CJP Protest Violence- जुलाई में CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई से जुड़े आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित 5 सदस्यीय हाई पावर एनक्वायरी कमेटी (HPEC) अब अपनी जांच शुरू करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को सबसे पहले कुछ खास मुद्दों पर जांच करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की कॉपी आने के बाद ये बातें साफ़ हुई हैं। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने 10 सितंबर को जारी विस्तृत आदेश में 18 अगस्त के अपने आदेश को आगे बढ़ाते हुए HPEC के कामकाज को लेकर कई अहम निर्देश दिए हैं।
सबसे पहले इन मुद्दों की होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने HPEC से कहा है कि वह शुरुआती तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लक्षित हिंसा और उत्पीड़न तथा दोनों पक्षों की ओर से हुई अत्यधिक हिंसा और संपत्ति के नुकसान से जुड़े आरोपों की जांच करे। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि प्रदर्शन से जुड़े व्यापक संवैधानिक सवालों पर फैसला HPEC नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट खुद उचित समय पर करेगा।
HPEC के खिलाफ आपत्तियां खारिज
कुछ याचिकाकर्ताओं ने HPEC के पुनर्गठन की मांग की थी, सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि कमेटी के खिलाफ आपत्तियां समय से पहले और जल्दबाजी में की गई हैं. कोर्ट ने कहा कि HPEC ने अभी जांच शुरू भी नहीं की है और उसके खिलाफ पहले से ही अनुमान और पूर्वधारणाओं के आधार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि HPEC का गठन निष्पक्षता, पारदर्शिता और बिना किसी पक्ष का समर्थन किए कोर्ट की सहायता करने के लिए किया गया है।
कमजोर और संवेदनशील गवाहों की पहचान गुप्त रहेगी
कोर्ट ने HPEC के सामने आने वाले संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी अहम निर्देश दिए हैं। ऐसे गवाहों की पहचान गोपनीय और सार्वजनिक रूप से छिपाकर रखी जाएगी। उनके द्वारा दिए गए बयान और जमा किए गए सबूतों की भी पूरी गोपनीयता बनाए रखनी होगी। कोर्ट ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर HPEC एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बना सकती है, जहां गवाह और अन्य संबंधित लोग अपने दस्तावेज और सबूत जमा कर सकेंगे।
नोडल काउंसिल की भूमिका भी तय
सुप्रीम कोर्ट ने नोडल काउंसिल की भूमिका स्पष्ट करते हुए कहा है कि उनका काम सिर्फ सुप्रीम कोर्ट की सहायता करना होगा. वे HPEC, सुप्रीम कोर्ट और मामले के पक्षकारों के बीच संपर्क या संचार के माध्यम के तौर पर काम नहीं करेंगे। कोर्ट की रजिस्ट्री को नोडल काउंसिल को केस की पेपरबुक और अन्य जरूरी दस्तावेज जल्द उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया गया है।
डॉ. मोनिका गुसैन को एमिकस क्यूरी बनाया
सुप्रीम कोर्ट ने सीनियर एडवोकेट डॉ. मोनिका गुसैन और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सी सोलोमन को कोर्ट मित्र नियुक्त किया है। वे HPEC के प्रतिनिधि के तौर पर सुप्रीम कोर्ट की सहायता करेंगे और पक्षकारों के बीच स्वतंत्र मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे।
HPEC में मेंबर सेक्रेटरी की नियुक्ति होगी
कोर्ट ने HPEC से जल्द से जल्द मेंबर सेक्रेटरी नियुक्त करने को कहा है, ताकि कमेटी को लॉजिस्टिक और सेक्रेटेरियल काम में मदद मिल सके। सुप्रीम कोर्ट ने HPEC से अपनी पहली रिपोर्ट जल्द से जल्द दाखिल करने को भी कहा है।
14 साल की बच्ची को सुरक्षा देने का आदेश
सुनवाई के दौरान 14 साल की एक महिला प्रदर्शनकारी की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया गया. कोर्ट को बताया गया कि बच्ची और उसके परिवार को कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां दी गई हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर लगातार खतरा बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को बच्ची और उसके परिवार का सम्भावित खतरे का एसेसमेंट करने और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही बच्ची और उसके परिवार को धमकाने या परेशान करने वाले कथित लोगों के खिलाफ जल्द जांच करने को कहा गया है. दिल्ली पुलिस को इस संबंध में अगली सुनवाई से पहले स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल करनी होगी।
HPEC की जांच और SC का फैसला अलग-अलग
इस आदेश का एक अहम पहलू यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने HPEC की भूमिका को तथ्यात्मक जांच तक सीमित रखते हुए संवैधानिक सवालों पर अपना अधिकार बरकरार रखा है। यानी HPEC आरोपों से जुड़े तथ्य जुटाएगी और अपनी रिपोर्ट देगी, जबकि प्रदर्शन से जुड़े व्यापक संवैधानिक मुद्दों पर अंतिम विचार सुप्रीम कोर्ट खुद करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 9 अक्टूबर 2026 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. तब तक HPEC को अपनी जांच आगे बढ़ाने और पहली रिपोर्ट जल्द दाखिल करने की दिशा में काम करना होगा।
