राम मंदिर चंदा चोरी केस में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें सीबीआई जांच की मांग की थी।याचिकाकर्ता मोहित अशोक ने मांग की थी कि राम मंदिर में हुई चढ़ावे की चोरी के मामले की CBI जांच का आदेश हाईकोर्ट दे। इस मामले पर सरकार की तरफ से AAG विनोद शाही और CSC शैलेंद्र सिंह ने पक्ष रखते हुए कहा कि ऐसी याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए हाईकोर्ट में इस याचिका का कोई औचित्य नहीं है।
सुनवाई से इनकार
लखनऊ पीठ ने सोमवार को अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेरा-फेरी की स्वतंत्र जांच का आदेश देने के अनुरोध वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि इसी मुद्दे पर एक याचिका पहले से ही उच्चतम न्यायालय में लंबित है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने मोहित अशोक द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए इसे निस्तारित कर दिया।
याचिका कर्ता की मांग
याचिकाकर्ता ने राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के कथित गबन की स्वतंत्र जांच कराने और मंदिर के वित्तीय मामले का ऑडिट भारत के नियंत्रक एवं लेखा महापरीक्षक (कैग) से कराने के निर्देश देने का अनुरोध किया था।
8 लोग हो चुके हैं गिरफ्तार
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की जांच के लिए गत 13 जून को गठित एसआईटी ने 23 जून को राज्य सरकार को अपनी शुरुआती रिपोर्ट सौंपी थी, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज करके आठ नामजद अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया था। जांचकर्ताओं ने हटाए गए सीसीटीवी फुटेज को भी बरामद किया है, जिसमें कथित तौर पर आरोपी लोग मंदिर परिसर से बाहर निकलते समय रकम छुपाते हुए दिखाई दे रहे हैं। हालांकि इस मामले में चंपत राय, अनिल मिश्रा और विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है, मगर फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने उनके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग करते हुए पुलिस को लिखित शिकायत सौंपी है।
