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यूं ही नहीं भारतीय नौसैनिकों की कतर से हुई घर वापसी, सजा सुनाए जाने से रिहाई तक PM Modi खुद ले रहे थे हर अपडेट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Feb 12, 2024, 04:24 PM IST

Qatar India Navy Officer: दिसंबर में प्रधानमंत्री मोदी ने दुबई में ‘कॉप 28’ शिखर सम्मेलन के मौके पर कतर के अमीर शेख तमीम बिन हम्माद अल-थानी से मुलाकात की थी। यह भी पता चला है कि NSA अजीत डोभाल ने भी कतर के अधिकारियों के साथ बातचीत में भूमिका निभाई थी।

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प्रधानमंत्री मोदी ले रहे थे हर जानकारी

Photo : PTI

Qatar India Navy Officer: कतर की जेल में बंद आठ भारतीय नौसैनिकों की रिहाई हो चुकी है। इनमें से सात वापस भारत भी लौट आए हैं। भारत लौटने के बाद नौसैनिकों ने केंद्र सरकार का आभार जताया है और कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बिना उनकी वापसी संभव नहीं हो पाती। कतर सरकार के इस फैसले पर भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी आभार जताकर कहा है कि देश अपने नागरिकों की रिहाई तथा उनकी घर वापसी को संभव बनाने के लिए कतर के अमीर के फैसले की सराहना करता है।

हालांकि, इन भारतीय नौसैनिकों की रिहाई इतनी आसान नहीं थी। इसके लिए भारत सरकार ने कूटनीतिक तरीके से कतर में इस मामले को उठाया, साथ ही खुद प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई में कतर के अमीर से मुलाकात की, जिसके बाद सैनिकों की रिहाई का रास्ता खुला। अब विदेश मंत्रालय की ओर से बड़ा बयान जारी किया गया है। विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व्यक्तिगत रूप से इस मामले से जुड़े हर अपडेट्स की जानकारी ले रहे थे।

पीएम मोदी ने व्यक्तिगत तौर पर दिखाई रुचि

विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने एक प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कह, हम भारतीय नौसैनिकों की वापसी के लिए आभारी हैं और उन्हें रिहा करने के कतर सरकार और अमीर के फैसले की गहराई से सराहना करते हैं। 8वें भारतीय नागरिक को भी रिहा कर दिया गया है और हम कतर सरकार के साथ काम करना जारी रखेंगे ताकि यह देखा जा सके कि उनकी भारत वापसी कितनी जल्दी संभव होगी। उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री ने स्वयं इस मामले में सभी घटनाक्रमों की व्यक्तिगत रूप से लगातार निगरानी की है और भारतीय नागरिकों की घर वापसी सुनिश्चित करने वाली किसी भी पहल के लिए कभी भी संकोच नहीं किया।

जासूसी मामले में सुनाई गई थी मौत की सजा

बता दें, कतर में भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को कथित रूप से जासूसी के एक मामले में पिछले साल अक्टूबर में मौत की सजा सुनाई गई थी। इन कर्मियों में कैप्टन(सेवानिवृत्त) नवतेज गिल और सौरभ वशिष्ठ, कमांडर (सेवानिवृत्त) पूर्णेंदु तिवारी, अमित नागपाल, एसके गुप्ता, बीके वर्मा, और सुगुनाकर पकाला और नाविक (सेवानिवृत्त) रागेश शमिल हैं। निजी कंपनी अल दहरा के साथ काम करने वाले भारतीय नागरिकों को जासूसी के एक कथित मामले में अगस्त 2022 में गिरफ्तार किया गया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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