FMGE 2026: विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी छात्र ने अपनी मेडिकल पढ़ाई दो या उससे ज्यादा अलग-अलग विदेशी मेडिकल संस्थानों से पूरी की है, तो सिर्फ इस आधार पर उसकी डिग्री को FMGE के लिए मान्य नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने ऐसे मामले में NMC यानी राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग और संबंधित अधिकारियों के फैसले को सही ठहराया है।
3 सितंबर 2026 को चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने उन छात्रों की याचिका खारिज कर दी, जिन्हें विदेशी मेडिकल संस्थानों से मिली अलग-अलग योग्यताओं के आधार पर FMGE में बैठने की अनुमति नहीं दी गई थी।
अलग-अलग विदेशी कॉलेजों से पढ़ाई करने पर FMGE की पात्रता नहीं
कोर्ट के सामने मामला ऐसे भारतीय छात्रों का था, जिन्होंने विदेश में मेडिकल की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन अलग-अलग परिस्थितियों में दूसरे विदेशी मेडिकल संस्थानों में जाकर अपनी पढ़ाई पूरी की। बाद में उन्होंने FMGE में शामिल होने के लिए आवेदन किया।
मामले में छात्रों ने अलग-अलग संस्थानों की मेडिकल योग्यताओं को अपनी प्राथमिक मेडिकल योग्यता यानी PMQ के तौर पर पेश किया था। अधिकारियों ने पाया कि कुछ मामलों में एक ही अवधि की पढ़ाई के लिए दो अलग-अलग संस्थानों की योग्यता दिखाई गई थी। इसके बाद NBEMS की Examination Ethics Committee ने उन्हें FMGE के लिए अयोग्य माना था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस फैसले में कहा कि दो या तीन अलग-अलग विदेशी मेडिकल कॉलेजों से की गई इस तरह की fragmented यानी बंटी हुई मेडिकल पढ़ाई को अपने आप मान्य PMQ नहीं माना जा सकता।
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कोर्ट ने मेडिकल शिक्षा की गुणवत्ता को बताया अहम
कोर्ट ने माना कि मेडिकल शिक्षा को अलग-अलग संस्थानों में बांटकर पूरी की गई पढ़ाई के आधार पर मेडिकल योग्यता को स्वीकार करना सार्वजनिक हित में नहीं होगा। इससे भारत में मेडिकल पेशेवरों की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि FMGE का उद्देश्य विदेश से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले उम्मीदवारों के ज्ञान और प्रशिक्षण के स्तर को जांचना है। ऐसे में मेडिकल शिक्षा और योग्यता से जुड़े मानकों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विदेशी मेडिकल डिग्री की जांच भी जरूरी
इस मामले में कोर्ट ने विदेशी मेडिकल डिग्री की प्रमाणिकता की जांच से जुड़े नियमों को भी बरकरार रखा। FMGE के लिए विदेशी मेडिकल डिग्री को संबंधित भारतीय दूतावास से सत्यापित या संबंधित देश की सक्षम अथॉरिटी से apostille किए जाने की आवश्यकता से जुड़ी शर्तों को भी चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने इसमें हस्तक्षेप नहीं किया।
कोर्ट के फैसले के मुताबिक, विदेशी मेडिकल योग्यता की प्रमाणिकता और पढ़ाई के तरीके को नजरअंदाज करके सिर्फ डिग्री के आधार पर FMGE में बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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