हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश में बनाई जाएगी एनआईए अदालत; केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Dec 16, 2025, 10:57 PM IST
केंद्र सरकार ने आतंकवाद से जुड़े मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश में एनआईए की एक समर्पित अदालत स्थापित करने का फैसला लिया है।
सुप्रीम कोर्ट
आतंकवाद से जुड़े मामलों में त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार प्रतिबद्ध है। इस बाबत देश के हर राज्य और केंद्र-शासित प्रदेश में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) को समर्पित अदालत स्थापित करने का फैसला लिया गया है।केंद्र सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को इस बात की जानकारी दी। साथ ही केंद्र ने शीर्ष अदालत को यह भी बताया कि जिन राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों में आतंकवाद विरोधी कानून के तहत 10 से अधिक मामले लंबित हैं, वहां एक से अधिक विशेष एनआईए अदालतें स्थापित की जाएंगी। वहीं, दिल्ली सरकार ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ को बताया कि संगठित अपराध और आतंकवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए राष्ट्रीय राजधानी में 16 विशेष अदालतें गठित की जा रही हैं, जो तीन महीने में काम शुरू कर देंगी।
एनसीआर में मकोका जैसे कड़े कानून पर विचार का सुझाव
पीठ ने केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा कि विभिन्न एजेंसियों के बीच क्षेत्राधिकार के टकराव से बचने के लिए पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) जैसा सख्त कानून लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए।
क्षेत्राधिकार का फायदा उठाते हैं अपराधी: शीर्ष कोर्ट
एनसीआर के कुख्यात गैंगस्टर महेश खत्री का जिक्र करते हुए प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि संगठित अपराध में लिप्त अपराधी राज्यों के बीच क्षेत्राधिकार के मुद्दों का फायदा उठाकर कानून से बच निकलते हैं। पीठ गैंगस्टर महेश खत्री और नक्सल समर्थक कैलाश रामचंदानी की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। रामचंदानी के खिलाफ 2019 में गढ़चिरोली में हुए आईईडी विस्फोट के मामले दर्ज हैं,जिसमें 15 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
कई राज्यों में दर्ज एफआईआर पर एनआईए कानून लागू करने का सुझाव
इस दौरान न्यायमूर्ति बागची ने कई राज्यों में दर्ज एफआईआर पर एनआईए कानून लागू करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि जहां किसी आरोपी के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में कई प्राथमिकी दर्ज हों,वहां एनआईए अधिनियम लागू करने की संभावनाएं तलाशी जा सकती हैं,क्योंकि एनआईए को सभी जांच अपने हाथ में लेने की सर्वोच्च शक्ति प्राप्त है।
एनआईए अदालतों के लिए एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव
इस दौरान केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि केंद्रीय गृह सचिव और राज्यों के गृह सचिवों की बैठक में एनआईए मामलों के लिए अतिरिक्त बुनियादी ढांचा, नए न्यायिक पद और आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है। भाटी ने कहा कि केंद्र सरकार ने अतिरिक्त एनआईए अदालतों की स्थापना के लिए आवर्ती और गैर-आवर्ती व्यय के रूप में एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा है। पीठ ने स्पष्ट किया कि ये समर्पित अदालतें एनआईए और विशेष कानून से जुड़े मामलों की दैनिक सुनवाई करेंगी और अन्य मामलों पर केवल खाली रहने की स्थिति में ही विचार करेंगी। साथ ही प्रधान न्यायाधीश ने यह भी कहा कि मौजूदा अदालतों को केवल नाम बदलकर विशेष अदालत न बनाया जाए। इस पर केंद्र और दिल्ली सरकार ने भरोसा दिलाया कि अतिरिक्त ढांचा विकसित किया जा रहा है।
जनवरी 2026 में अगली सुनवाई
शीर्ष अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई जनवरी 2026 में तय की। गौरतलब है कि जुलाई में सर्वोच्च न्यायालय ने विशेष मामलों के लिए नई अदालतें गठित न करने पर केंद्र और महाराष्ट्र सरकार को फटकार लगाई थी और अलग से अदालतें बनाने का निर्देश दिया था।
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