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Video: लंदन में खालिस्तान समर्थकों ने उतारा तिरंगा, भारत नाराज; ब्रिटिश राजनयिक तलब

  • Written by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Mar 20, 2023, 07:02 AM IST

पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें अलगाववादी लंदन में भारतीय मिशन में लगे तिरंग को नीचे उतारते हुए दिख रहे हैं। भारत ने इस मामले में ब्रिटिश राजनयिक को तलब किया है।

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लंदन में भारतीय मिशन में अलगाववादियों ने उतारा तिरंगा ( एएनआई स्क्रीनग्रैब)

Photo : ANI

India Summons UK Diplomat: पंजाब में खालिस्तानी नेता अमृतपाल सिंह की धरपकड़ का मामला लंदन तक पहुंच गया है। यहां खालिस्तान समर्थकों द्वारा भारतीय मिशन में लगे तिरंगे को नीचे उतारने का एक वीडियो सामने आया है। अलगाववादियों ने भारतीय ध्वज को नीचे उतारकर उसकी जगह खालिस्तानी झंडा फहराया। इस घटना पर भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाया है और कड़ी नाराजगी भी जताई है।

वीडियो सामने आने के बाद भारत सरकार ने रविवार रात भारत में ब्रिटिश राजदूत को भी तलब किया और भारतीय मिशन में सुरक्षा कर्मियों की अनुपस्थिति पर स्पष्टीकरण भी मांगा है। विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में घटना की निंदा करते हुए कहा है कि पूरे मामले में यूके सरकार की उदासीनता अस्वीकार्य है।

विदेश मंत्रालय ने घटना पर क्या कहा?

विदेश मंत्रालय ने घटना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा है कि इस मामले में ब्रिटिश उप उच्चायुक्त क्रिस्टीना स्कॉट को तलब किया गया और उनसे घटना के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है। इस संबंध में उन्हें वियना कन्वेंशन के तहत यूके सरकार के बुनियादी दायित्वों की भी याद दिलाई गई। भारत सरकार ने कहा, ब्रिटेन में भारतीय राजनिकय परिसरों और कर्मियों की सुरक्षा के प्रति यूके सरकार की उदासीनता अस्वीकार्य है। यह उम्मीद की जाती है कि यूके सरकार आज की घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करेगी और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कदम उठाएगी।

ब्रिटिश उच्चायुक्त ने मांगी माफी

उधर, ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस ने ट्वीट कर घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि मैं लंदन में भारतीय हाई कमीशन में किए गए शर्मनाक कृत्य पर निंदा व्यक्त करता हूं, यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

भगोड़ा घोषित हुआ अमृतपाल

दरअसल, वारिस पंजाब दे के मुखिया अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी के लिए पंजाब पुलिस ने धरपकड़ तेज कर दी है। उसके कई सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया है और उनसे हथयिारों को भी बरामद किया गया है। अमृतपाल अभी फरार है और पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया है। उसकी गिरफ्ताारी के लिए तलाशी अभियान भी तेज किया गया है। साथ ही खुफिया एजेंसियों ने अमृतपाल और आईएसआई के बीच लिंक की पुष्टि की है।
प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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