India Middle East Europe Economic Corridor: चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की काट के रूप में एक MoU साइन हुआ है। भारत समेत आठ देशों ने जी20 शिखर सम्मलेन के पहले दिन इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर पर MoU साइन किया। आपको बताते हैं कि आखिर इसे क्यों चीन का खेल बिगाड़ने वाला प्रोजक्ट कहा जा रहा है।
MoU साइन करने वाले 8 देशों को जानिए
इस प्रोजेक्ट को गेमचेंजर के रूप में देखा जा रहा है। खुद पीएम मोदी ने इसके बारे में बताया कि पूरी दुनिया में यह कनेक्टिविटी और विकास को एक नई गति देगा। भारत समेत जिन 8 देशों ने ये एमओयू साइन किया उनमें अमेरिका, यूरोपियन यूनियन, सऊदी अरब, जापान, इटली, फ्रांस और यूएई शामिल है। इस एमओयू के तहत दो कॉरिडोर होंगे।
पहला- ईस्ट कॉरिडोर भारत को मिडिल ईस्ट से जोड़ेगा।
दूसरा- नॉर्दन कॉरिडोर मिडिल ईस्ट को यूरोप से जोड़ेगा।
कैसे बढ़ सकती है चीन की चिंता? समझिए
चीन के महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) की 'काट' के रूप में ये इंडिया-मिडिल-ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर नया गेमचेंजर साबित होगा। इससे व्यापार का रास्ता तेज होगा। रेलवे और शिपिंग कनेक्टिविटी कॉरिडोर की घोषणा के चलते शिपिंग टाइम और लागत कम हो जाएगी। साल 2013 में चीन के BRI की शउरुआत हुई थी, जब दुनिया के देशों में चीन ने कनेक्टिविटी बढ़ाने का ऐलान किया था। ये प्रोजक्ट चीन को यूरोप, रूस, दक्षिण एशिया, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया से जोड़ता है।
जानिए इस कॉरिडोर के क्या होंगे फायदे
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन इसे ऐतिहासिक समझौता करार दिया। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस कॉरिडोर को लेकर खुशी जाहिर की है। बता दें इस कॉरिडोर के कई बड़े फायदे हैं। इससे कनेक्टिविटी बढ़ेगी, आर्थिक विकास होगा, रोजगार पैदा होंगे, व्यापार पहुंच बढ़ेगा, व्यापार सुविधाओं में सुधार होगा। ऐसे कई बड़े लाभ इस कॉरिडोर के जरिए होंगे।
