Jantar Mantar Student Protest: जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले आंदोलन कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित मारपीट को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस उज्जवल भुइयां ने चिंता जताई है। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई को 'परेशान करने वाला' बताते हुए इसे 'गंभीर चिंता का विषय' करार दिया।
जस्टिस भुइयां ने पुलिसिया कार्रवाई पर जताया दुख
जस्टिस भुइयां ने पूर्व सचिव (सुरक्षा) यशोवर्धन आजाद की लिखी किताब 'पुलिसिंग द रिपब्लिक' के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। यह कार्यक्रम राजधानी के वायसराय हॉल में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा, ''जब हम भारतीय पुलिस सेवा के युवा अधिकारियों को खुद जाकर प्रदर्शनकारियों और आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग करते हुए देखते हैं, तो हम सभी को बहुत निराशा होती है। यह देखना वाकई बहुत दुखद है।''
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश का बयान ऐसे समय पर आया जब कुछ वक्त पहले ही शीर्ष न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच देशभर में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल छात्रों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर रद्द की। जिसके बाद, सीजेपी ने दिल्ली में पांच सितंबर को होने वाले अपने प्रस्तावित मार्च को रद्द कर दिया।
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जस्टिस भुइयां ने कहा, ''पुलिस अधिकारियों से जिस तटस्थता की उम्मीद की जाती है, वह नदारद होती दिख रही है और यह वाकई गंभीर चिंता का विषय है।'' इस कार्यक्रम में कांग्रेस सांसद पी. चिदंबरम, महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) डी. शिवानंदन और अन्य लोग भी मौजूद रहे।
सनद रहे कि नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ सीजेपी के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान देशभर से छात्र राष्ट्रीय राजधानी स्थित जंतर-मंतर पर एकत्रित हुए। इस दौरान, दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच कई झड़पें हुईं, लेकिन 20 जुलाई को 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग की कई वीडियोज सोशल मीडिया पर सामने आईं।
