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ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड के पूर्व निदेशक को किया गिरफ्तार

ईडी ने लोढ़ा को धनशोधन रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत के समक्ष पेश किया और वहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया।प्रक्रिया के तहत लोढ़ा को शुक्रवार को पहली हिरासत के लिए ईडी की अदालत में पेश किया जाएगा

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प्रवर्तन निदेशालय

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रियल एस्टेट कंपनी लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड के पूर्व निदेशक को 85 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बृहस्पतिवार को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया।ईडी ने राजेंद्र लोढ़ा के खिलाफ मुंबई पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत दर्ज धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले के आधार पर धनशोधन मामले की जांच शुरू की है। राजेंद्र लोढ़ा को पिछले साल सितंबर में मुंबई पुलिस की अपराध शाखा ने एक मामले में गिरफ्तार किया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में हैं।

ईडी ने लोढ़ा को धनशोधन रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई करने वाली एक विशेष अदालत के समक्ष पेश किया और वहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया।प्रक्रिया के तहत लोढ़ा को शुक्रवार को पहली हिरासत के लिए ईडी की अदालत में पेश किया जाएगा।ईडी ने आरोप लगाया है कि राजेंद्र लोढ़ा को 2015 में कंपनी के निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया था, जिन्होंने केवल भूमि अधिग्रहण तक सीमित अधिकार का अतिक्रमण कर कई अनधिकृत लेनदेन को अंजाम दिया।

अपराध से आय अर्जित करने, छिपाने और वैध बनाने की साजिश

संघीय एजेंसी ने आरोप लगाया है कि लोढ़ा ने अपने बेटे साहिल लोढ़ा और करीबी सहयोगियों के साथ मिलकर अपराध से आय अर्जित करने, छिपाने और उसे वैध बनाने की साजिश रची, जिससे कंपनी को नुकसान हुआ।ईडी ने रेखांकित किया कि उन्होंने फर्जी कब्जेदारों और मनगढ़ंत समझौता ज्ञापनों के माध्यम से कंपनी के धन का गबन किया, नकद में धन निकाला और कंपनी की जमीन तथा हस्तांतरणीय विकास अधिकार को कम मूल्य पर अवैध रूप से हस्तांतरित किया।

'नियंत्रित संस्थाओं के माध्यम से धन की हेराफेरी की'

इसने यह भी कहा कि उन्होंने बेनामी लेनदेन को बढ़ावा दिया, नियंत्रित संस्थाओं के माध्यम से धन की हेराफेरी की और कंपनी के संसाधनों का उपयोग व्यक्तिगत लाभ और अपने परिवार से जुड़ी संस्थाओं के लिए किया। एजेंसी ने आरोप लगाया कि राजेंद्र लोढ़ा ने फर्जी और मनगढ़ंत स्थायी वैकल्पिक आवास समझौतों के तहत, बिना किसी कानूनी अधिकार के, फ्लैट का धोखाधड़ीपूर्ण और कम मूल्य पर आवंटन करवाया, जिससे उनके सहयोगियों को अनुचित लाभ हुआ। जांच एजेंसी के अनुसार इन अनुचित कृत्यों की वजह से लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड को कुल 85 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।

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रवि वैश्य
रवि वैश्य author

रवि वैश्य टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर कार्यरत एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता में 20 वर्षों का व्यापक अनुभव हासिल है। खबरों... और देखें

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