प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा आज मंगलवार यानी 25 अगस्त को संसदीय स्थायी समिति की बैठक में जोरदार तरीके से उठा। विपक्षी सांसदों ने पैलेट गन और इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल समेत प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस बल प्रयोग पर तत्काल चर्चा की मांग की। बैठक के दौरान इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई।
बैठक संसदीय स्थायी समिति की ओर से बच्चों के खिलाफ अपराधों के मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी। इसी दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद अजय माकन ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने पैलेट गन और इलेक्ट्रिक बैटन के इस्तेमाल के अलावा बिना नेम प्लेट और वर्दी के पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाए जाने के आरोपों पर भी चर्चा की मांग की।
माकन की मांग पर अध्यक्ष ने क्या कहा?
अजय माकन ने इससे पहले समिति के अध्यक्ष राधा मोहन दास अग्रवाल को पत्र लिखकर इस मुद्दे को बैठक में शामिल करने की मांग की थी। हालांकि, बैठक में अध्यक्ष ने कहा कि मामला न्यायालय के समक्ष विचाराधीन होने के कारण इस पर चर्चा नहीं की जा सकती।अध्यक्ष ने कहा कि संसद में न्यायालय के विचाराधीन मामलों पर चर्चा नहीं करने का नियम है और यही नियम संसदीय समितियों पर भी लागू होता है। उन्होंने यह भी बताया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित करने का आदेश दे चुका है।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: 'अपना फर्ज निभा रहे राहुल गांधी...', पैलेट गन मामले में कांग्रेस नेता के समर्थन खुलकर बोले उमर अब्दुल्ला
विपक्षी सांसदों ने किया माकन का समर्थन
माकन की मांग को कई विपक्षी सांसदों का समर्थन मिला। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के हैरिस बीरन और शिवसेना (UBT) के संजय राउत ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की मांग का समर्थन किया।माकन ने कहा कि संसदीय समितियां अपनी प्रक्रिया के तहत अधिकारियों से सीधे जानकारी हासिल करती हैं और उनका काम अदालत की कार्यवाही से अलग है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि बच्चों से जुड़े ऐसे गंभीर मामलों पर भी समिति चर्चा नहीं करेगी तो इन मुद्दों को फिर कौन उठाएगा।
1984 के दंगों का जिक्र, फिर आमने-सामने आए पक्ष
बैठक के दौरान बीजेपी के एक सांसद ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए उस समय पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाया। इसके जवाब में कांग्रेस सांसद ने बीजेपी शासित राज्य में कथित फर्जी एनकाउंटर का मुद्दा उठाने की बात कही।इस दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई। सूत्रों के मुताबिक, चर्चा के दौरान यह राय सामने आई कि राज्यों से जुड़े विषयों को समिति के समक्ष नहीं उठाया जाना चाहिए।
अगली बैठक में SOP पर चर्चा का प्रस्ताव
हंगामा बढ़ने के बीच समिति के अध्यक्ष राधा मोहन दास अग्रवाल ने बीच का रास्ता सुझाया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस द्वारा बल प्रयोग से जुड़े स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) और दिशा-निर्देशों पर अगली बैठक में चर्चा की जा सकती है।विपक्षी सांसद इस प्रस्ताव पर सहमत हो गए। ऐसे में माना जा रहा है कि समिति की अगली बैठक में प्रदर्शनकारियों से निपटने के दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग के नियमों और प्रक्रियाओं पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।
27 जुलाई और 5 अगस्त को भी उठाने की हुई थी कोशिश
इससे पहले विपक्षी सांसदों ने 27 जुलाई को समिति की बैठक में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाने की तैयारी की थी, लेकिन बैठक रद्द हो गई थी। इसके बाद अजय माकन ने 5 अगस्त की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पत्र भेजा था। हालांकि, उस बैठक के एजेंडे में यह विषय शामिल नहीं था, जिसके चलते चर्चा नहीं हो सकी। सूत्रों के मुताबिक, माकन 5 अगस्त की बैठक में मौजूद भी नहीं थे।
