West Bengal Lok Sabha Seat Sharing: इंडिया गठबंधन के अंदर लोकसभा सीट बंटवारे को लेकर घमासान छिड़ा हुआ है। कई राज्य ऐसे हैं, जहां कोई भी पार्टी समझौता करने को तैयार नहीं है। स्थानीय स्तर से लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक बेचैनी का माहौल है। इस बीच ममता बनर्जी की बदलती चालों के बीच पश्चिम बंगाल INDIA गठबंधन में कांग्रेस के लिए सबसे मुश्किल सवाल होने जा रहा है।
दरअसल, पहले ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनावों में कांग्रेस को दो सीटों का ऑफर दिया। इस पर कांग्रेस भड़क गई। अब ममता बनर्जी ने एक बार फिर संकेत दिए हैं कि कांग्रेस के साथ उनकी बातचीत विफल रहती है तो टीएमसी लोकसभा चुनावों में अकेले उतरने के लिए भी तैयार है। तृणमूल कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए पश्चिम बंगाल में सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के लिए उसका दिल खुला है लेकिन अगर बातचीत विफल रहती है तो वह अकेले चुनाव लड़ने के लिए भी तैयार है।
सोनिया और ममता करेंगी फैसला
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा कि सीट बंटवारे के बारे में कांग्रेस के स्थानीय नेता क्या सोच रहे हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि अंतिम निर्णय दोनों दलों के शीर्ष नेताओं द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा, हमारी नेता ममता बनर्जी पहले ही कह चुकी हैं कि कांग्रेस के लिए हमारा दिल खुला है। अब, वे क्या करेंगे यह उन पर निर्भर है। पश्चिम बंगाल में गठबंधन होगा या नहीं, इसका फैसला सोनिया गांधी और ममता बनर्जी करेंगी। स्थानीय कांग्रेस नेता क्या सोचते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
अधीर रंजन के बयान के बाद आई टीएमसी की प्रतिक्रिया
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता की यह टिप्पणी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के उस बयान के दो दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी से सीट की भीख नहीं मांगेगी। तृणमूल कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि पार्टी पश्चिम बंगाल में गठबंधन के लिए तैयार है लेकिन जरूरत पड़ने पर वह अकेले भी चुनाव मैदान में उतरने को तैयार है। पार्टी के कई नेताओं ने बताया कि तृणमूल कांग्रेस राज्य की 42 लोकसभा सीट में से चार सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने पर विचार कर रही है।
पहले विधानसभा चुनावों में हो चुका है गठबंधन
तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष बनर्जी ने इससे पहले पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और वाम दलों के बीच गठबंधन का भरोसा जताया था। इस प्रस्ताव को उनकी धुर विरोधी मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने तत्काल खारिज कर दिया था और कांग्रेस के कुछ नेताओं ने इसकी आलोचना की थी। कुछ दिन बाद, उन्होंने दोनों दलों पर भाजपा के साथ हाथ मिलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह तृणमूल कांग्रेस ही है जो पश्चिम बंगाल में भगवा खेमे का मुकाबला करेगी। तृणमूल कांग्रेस ने इससे पहले 2001 के विधानसभा चुनाव, 2009 के लोकसभा चुनाव और 2011 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था।
लोकसभा में 22 सीटों पर जीती थी टीएमसी
साल 2019 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 22 सीट, कांग्रेस ने दो सीट और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में 18 सीट हासिल की थी। लोकसभा में कांग्रेस के नेता चौधरी ने मुर्शिदाबाद जिले की बहरामपुर सीट से जीत दर्ज की थी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अबू हासिम खान चौधरी ने पड़ोसी मालदा जिले की मालदा दक्षिण सीट से लगातार तीसरी जीत हासिल की थी।
