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ऐसे ही थोड़े न राम मंदिर का चढ़ावा हुआ चोरी, कदम-कदम पर चोरों का था 'बुलावा'; SIT रिपोर्ट में सब सच सामने!

Ram Mandir SIT Report: राम मंदिर चंदा चोरी की एसआईडी रिपोर्ट से कई बातें सामने आईं हैं। सूत्रों के अनुसार जारी व्यवस्था में काफी गड़बड़ियां मिली हैं।

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राम मंदिर एसआईटी रिपोर्ट ने कई राज आए बाहर (फोटो- PTI)

Ram Mandir SIT Report: न तो चढ़ावे का हिसाब, न दानपेटी का हिसाब, न आभूषणो का हिसाब और न ही निगरानी की प्रोपर व्यवस्था...राम मंदिर चढ़ावा चोरी में SIT रिपोर्ट से जो बातें सामने आ रही हैं, उससे साफ पता चल रहा है कि चोरों एक तरह से चोरी के लिए आमंत्रण टाइप की व्यवस्था चल रही थी। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार । रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि यह केवल कोई तकनीकी चूक या छोटी-मोटी मानवीय भूल नहीं थी, बल्कि सुरक्षा नियमों और तय गाइडलाइंस को ताक पर रखकर बरती गई वह क्रिमिनल लापरवाही थी, जिसने शातिर चोरों को करोड़ों के चढ़ावे पर हाथ साफ करने का खुला और अनुकूल माहौल दिया। श्रद्धालुओं की अगाध आस्था और उनके द्वारा चढ़ाए गए सोने, चांदी और अरबों रुपये की नकदी के प्रबंधन में किस कदर खिलवाड़ हो रहा था, उसकी पूरी परतें इस रिपोर्ट ने खोल कर रख दी हैं।

हुंडियों के संचालन में भारी खेल

रिपोर्ट के मुताबिक, मंदिर परिसर में रखी हुंडियों (दानपात्रों) को खोलने, उन्हें खाली करने और उनके भीतर निकले चढ़ावे का रिकॉर्ड रखने में भारी अनियमितताएं पाई गईं। अलग-अलग हुंडियों से निकली नकदी और सामग्री को बिना किसी रिकॉर्ड के आपस में मिला दिया जाता था। इससे यह ट्रैक करना नामुमकिन हो गया कि कौन सी राशि या कीमती सामान किस दानपात्र से आया था। किस दिन कौन सी हुंडी से कितना चढ़ावा निकला, उसमें से कितनी रकम की गिनती हुई और कितना बकाया रह गया- इसका कोई स्पष्ट या व्यवस्थित लिखित ब्यौरा ही मौजूद नहीं था।

सोना-चांदी और कीमती सामान की 'चेन ऑफ कस्टडी' फेल

भक्तों द्वारा भगवान के चरणों में अर्पित किए गए सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य रत्नों के रखरखाव की व्यवस्था को बेहद कमजोर और संदिग्ध पाया गया है। नियमों के मुताबिक, हर बार कीमती वस्तुओं की फोटोग्राफी, उनका सटीक वजन, सीलिंग और ऑन-रिकॉर्ड एंट्री होनी अनिवार्य थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। कई मामलों में जो कागजी दस्तावेज दिखाए गए, जमीनी हकीकत और वास्तविक प्रक्रिया उनसे कोसों दूर मिली। कई जरूरी रजिस्टर और रसीदें अधूरी छोड़ दी गईं।

न तलाशी हुई न बायोमेट्रिक

बैंक और ट्रस्ट के बीच सुरक्षा को लेकर एक बेहद सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की गई थी, लेकिन जांच दल ने पाया कि ये नियम केवल फाइलों की शोभा बढ़ा रहे थे। नोटों और कीमती सामान की गिनती करने वाले मुख्य कक्ष में आने-जाने वाले कर्मचारियों की नियमित तलाशी तक नहीं की जा रही थी, जबकि SOP में यह पूरी तरह अनिवार्य था। कर्मचारियों के लिए तय विशेष ड्रेस कोड, बायोमेट्रिक अटेंडेंस और गणना कक्ष में निजी सामान ले जाने पर रोक जैसे बुनियादी सुरक्षा चक्रों को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया। परिसर में तीसरी आंख यानी हाई-टेक सीसीटीवी कैमरों का पूरा जाल होने के बावजूद चोरी की वारदातें लगातार होती रहीं। निगरानी व्यवस्था होने के बाद भी चोरियां न रुकना यह साबित करता है कि सुपरविजन और मॉनिटरिंग का पूरा सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त था।

अनधिकृत पहुंच और जीरो जवाबदेही

जांच में सबसे गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक चूक यह सामने आई कि कुछ लोग बिना किसी स्पष्ट लिखित आदेश या आधिकारिक अनुमति के हुंडियों और चढ़ावे की पूरी व्यवस्था को संभाल रहे थे। इसने सीधे तौर पर बाहरी या अनधिकृत लोगों को मंदिर के खजाने तक सीधी पहुंच दे दी। हद तो यह है कि पूरे सिस्टम में यह कहीं तय ही नहीं था कि किस अधिकारी या कर्मचारी की क्या जिम्मेदारी है, जिससे गड़बड़ी होने पर किसी की जवाबदेही तय न की जा सके।

लापरवाही ने लिखा चोरी का पूरा स्क्रिप्ट

जांच दल की यह रिपोर्ट इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि यह पूरा मामला सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं है। सुरक्षा नियमों की पूरी जानकारी होने के बावजूद अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर लापरवाही बरती गई। इसी सिस्टम की सड़न और गंभीर खामियों का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों ने लंबे समय तक भगवान के खजाने में बेखौफ होकर चोरी और गबन जैसी शर्मनाक घटनाओं को अंजाम दिया। जांच टीम ने अब इस पूरी व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से बेहद सख्त, पारदर्शी और अभेद्य बनाने की सिफारिश की है।

Vinod Mishra
विनोद मिश्राauthor

दिल्ली से लेकर यूपी की राजधानी लखनऊ में करीब दो दशक से टीवी पत्रकारिता कर रहें है। यूपी की सियासत की नब्ज और ब्यूरोकेसी की समझ है। पत्रकारिता एक पैशन है।

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