घर के गद्दे जैसी नहीं होती ट्रेन की सीट, आखिर क्या भरा होता है इसमें? जानिए रुई का क्यों नहीं होता इस्तेमाल

ट्रेन में सफर करते समय आपने सीट पर जरूर बैठा होगा। लंबा सफर हो तो यही सीट कभी आराम देती है तो कभी शरीर को थका भी देती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ट्रेन की सीट के अंदर आखिर क्या भरा होता है?

Authored by: Pankaj YadavUpdated Sep 28 2026, 09:25 IST
​क्या आपके मन में भी है यह सवाल?Image Credit : IStock01 / 07

​क्या आपके मन में भी है यह सवाल?

अगर आपके मन में भी जवाब आता है कि सीट के अंदर रुई भरी होगी, तो आप अकेले नहीं हैं। घर के गद्दे या तकिए में रुई का इस्तेमाल देखकर ऐसा लगना स्वाभाविक है लेकिन ट्रेन की सीट को आमतौर पर रुई से नहीं भरा जाता। इसके पीछे आराम के साथ-साथ मजबूती, सुरक्षा और लंबे समय तक टिकाऊपन भी बड़ी वजह है।

रुई की जगह क्या इस्तेमाल होता है?Image Credit : IStock02 / 07

रुई की जगह क्या इस्तेमाल होता है?

ट्रेन की सीटों और बर्थ में आमतौर पर फोम और कुशनिंग मैटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है। भारतीय रेलवे की अलग-अलग कोच और सीट डिजाइन के हिसाब से इसकी संरचना बदल सकती है। कई सीटों में फोम की परतों के साथ ऊपर से कवर लगाया जाता है।

ट्रेन की सीट में फोम लगाने के पीछे की वजह क्या है?Image Credit : IStock03 / 07

ट्रेन की सीट में फोम लगाने के पीछे की वजह क्या है?

फोम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह दबाव पड़ने के बाद दोबारा अपने आकार में आने की क्षमता रखता है। यानी कोई यात्री लंबे समय तक एक ही जगह बैठे, तब भी सीट कुछ हद तक अपना आकार बनाए रख सकती है।

रुई से सीट बनाना मुश्किल क्यों होगा?Image Credit : IStock04 / 07

रुई से सीट बनाना मुश्किल क्यों होगा?

अब सवाल आता है कि जब रुई इतनी आरामदायक होती है, तो ट्रेन की सीट में इसका इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता? दरअसल, ट्रेन की सीट पर रोजाना सैकड़ों यात्रियों का इस्तेमाल होता है। अगर इसमें रुई भरी जाए तो लगातार दबाव और इस्तेमाल के कारण वह धीरे-धीरे दब सकती है और एक जगह इकट्ठी हो सकती है। इससे सीट का आकार बिगड़ सकता है और बैठने में पहले जैसा आराम नहीं मिलेगा। इसके अलावा रुई नमी को भी सोख सकती है, जिससे लंबे समय में सफाई और रखरखाव की समस्या बढ़ सकती है।

फोम क्यों माना जाता है ज्यादा सुविधाजनक?Image Credit : IStock05 / 07

फोम क्यों माना जाता है ज्यादा सुविधाजनक?

फोम को सीट के आकार के हिसाब से काटना और फिट करना आसान होता है। इसकी मोटाई और घनत्व को जरूरत के मुताबिक चुना जा सकता है। यही वजह है कि बस, ट्रेन, कार और कई दूसरी सीटों में भी अलग-अलग तरह के फोम का इस्तेमाल देखने को मिलता है। ट्रेन में सिर्फ आराम ही जरूरी नहीं होता। सीट को मजबूत, टिकाऊ और साफ-सफाई के लिहाज से भी उपयोगी होना चाहिए। इसलिए सीट की पूरी संरचना में फ्रेम, सपोर्ट, कुशनिंग और कवर जैसे कई हिस्से शामिल होते हैं।

ऊपर का कपड़ा भी है खासImage Credit : IStock06 / 07

ऊपर का कपड़ा भी है खास

ट्रेन की सीट को सिर्फ अंदर से ही नहीं, बाहर से भी तैयार किया जाता है। सीट के ऊपर ऐसा कवर लगाया जाता है जो रोजाना के इस्तेमाल को झेल सके और जिसकी सफाई या रखरखाव आसानी से किया जा सके। यानी जो सीट हमें बाहर से सिर्फ एक गद्देदार जगह दिखाई देती है, उसके पीछे काफी सोच-समझकर बनाई गई पूरी संरचना होती है।

हर ट्रेन की सीट एक जैसी नहीं होतीImage Credit : IStock07 / 07

हर ट्रेन की सीट एक जैसी नहीं होती

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर ट्रेन में सीट का मैटेरियल और डिजाइन बिल्कुल एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है। अलग-अलग कोच, ट्रेन और सीट डिजाइन के हिसाब से कुशनिंग की तकनीक और इस्तेमाल होने वाले मैटेरियल में अंतर हो सकता है इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर ट्रेन की हर सीट के अंदर सिर्फ एक ही तरह का फोम लगा होता है।

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