देश

Joshimath Landslide: जोशीमठ में क्षमता से अधिक हुआ निर्माण, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने सार्वजनिक की वैज्ञानिक रिपोर्ट

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 25, 2023, 11:11 AM IST

Joshimath Landslide: 130 पेज की 'पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट' (पीडीएनए) रिपोर्ट में कहा है कि जोशीमठ में अपनी वहन क्षमता से कहीं अधिक निर्माण किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि जोशीमठ को तत्काल प्रभाव से 'कोई नया निर्माण नहीं' वाला क्षेत्र घोषित कर देना चाहिए।

Image

जोशीमठ

Photo : BCCL

Joshimath Landslide: हाईकोर्ट की सख्ती के बाद उत्तराखंड सरकार ने जोशीमठ भूधंसाव पर वैज्ञानिक रिपोर्ट को सार्वजनिक कर दिया है। इस रिपोर्ट में जोशीमठ को लेकर चौंकाने और डराने वाले खुलासे किए गए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की 130 पेज की 'पोस्ट डिजास्टर नीड असेसमेंट' (पीडीएनए) रिपोर्ट में कहा है कि जोशीमठ में अपनी वहन क्षमता से कहीं अधिक निर्माण किया गया है।

इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जोशीमठ को तत्काल प्रभाव से 'कोई नया निर्माण नहीं' वाला क्षेत्र घोषित कर देना चाहिए। बता दें, जोशीमठ में आई आपदा के बाद लंबे समय से इन वैज्ञानिक रिपोर्टों को सार्वजनिक किए जाने की मांग की जा रही थी। यह जोशीमठ पर एक प्रमुख केंद्रीय वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थान की आठ रिपोर्टों में से एक है, जिसे राज्य सरकार ने पिछले कई महीनों से सार्वजनिक नहीं किया था।

718 पन्नों की रिपोर्ट

जोशीमठ भूधंसाव पर आठ वैज्ञानिक संस्थानों की रिपोर्ट सैकड़ों वैज्ञानिकों ने कई महीनों की मेहनत के बाद तैयार की थी। यही रिपोर्ट 718 पन्नों की है, जिसके आधार पर राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने भी अपनी 139 पन्नों की रिपोर्ट तैयार की थी, इसे भी अब सार्वजनिक कर दिया गया है।

रिपोर्ट में भविष्य की टाउन प्लानिंग का विस्तृत ब्योरा

बता दें, इस रिपोर्ट में जोशीमठ में भू-धंसाव के कई कारणों के साथ ही साथ भविष्य में होने वाली टाउन प्लानिंग का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। जमीन के भीतर पानी रिसने से चट्टानों का खिसकने के कारण को भी उजागर किया गया है।

एक और शहर पर मंडराया खतरा

जोशीमठ के बाद नैनीताल की जमीन भी धंसना शुरू हो गई है। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को यहां आल्मा पहाड़ी दरकने से 4 घर जमींदोज हो गए। इसके बाद यहां करीब 250 घरों को खाली कराया जा रहा है। नैनीताल प्रशासन की ओर से इन घरों को तीन दिनों में खाली करने का अल्टीमेटम दिया गया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article