S-400 Missile from Russia: सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि भारत को अगले महीने की शुरुआत यानी मई महीने में रूस से S-400 ट्रायम्फ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल सिस्टम की चौथी यूनिट मिलने की उम्मीद है। इससे भारतीय वायुसेना (IAF) की हवाई सुरक्षा व्यवस्था और भी मजबूत होने की संभावना है।
अक्टूबर 2018 में, भारत ने रूस के साथ मिसाइल सिस्टम की पांच यूनिट खरीदने के लिए 5 अरब डॉलर का सौदा किया था, जिनमें से तीन यूनिट पहले ही मिल चुकी हैं। S-400 मिसाइल सिस्टम ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान अहम भूमिका निभाई थी।
S-400 मिसाइल सिस्टम की पांच और यूनिट खरीदने को मंजूरी
पिछले महीने, नई दिल्ली ने रूस से S-400 मिसाइल सिस्टम की पांच और यूनिट खरीदने को मंजूरी दी थी, जिससे इनकी कुल संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी। जानकारी के मुताबिक, मिसाइल सिस्टम की चौथी यूनिट रूस से रवाना हो चुकी है और अगले कुछ दिनों में इसके भारत पहुंचने की उम्मीद है।
भारत ने पहले S-400 मिसाइलें खरीदने का सौदा किया था। उस समय अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि अगर भारत इस सौदे को आगे बढ़ाता है, तो उसे 'काउंटरिंग अमेरिकाज़ एडवर्सरीज़ थ्रू सैंक्शंस एक्ट' (CAATSA) के तहत अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है।
भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों से किसी तरह की रुकावट की आशंका नहीं
सूत्रों ने बताया कि भारत को अमेरिकी प्रतिबंधों से किसी तरह की रुकावट की आशंका नहीं है, क्योंकि यह नई खरीद पिछली खरीद का ही एक 'अगला चरण' (follow-on order) है। 7 से 10 मई के बीच पाकिस्तान के साथ हुए सैन्य संघर्ष के दौरान भारतीय वायु सेना (IAF) ने इन मिसाइल सिस्टम का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था।
लंबी दूरी तक मार करने वाला सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल रक्षा तंत्र
संघर्ष खत्म होने के कुछ हफ़्तों बाद ही, S-400 मिसाइलों की एक और खेप खरीदने का प्रस्ताव पेश किया गया था। रूस ने इन मिसाइल सिस्टम को चलाने के लिए भारतीय कर्मियों के एक समूह को पहले ही प्रशिक्षित कर दिया है। S-400 को रूस का सबसे आधुनिक और लंबी दूरी तक मार करने वाला सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल रक्षा तंत्र माना जाता है।
