देश

भारत के दुश्मनों को 'तबाह' कर देगा ये गेमचेंजर हथियार, जानें हेरॉन ड्रोन की 10 खूबियां

Heron Mark 2 Drones Speciality: स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में ऐसा हथियार शामिल हुआ है, जिसने भारत के दुश्मनों की टेंशन बढ़ा दी है। हेरॉन मार्क 2 ड्रोन को आखिर क्यों गेमचेंजर हथियार कहा जाता है। आपको इस ड्रोन की खासियतों से रूबरू करवाते हैं।

Image

भारतीय वायुसेना के बेड़े में हेरॉन ड्रोन हुआ शामिल।

Photo : Twitter

Heron Drone News: भारतीय वायुसेना ने अपने बेड़े में एक ऐसा घातक हथियार शामिल किया है, जिससे दुश्मनों की नींद उड़ गई है। चीन और पाकिस्तान के हर नापाक मंसूबों को ये गेमचेंजर हथियार बर्बाद कर देगा। रविवार को इंडियन एयरफोर्स के बेड़े में हेरॉन मार्क 2 ड्रोन को शामिल किया गया। इस ड्रोन को इजरायली ब्रह्मास्त्र भी कहा जाता है। खास बात ये है कि हेरॉन ड्रोन एक ही बार में पाकिस्तान और चीन की सरहदों का चक्कर लगा सकता है और जरूरत पड़ी तो मिसाइलें भी दाग सकता है। आपको सबसे पहले इस ड्रोन की 10 खूबियों को जानना चाहिए।

1). कैसे मिशन को अंजाम देता है ये ड्रोन?

हेरॉन मार्क 2 ड्रोन में एयरबॉर्न सर्विलांस विजिबल लाइट, थर्मोग्राफिक कैमरा, रडार सिस्टम जैसे यंत्र लगे होते हैं। मिशन पूरा करने के लिए ये ड्रोन अपने बेस से उड़ता है और मिशन को अंजाम देने के बाद खुद ही बेस पर वापस लौट आता है।

2). एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों से होगा लैस

इजरायली हेरॉन ड्रोन को अपग्रेड किया जा रहा है। इसे लेज़र गाइडेड बम, हवा से जमीन, हवा से हवा और हवा से एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों से लैस करने की तैयारी है।

3). इसके उड़ान की क्षमता बेहद दमदार

अगर एक बार हेरॉन ड्रोन हवा में उड़ा तो 36 घंटे तक उड़ान भरने में सक्षम है। ये ड्रोन जमीन से साढ़े दस किलोमीटर (35 हजार फीट) की ऊंचाई पर बेहद शांति से उड़ता रहता है।

4). मैन्युअल और ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम

हेरॉन ड्रोन को कंट्रोल करने के लिए जमीन पर ही एक ग्राउंड स्टेशन बनाया जाता है। इस स्टेशन में ऑटोमैटिक और मैन्युअल कंट्रोल सिस्टम होता है।

5). हर मौसम में दुश्मन के ठिकानों को करेगा तबाह

इजरायली हेरॉन ड्रोन की एक और खास बात ये है कि ये हर मौसम में उड़ान भरने में सक्षम है। इस ड्रोन की इसकी संचार प्रणाली लगातार ग्राउंड स्टेशन से सीधे संपर्क में रहती है। साथ ही इसके कम्युनिकेशन सिस्टम को सैटेलाइट के जरिए भी लिंक किया जा सकता है।

6). हेरॉन ड्रोन का कुल वजन 250 किलोग्राम

इसके नेविगेशन को कंट्रोल करने के लिए भी विकल्प हैं। इसमें प्री-प्रोगाम्ड फुली ऑटोमैटिक नेविगेशन को रन किया जा सकता है। दूसरी विकल्प है कि आप मैन्युअली रिमोट के जरिए इसे नेविगेट कर सकते हैं। इस ड्रोन का कुल वजन 250 किलोग्राम है।

7). एंटी-जैमिंग तकनीक से लैस है हेरॉन ड्रोन

हेरॉन ड्रोन सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसे जैम करने का कोई भी तरीका कारगर साबित नहीं होगा। ये ड्रोन्स एंटी-जैमिंग तकनीक से लैस है। जो पहले के ड्रोन्स की तुलना में काफी अधिक धाकड़ है।

8). आसमान से ही टारगेट को लॉक करने में सक्षम

ये इजरायली ड्रोन टारगेट को आसमान से ही लॉक कर लेता है और सटीक पोजिशन आर्टिलरी यानी टैंक या इंफ्रारेड सीकर मिसाइल को दे सकता है। आम शब्दों में समझें तो ये ड्रोन अपने टारगेट पर सटीक हमला कर सकता है।

9). थर्मोग्राफिक कैमरे की मदद से होता है ये काम

हेरॉन ड्रोन में थर्मोग्राफिक कैमरा लगा है, इसके जरिए अंधेरे में या फिर रात में देखने में मदद मिलती है। सेंसर्स और कैमरा के जरिए दुश्मन के ठिकानों का सही पता लगता है।

10). कई तरह के रडार और इंटेलिजेंस सिस्टम से लैस

ये ड्रोन एयरबॉर्न सर्विलांस विजिबल लाइट से लैस है। ये ग्राउंड सर्विलांस दिन की रोशनी में तस्वीरें खींच सकती हैं। इसमें तई तरह के रडार सिस्टम लगे हैं।

इस ड्रोन को लेकर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ने ANI से कहा- 'हेरॉन मार्क 2 एक बहुत ही सक्षम ड्रोन है। यह लंबे समय तक चलने में सक्षम है और इसमें 'दृष्टि की रेखा से परे' क्षमता है। इससे पूरे देश की एक ही जगह से निगरानी की जा सकती है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

और पढ़ें
End of Article