देश

घर-गाड़ी में फहराना चाहते हैं तिरंगा तो जान लें भारतीय ध्वज संहिता के ये नियम, कहीं ऐसा न हो कि पहुंच जाएं जेल

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Aug 14, 2023, 09:33 AM IST

National flag code of India 2022: इस राष्ट्रीय दिवस को मनाने से पहले हमें 'भारतीय ध्वज संहिता 2022' के नियमों को जानना अतिआवश्यक है। आइए जानते हैं तिरंगे को लेकर क्या हैं निमय और हमें किन-किन बातों को रखना चाहिए ध्यान...

Image

भारतीय ध्वज संहिता

Photo : ANI

National flag code of India 2022: 15 अगस्त 2023 को देश अपनी जश्न-ए-आजादी की वर्षगांठ मनाने जा रहा है। लाल किले पर भव्य आयोजन की तैयारी अपने अंतिम चरण में है। वहीं देशवासी भी इस खास दिन को मनाने के लिए अपने-अपने स्तर पर जुटे हुए हैं। दुकानों-मॉलों, बाजार से लेकर सरकारी कार्यालयों तक को आजादी के रंग में सजाया गया है। देश के नागरिक अपने-अपने घर पर भी आजादी के उत्सव को मनाने का इंतजार कर रहे हैं।

हालांकि, घर हो या कार्यालय...स्वतंत्रता दिवस मनाने से लेकर तिरंगा फहराने तक के लिए कुछ खास नियम निर्धारित किए हैं। तिरंगे से जुड़ी एक भी भूल आपको मुसीबत में भी डाल सकती है। इसलिए, इस राष्ट्रीय दिवस को मनाने से पहले हमें 'भारतीय ध्वज संहिता 2022' के नियमों को जानना अतिआवश्यक है। आइए जानते हैं तिरंगे को लेकर क्या हैं निमय और हमें किन-किन बातों को रखना चाहिए ध्यान...

  1. भारतीय ध्वज सहिंता, 2002 में संशोधन किया गया है। पॉलिएस्टर या मशीन से बने राष्ट्रीय ध्वज की अनुमति दी गई है। हाथ से बुने हुए, काते हुए या मशीन से बने कपास, पॉलिएस्टर, ऊनी, रेशमी व खादी के तिरंगे बने होंगे।
  2. भारतीय ध्वज संहिता में किए गए एक और संशोधन के अनुसार तिरंगे को खुले में प्रदर्शित किया जा सकता है। इसे दिन-रात फहराया जा सकता है।
  3. राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा व सम्मान के अनुरूप सार्वजनिक, निजी संगठन और शैक्षणिक संस्थान का कोई भी सदस्य सभी दिनों व अवसरों पर राष्ट्रीय ध्वज को फहरा सकता है।
  4. राष्ट्रीय ध्वज को जब भी फहराया जाए तो उसे सम्मानजनक स्थान दिया जाना चाहिए और उसे स्पष्ट रूप से रखा जाना चाहिए।
  5. राष्ट्रीय ध्वज आयतकार होगा और इसका आकार कितना भी हो सकता है। हालांकि, इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होगा।
  6. क्षतिग्रस्त या अस्त-व्यस्त झंडे का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।
  7. भारतीय ध्वज संहिता के भाग 3 के अनुसार गणमान्य व्यक्तियों जैसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व राज्यपाल को छोड़कर किसी भी वाहन में तिरंगा नहीं फहराया जाना चाहिए।
  8. तिरंगे को अन्य झंडों के साथ नहीं फहराया जाना चाहिए और न ही इसे अन्य झंडों के साथ रखा जाना चाहिए।
  9. राष्ट्रीय ध्वज पर कुछ भी लिखा या छपा नहीं होना चाहिए।
  10. ध्वज केवल और केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रह सकता है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article