लाइफस्टाइल

किसी गुरु से कम नहीं होता ऑफिस में अच्छा बॉस, सिखा जाता है जीवन के कई अनमोल सबक

कुछ बॉस ऐसे होते हैं जो चाहते हैं कि कर्मचारी हर समय काम के बारे में सोचे। लेकिन कुछ समझदार लीडर यह भी जानते हैं कि जिंदगी सिर्फ ऑफिस नहीं है।

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जीवन के कई गहरे सबक सिखा जाता है अच्छा बॉस (AI Image)

नौकरी शुरू करते समय हम आमतौर पर सोचते हैं कि हमें काम सीखना है। नई कंपनी होगी, नई जिम्मेदारियां होंगी, नए टारगेट होंगे और एक बॉस होगा, जो बताएगा कि काम कैसे करना है। लेकिन नौकरी के कुछ साल बाद समझ आता है कि हर बॉस सिर्फ काम नहीं सिखाता। कुछ यह भी सिखा जाते हैं कि मुश्किल समय में खुद को कैसे मजबूत बनाए रख सकते हैं।

कोई बॉस डेडलाइन की अहमियत समझाता है तो कोई यह कि हर काम के लिए हां कहना जरूरी नहीं। कोई हमारी गलती पर डांटता है तो कोई हमें गलती करने की आजादी देता है। और जब ऐसे बॉस नौकरी से चले जाते हैं, तब पता चलता है कि उन्होंने हमारी नौकरी के डिस्क्रिप्शन से कहीं ज्यादा हमें सिखाया था। आइए डालते हैं नजर उन सबकों पर जो एक अच्छा बॉस सिखा जाता है:

काम से पहले इंसान को समझना

एक अच्छा बॉस यह समझता है कि कर्मचारी सिर्फ एक एम्प्लॉयी नहीं है। उसकी अपनी जिंदगी है। अपनी परेशानियां हैं। अपनी महत्वाकांक्षाएं हैं। अपनी कमजोरियां हैं। ऐसा बॉस यह समझने की कोशिश करता है कि टीम का कोई सदस्य अच्छा क्यों नहीं कर पा रहा। यही फर्क मैनेजर और लीडर के बीच होता है। मैनेजर टारगेट देखता है। लीडर उस इंसान को भी देखता है जो टारगेट पूरा कर रहा है।

गलती करियर खत्म नहीं करती

करियर की शुरुआत में छोटी सी गलती भी बहुत बड़ी लगती है। एक गलत मेल। एक गलत नंबर। मीटिंग में दिया गया गलत जवाब। डेडलाइन मिस होना। ऐसे समय में अगर बॉस सिर्फ डांटता है तो डर पैदा होता है। वहीं अगर वह गलती समझाकर कहता है कि अगली बार ऐसा मत करना, तो वही गलती सीखने का मौका बन जाती है। कुछ अच्छे बॉस आपको यह समझा जाते हैं कि गलती छिपाने से समस्या बड़ी होती है और उसे स्वीकार करने से सीखने का रास्ता खुलता है।

हर बात पर हां कहना जरूरी नहीं

वर्कप्लेस में सबसे मुश्किल शब्दों में से एक है - नहीं। नया कर्मचारी हर काम के लिए हां कहता है। उसे लगता है कि ज्यादा काम करेगा तो बॉस प्रभावित होगा। लेकिन समय के साथ समझ आता है कि हर काम अपने जिम्मे ले लेना स्मार्ट वर्क नहीं है। कुछ बॉस हमें प्राथमिकता तय करना सिखाते हैं। क्या अभी करना है? क्या बाद में हो सकता है? क्या किसी और को दिया जा सकता है? और क्या वास्तव में करने की जरूरत ही नहीं है? यह सबक ऑफिस से निकलने के बाद भी काम आता है।

क्रेडिट अकेले लेने से कोई बडा नहीं बनता

कुछ बॉस टीम की सफलता का पूरा क्रेडिट खुद ले लेते हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो कहते हैं- यह काम टीम ने किया है। ऐसे बॉस अनजाने में नेतृत्व का सबसे जरूरी सबक सिखाते हैं। अच्छा लीडर वह नहीं जो सबसे ज्यादा दिखाई दे। अच्छा लीडर वह है जो अपनी टीम को आगे दिखाई देने का मौका दे।

जब कोई बॉस मीटिंग में आपके काम का नाम लेता है, आपकी उपलब्धि को पहचानता है या आपके आइडिया को आपका नाम देकर आगे बढाता है, तो वह सिर्फ तारीफ नहीं कर रहा होता। वह आपका आत्मविश्वास बना रहा होता है।

बॉस भी गलत हो सकता है

हम अक्सर बॉस को ऐसी जगह रखते हैं जहां उससे गलती की उम्मीद नहीं की जाती। लेकिन अच्छे बॉस जानते हैं कि उनके पास हर सवाल का जवाब नहीं है। वे जरूरत पड़ने पर कहते हैं- मुझे नहीं पता और फिर टीम के साथ मिलकर जवाब खोजते हैं। यह छोटी सी बात कर्मचारी को बहुत बडा सबक देती है। पद आपको सर्वज्ञ नहीं बनाता। गलत होने की संभावना स्वीकार करना कमजोरी नहीं, आत्मविश्वास की निशानी है।

नौकरी आपकी पूरी पहचान नहीं है

कुछ बॉस ऐसे होते हैं जो चाहते हैं कि कर्मचारी हर समय काम के बारे में सोचे। लेकिन कुछ समझदार लीडर यह भी जानते हैं कि जिंदगी सिर्फ ऑफिस नहीं है। वे छुट्टी लेने को प्रोत्साहित करते हैं। परिवार के लिए समय निकालने को कहते हैं। जरूरत पड़ने पर ब्रेक लेने देते हैं। ऐसे बॉस आपको एक जरूरी बात समझाते हैं, करियर जिंदगी का हिस्सा है, पूरी जिंदगी नहीं।

सख्ती और बुरा व्यवहार एक चीज नहीं

एक अच्छा बॉस हमेशा आसान नहीं होता। वह आपकी आलोचना कर सकता है। आपकी गलती पर सवाल उठा सकता है। बेहतर काम करने के लिए दबाव डाल सकता है। लेकिन फर्क यह है कि उसकी सख्ती आपके काम को बेहतर बनाने के लिए होती है, आपको छोटा दिखाने के लिए नहीं।

अच्छा बॉस कह सकता है कि यह काम सही नहीं हुआ। इसे दोबारा करो। वहीं बुरा बॉस कहता है- तुमसे कभी कुछ सही नहीं होगा। पहला व्यक्ति आपका काम सुधारता है। दूसरा आपके आत्मविश्वास को चोट पहुंचाता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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