झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े पीएमएलए मामले में सोमवार को रांची की स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई। हेमंत सोरेन की ओर से मामले में चार्ज फ्रेम करने की कार्रवाई टालने की मांग को लेकर अर्जी दाखिल की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। हालांकि, सर्वर डाउन होने के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी नहीं हो सकी और चार्ज फ्रेमिंग के मुद्दे पर आज सुनवाई नहीं हो पाई।
बचाव पक्ष ने क्यों मांगी कार्रवाई टालने की मांग?
हेमंत सोरेन की ओर से पेश बचाव पक्ष ने कोर्ट में दलील दी कि मामले में आगे की जांच अभी लंबित है। ऐसे में फिलहाल चार्ज फ्रेम करने की स्थिति नहीं है। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर चार्ज फ्रेमिंग की कार्रवाई को टालने की मांग की थी। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने बचाव पक्ष की इस अर्जी का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अर्जी खारिज कर दी।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि केवल आगे की जांच लंबित होने के आधार पर न्यायिक कार्रवाई को रोकना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि पीएमएलए की धारा 44 के तहत आगे की जांच किए जाने और सप्लीमेंट्री शिकायत दाखिल किए जाने की गुंजाइश बनी रहती है।
इस तरह कोर्ट ने साफ किया कि आगे की जांच का विकल्प मौजूद रहने के बावजूद मामले में चल रही न्यायिक प्रक्रिया को केवल इसी आधार पर रोका नहीं जा सकता।
यूआरयूडी की सूची को लेकर भी हुई बहस
सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन की ओर से Un-relied Upon Documents (URUDs) की सूची नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया। इस पर ईडी के विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि कोर्ट के 24 जून 2025 के आदेश का पहले ही पालन किया जा चुका है।
ईडी की ओर से यह भी कहा गया कि हेमंत सोरेन के वकील ने डिस्चार्ज याचिका दाखिल करते समय सूची मिलने की बात स्वीकार की थी। ईडी ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो अगली तारीख पर सूची दोबारा उपलब्ध करा दी जाएगी।
