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पासपोर्ट रद्द, UK में बैन लागू; विजय माल्या ने कोर्ट को बताया कि उनके पास लौटने का कोई 'टाइमलाइन' नहीं

मार्च 2016 में भारत छोड़ने वाले माल्या पर कई हज़ार करोड़ रुपये के लोन चुकाने में डिफॉल्ट करने का आरोप है। PMLA के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली एक स्पेशल कोर्ट ने जनवरी 2019 में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था।

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विजय माल्या (फाइल फोटो:facecbook)

विजय माल्या जो मार्च 2016 में भारत छोड़कर चले गए थे, पर कई हज़ार करोड़ रुपये के कई लोन चुकाने में डिफॉल्ट करने का आरोप है। प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली एक स्पेशल कोर्ट ने जनवरी 2019 में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। घोषणा के बाद, उनके खिलाफ एक्सट्रैडिशन की कार्रवाई शुरू की गई थी।

भगोड़े बिज़नेसमैन विजय माल्या ने बुधवार को बॉम्बे हाई कोर्ट को बताया कि वह भारत लौटने के लिए कोई पक्का टाइमलाइन नहीं बता सकते क्योंकि उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया गया है और यूनाइटेड किंगडम की अदालतों के आदेशों के तहत उन्हें इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने पर रोक लगा दी गई है।

यह बयान कोर्ट के पहले के आदेश के जवाब में फाइल किया गया था

माल्या ने अपने वकील अमित देसाई के ज़रिए चीफ जस्टिस चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की बेंच के सामने यह बात कही। यह बयान कोर्ट के पहले के आदेश के जवाब में फाइल किया गया था, जिसमें उनसे यह साफ करने के लिए कहा गया था कि क्या वह भारत लौटकर ट्रायल का सामना करना चाहते हैं, जबकि वह उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश और भगोड़े आर्थिक अपराधी (FEO) एक्ट की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली अपनी याचिकाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।

कई हज़ार करोड़ रुपये के लोन चुकाने में डिफॉल्ट करने का आरोप

मार्च 2016 में भारत छोड़ने वाले माल्या पर कई हज़ार करोड़ रुपये के लोन चुकाने में डिफॉल्ट करने का आरोप है। प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली एक स्पेशल कोर्ट ने जनवरी 2019 में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था। घोषणा के बाद, उनके खिलाफ एक्सट्रैडिशन की कार्रवाई शुरू की गई थी।

'पिटीशनर यह ठीक से नहीं बता सकता कि वह भारत कब लौटेगा'

बयान में कहा गया, 'इंग्लैंड की अदालतों के आदेशों के अनुसार, पिटीशनर को इंग्लैंड और वेल्स छोड़ने या छोड़ने की कोशिश करने या किसी भी इंटरनेशनल ट्रैवल डॉक्यूमेंट के लिए अप्लाई करने या उसके पास होने की इजाज़त नहीं है। किसी भी हालत में, पिटीशनर यह ठीक से नहीं बता सकता कि वह भारत कब लौटेगा।' देसाई ने आगे कहा कि भगोड़े अपराधी के टैग और एक्ट के नियमों को चुनौती देने वाली उनकी याचिकाओं पर सुनवाई के लिए हाई कोर्ट के लिए माल्या का भारत में होना ज़रूरी नहीं है।

इस याचिका का विरोध करते हुए, केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि माल्या ने हाई कोर्ट के असाधारण रिट अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल किया है, जो न्यायसंगत है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति कानून का पालन नहीं करता है, वह कोर्ट से अपनी मर्ज़ी से राहत नहीं मांग सकता।

मामले की अगली सुनवाई अगले महीने

मेहता ने कहा, “देश के कानून में यह तय है कि जो व्यक्ति कानून का पालन नहीं करता है, उसे इस कोर्ट का खास अधिकार नहीं दिया जा सकता।” दलीलें सुनने के बाद, बेंच ने केंद्र को माल्या के बयान पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई अगले महीने के लिए टाल दी।

Ravi Vaish
रवि वैश्यauthor

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों की बारीकियों को समझने और तेजी से प्रस्तुत करने में उनकी विशेष दक्षता है। टीवी पत्रकारिता में रिपोर्टिंग और डेस्क—दोनों क्षेत्रों में अनुभव होने के कारण वे समाचारों को बहुआयामी दृष्टिकोण से देखते हैं। देश–दुनिया की ताजातरीन अपडेट्स, ब्रेकिंग न्यूज, एक्सप्लेनर और विशेष स्टोरीज तैयार करने में वे सिद्धहस्त हैं। उनकी प्राथमिकता हमेशा यही रही है कि हर खबर तेज, सटीक और जानकारीपूर्ण रूप में पाठकों तक पहुंचे। रवि वैश्य अब तक 22,000 से अधिक खबरें लिख चुके हैं, जिनमें कई एक्सक्लूसिव रिपोर्ट्स, इंटरव्यू, ग्राउंड रिपोर्ट्स, विश्लेषण और एक्सप्लेनर शामिल हैं।

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