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क्या अक्टूबर में बढ़ेगा FD पर ब्याज? क्यों CPI का 4.82% पर पहुंचना दे रहा रेपो रेट बढ़ने का संकेत

अगस्त में CPI बढ़कर 4.82% पर पहुंच गया है। यह ऐसा आंकड़ा है, जो रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। इसका सीधा असर FD की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है।

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ब्याज दर में बढ़ोतरी के साथ बढ़ सकती है ब्याज दर

RBI Rapo Rate Based on CPI : महंगाई लगातार बढ़ रही है। रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी में CPI आधारित महंगाई अहम रोल अदा करती है। अगस्त 2026 में CPI 4.82% तक पहुंच गया है। रिजर्व बैंक टारगेट इन्फ्लेशन रेट 4 फीसदी है। वहीं, 2 फीसदी ऊपर नीचे यानी 2 से 6 फीसदी का टोलरेंस बैंड है। यानी रिजर्व बैंक अपनी मॉनेटरी पॉलिसी के हिसाब से इस दायरे के भीतर महंगाई को बनाए रखना चाहता है। फिलहाल, महंगाई रिजर्व बैंक के टारगेट रेट से ऊपर निकल चुकी है। ऐसे में अक्टूबर में होने वाली पॉलिसी मीटिंग में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है।

इस साल कितनी बढ़ी महंगाई?

रिजर्व बैंक ने आखिरी बार पॉलिसी रेट में बदलाव पिछले साल दिसंबर में किया था। वहीं, इस साल की शुरुआत में जनवरी 2026 में CPI 2.74% था। इसके अलावा महंगाई बढ़ाने वाला सबसे बड़ा फैक्टर क्रूड रहा है, जिसके दाम में जबरदस्त उछाल आया है। इन सभी वजहों से अब अक्टूबर में RBI MPC की बैठक में रेपो रेट बढ़ने की उम्मीद की जा रही है, ताकि महंगाई को काबू किया जा सके।

रेपो रेट में कितनी बढ़ोतरी संभव?

HSBC Global Investment Research ने अनुमान जताया है कि RBI अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में 25-25 आधार अंक की दो बढ़ोतरी कर सकता है। इससे रेपो रेट (Repo Rate) 5.25% से बढ़कर 5.75% हो सकती है। बहरहाल, अगर अक्टूबर में रेपो रेट बढ़ती है, तो FD Rates भी बढ़ सकते हैं। हालांकि, ऐसा तुरंत होना जरूरी नहीं है। लेकिन, बाजार की मौजूदा लिक्विडिटी भी यह संकेत दे रही है कि बैंक डिपोजिट रेट बढ़ाएं।

अभी क्या है महंगाई की स्थिति

अगस्त में चूंकि CPI 4.82% रही। यह RBI के 4% मीडियम टर्म टारगेट से ऊपर है, लेकिन 2%-6% के टोलरेंस बैंड के अंदर है। हालांकि, अगस्त में खाद्य महंगाई (Food Inflation) 5.95% तक पहुंच गया है। वहीं, Core Inflation करीब 4.2% है। इसका मतलब है कि अब दबाव सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक सीमित नहीं रह गया है। क्योंकि, दिसंबर 2025 में CPI Inflation 1.33% था, जो जनवरी में 2.74%, फरवरी में 3.21%, मई में 3.93%, जून में 4.38%, जुलाई में 4.44% और अगस्त में 4.82% पहुंच गया है। अगर आने वाले महीनों में महंगाई और ऊपर जाती है और RBI को लगता है कि प्राइस प्रेशर लॉन्ग टर्म के लिए ब्रॉड बेस्ड है, तो पॉलिसी रेट बढ़ाने पर फिर से विचार हो सकता है।

रेपो रेट का FD पर क्या होगा असर?

FD Rates का RBI क Repo Rate से सीधा सबंध जरूर है, लेकिन दोनों एक ही चीज नहीं हैं। Bank FD रेट तय करते समय सिर्फ रेपो रेट नहीं देखता। Bank को यह भी देखना होता है कि उसके पास पर्याप्त जमा हैं या नहीं है। इसके अलावा उसकी लोन डिमांड कितनी है। सिस्टम में लिक्विडिटी कितनी है। ET की रिपोर्ट में Bankbazaar के हवाले से बताया गया है कि अगर महंगाई दर ऊंची रहती है और लोन डिमांड मजबूत होती है, तो बैंक को डिपोजिट आकर्षित करने के लिए रेट बढ़ाने का दबाव हो सकता है।

10-Year बॉन्ड यील्ड से भी अहम संकेत

Banks के सामने सिर्फ दूसरे बैंक से जमा जुटाने की चुनौती नहीं होती। उन्हें बॉन्ड में भी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। पिछले तीन महीनों में 10-year G-Sec का औसल यील्ड करीब 6.89% रहा है, जबकि इस अवधि में यह 7.142% तक गया। इसके मुकाबले कई बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक की 5 साल की FD रेट अभी नीचे 7% के करीब हैं। ऐसे माहौल में जमा पर ज्यादा रिटर्न देने का दबाव बैंक पर बढ़ सकता है।

अक्टूबर में क्या हो सकता है?

5-7 अक्टूबर 2026 की RBI MPC बैठक इस पूरी कहानी का अगला बड़ा ट्रिगर है। तमाम ब्रोकरेज के मुताबिक अगर CPI और बढ़ता है, तो RBI Rate Hike कर सकता है। ऐसे में पॉलिसी के मुताबिक तमाम बैंक औंक डिपािटिज बनाने के लिए बैंक डिपोटिज बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में रेपो रेट बढ़ने के साथ FD रेट बढ़ने की संभावना बनती दिख रही है।

Yateendra Lawaniya
यतींद्र लवानियाauthor

प्रिंट और डिजिटल मीडिया में बिजनेस एवं इकोनॉमी कैटेगरी में 10 वर्षों से अधिक का अनुभव। पिछले 7 वर्षों से शेयर बाजार, कॉरपोरेट सेक्टर और आर्थिक नीतियों से जुड़ी खबरों पर विशेष पकड़। लेखन में केवल हेडलाइन तक सीमित न रहकर आंकड़ों, नीतिगत फैसलों और कॉरपोरेट दावों के पीछे की वास्तविक तस्वीर को बैलेंस्ड और आसान शब्दों में पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास। वर्तमान में Times Now Hindi के लिए बाजार की हर हलचल और आर्थिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।

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