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Iran War: ईरान युद्ध से कम हुआ US के गोला-बारूद, मिसाइलों का जखीरा, अमेरिकी कमांडर ने चीन को बताया बड़ा खतरा

Iran War: कमेटी ने पापारो से जानना चाहा कि अमेरिका के पास कितना गोला-बारूद है लेकिन कमांडर ने इसके बारे में सटीक जानकारी नहीं दी। हालांकि उन्होंने कहा कि 'गोला-बारूद एवं मिसाइलों की एक निश्चित सीमा है।'

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ईरान युद्ध की वजह से अमेरिकी हथियारों में कमी आई।

Photo : ANI

US Iran War : ईरान युद्ध में अमेरिकी सैन्य क्षमता खासतौर से उसके गोला-बारूद में कमी आई है और हिंद प्रशांत क्षेत्र में एवं ताइवान पर चीन का आक्रामक रुख अमेरिका सैन्य क्षमताओं के लिए एक बड़े चुनौती के रूप में उभरा है। यह बात यूएस इंडो-पेसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुएल जे पापारो ने 21 अप्रैल को सशस्त्र सेवा पर अमेरिकी कांग्रेस कमेटी के समक्ष कही। पापारो ने कमेटी को बताया कि ईरान युद्ध (Iran War) की वजह से अमेरिका की सैन्य क्षमता पर असर पड़ा है।

चीन के साथ युद्ध होने पर महसूस होगी कमी

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक हवाई द्वीप के पूर्वी इलाके, प्रशांत से लेकर हिंद महासागर तक अपने कमांड की मौजूदगी रखने वाले कमांडर पापारो ने मौखिक एवं लिखित रूप से ईरान युद्ध की चुनौतियों के बारे में कमेटी को बताया। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' की सबसे बड़ी चिंता अमेरिकी मिसाइल एवं गोला-बारूद को लेकर है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध के चलते हमारी मिसाइलों एवं गोला-बारूद में कमी आई है। कमांडर ने चेताते हुए कमेटी से कहा कि ऐसे में भविष्य में चीन के साथ यदि लड़ाई होती है तो उस समय इनकी भारी कमी महसूस होगी।

    'गोला-बारूद एवं मिसाइलों की एक निश्चित सीमा'

    इस सुनवाई के दौरान कमेटी ने पापारो से जानना चाहा कि अमेरिका के पास कितना गोला-बारूद है लेकिन कमांडर ने इसके बारे में सटीक जानकारी नहीं दी। हालांकि उन्होंने कहा कि 'गोला-बारूद एवं मिसाइलों की एक निश्चित सीमा है।' अमेरिकी सैन्य क्षमताओं में कमी आने की तरफ डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भी इशारा किया। सीनेटर ने कहा कि 'मुझे लगता है कि इस युद्ध का गहरा असर हुआ है।' ब्लूमेंथल ने कहा कि ईरान युद्ध में अमेरिका का कितना आर्थिक नुकसान हुआ है, इसे अमेरिकी जनता को बताए जाने और जिन हथियारों में कमी आई है, उसकी भरपाई तत्काल करने की जरूरत है।

      डेमोक्रेट सीनेटर ने जाहिर की चिंता

      यही नहीं, डेमोक्रेट सीनेटर ने अमेरिकी रक्षा उपकरणों को जापान एवं दक्षिण कोरिया से मध्य पूर्व लाने पर चिंता जाहिर की। ईरान युद्ध शूरू होने के बाद अमेरिका ने जापान स्थित अपनी 31वीं मरीन यूनिट एवं करियर स्ट्राइक ग्रुप यूएसएस अब्राहम लिंकन को मध्य पूर्व में तैनात किया। कमेटी के समक्ष कमांडर पापारो की यह गवाही उन मीडिया रिपोर्टों की अटकलों को पुष्ट करती है, जिनमें अमेरिकी गोला-बारूद एवं मिसाइलों की क्षमता में कमी आने की बात कही गई है। दरअसल, ईरान के सस्ते ड्रोन को मार गिराने और खाड़ी देशों में स्थित अपने सैन्य अड्डों की सुरक्षा में बड़ी संख्या में अपनी महंगी मिसाइलें दागनी पड़ी हैं। इससे गोला-बारूद एवं मिसाइलों के जखीरे में कमी आई है।

      Alok Rao
      आलोक कुमार रावauthor

      19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारों की समझ, प्रेजेंटेशन, डिटेलिंग और न्यूजरूम डायनेमिक्स में असाधारण दक्षता प्रदान की है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों में विशेष रुचि रखने के साथ-साथ जियो-पॉलिटिक्स एवं डिफेंस की स्टोरीज में इनकी खासी दिलचस्पी है। आलोक ने अलग-अलग माध्यमों में काम करते हुए समाचारों की समझ, प्रस्तुति और विश्लेषण में मजबूत दक्षता विकसित की है और अब तक 25,000 से अधिक आर्टिकल तैयार कर चुके हैं। तथ्यों की गहन जांच, मजबूत न्यूज सेंस और तेज निर्णय क्षमता उनकी पत्रकारिता की प्रमुख खासियतें हैं।

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