखना यह होगा कि क्या विपक्षी दल ओवैसी के इस प्रस्ताव पर विचार करते हैं या AIMIM एक बार फिर अपने दम पर या नए सहयोगियों के साथ मैदान में उतरती है।

गैर-भाजपा दलों को गठबंधन का प्रस्ताव और अल्टीमेटम

ओवैसी की मंशा साफ है कि कोई भी विपक्षी दल (विशेष रूप से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस) अकेले भाजपा को यूपी में तीसरी बार सत्ता में आने से नहीं रोक सकता। इसलिए वे विपक्षी एकता की वकालत कर रहे हैं। इसीलिए ओवैसी ने मुख्य विपक्षी दलों को 2 अक्टूबर तक फैसला लेने का अल्टीमेटम दिया है। अगर 2 अक्टूबर तक कोई बड़ा विपक्षी दल उनके साथ नहीं आता है, तो वे छोटे दलों/दलित-मुस्लिम केंद्रित मोर्चों के साथ गठबंधन का औपचारिक ऐलान करेंगे। ओवैसी का आरोप है कि मुख्य विपक्षी पार्टियां (विशेष रूप से सपा) मुस्लिमों का इस्तेमाल केवल वोट बैंक के रूप में करती हैं और बदले में उन्हें राजनीतिक नेतृत्व या प्रतिनिधित्व नहीं देतीं।

Amit Mandal
अमित कुमार मंडलauthor

अमित मंडल टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में न्यूज डेस्क पर Assistant Editor के रूप में काम कर रहे हैं। प्रिंट, टीवी और डिजिटल—तीनों माध्यमों में कुल मिलाकर 15 सालों से अधिक का अनुभव उन्हें खबरों को देखने की व्यापक दृष्टि देता है। ब्रेकिंग न्यूज, लाइव ब्लॉग, स्पेशल स्टोरीज और एक्सप्लेनेर फॉर्मेट पर उनकी मजबूत पकड़ है। एंगल चुनने की कला, खबरों की गति को समझना और समय पर सही जानकारी पहुंचाना—ये उनकी सबसे बड़ी खूबियां हैं। अमित अपने करियर में करीब 20 हजार से अधिक न्यूज आर्टिकल, एनालिसिस और एक्सप्लेनर पब्लिश कर चुके हैं।

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