सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच मामले में पुलिस के सामने पेश होने के आदेश के खिलाफ महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। बेंच ने उन पर अंडे फेंके जाने की आशंका पर सवाल उठाए, जिसके बाद उनके वकील ने याचिका वापस ले ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें उन्होंने हेट स्पीच मामले में पुलिस के सामने पेश होने के कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। बेंच ने उन पर अंडे फेंके जाने की आशंका पर सवाल उठाए थे।
अप्रैल में विधानसभा चुनावों के बाद बंगाल में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से, मोइत्रा और अभिषेक बनर्जी समेत तृणमूल के कई नेताओं पर अंडे फेंके जाने की घटनाएं हुई हैं।
आज सुनवाई के दौरान, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा कि वे हाई कोर्ट के आदेश में दखल देने के पक्ष में नहीं हैं। यह बात मोइत्रा के वकील की उस दलील के बाद कही गई जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें पुलिस के सामने वर्चुअली पेश होने का कानूनी अधिकार है।
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तृणमूल सांसद की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कोर्ट को बताया कि पुलिस नोटिस में उन्हें अपने चुनाव क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में पेश होने के लिए कहा गया था और उन्होंने उनके पिछले दौरों के दौरान हुई घटनाओं का भी ज़िक्र किया।
अंडे फेंकने जैसी धमकियां दी गईं और दूसरी बार सचमुच अंडे फेंके गए'
उन्होंने कहा, 'पुलिस के नोटिस के मुताबिक, मुझे अपने ही चुनाव क्षेत्र के पुलिस स्टेशन में हाजिर होना है। पिछली बार जब मैं वहां गई थी, तो दो बातें हुईं। पहली बात, अंडे फेंकने जैसी धमकियां दी गईं और दूसरी बार सचमुच अंडे फेंके गए।' बेंच ने मोइत्रा की आशंका पर सवाल उठाते हुए कहा, 'आप सांसद हैं। राजनीति में आने के बाद भी आपको अंडों से डर लगता है?' इसमें आगे कहा गया, 'जब हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने सीने पर गोलियां खाई हैं? ये ऐसी अर्जियां हैं जो इस कोर्ट के सामने बिल्कुल नहीं आनी चाहिए।' जब टॉप कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि वह इस याचिका पर सुनवाई नहीं करना चाहता, तो मोइत्रा के वकील ने याचिका वापस ले ली।
'यह मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित'
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 21 जुलाई को हेट स्पीच मामले में मोइत्रा को 5 अक्टूबर तक सख़्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा दी थी; कृष्णानगर की सांसद का दावा है कि यह मामला मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है। मोइत्रा ने नादिया ज़िले में दर्ज मामले में पुलिस की सख़्त कार्रवाई से सुरक्षा और मामले की कार्यवाही को रद्द करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था।
पूछताछ के लिए जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश
जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने मोइत्रा को जांच में सहयोग करने और पूछताछ के लिए जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट पुलिस के सामने पेश होने के निर्देश को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुनवाई कर रहा था। हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि 5 अक्टूबर तक उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए, बशर्ते वह कोर्ट की शर्तों का पालन करें और जांच में सहयोग करें।इस मामले पर हाई कोर्ट में 1 अक्टूबर को फिर से सुनवाई होनी है।
