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CJI गवई 23 नवंबर को हो रहे रिटायर, जानें उनके कार्यकाल में कितने OBC और SC न्यायाधीशों की हुई नियुक्ति?

CJI Gavai Tenure: प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति बीआर गवई के लगभग छह महीने के कार्यकाल के दौरान देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के 10 न्यायाधीशों, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और पिछड़ा वर्ग (BC) के 11 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई। न्यायमूर्ति गवई रविवार (23 नवंबर) को पदमुक्त हो जाएंगे।

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सीजेआई बीआर गवई (फाइल फोटो)

CJI Gavai Tenure: प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति बीआर गवई के लगभग छह महीने के कार्यकाल के दौरान देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के 10 न्यायाधीशों, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और पिछड़ा वर्ग (BC) के 11 न्यायाधीशों की नियुक्ति की गई। न्यायमूर्ति गवई देश के पहले बौद्ध और दूसरे दलित प्रधान न्यायाधीश हैं। उन्होंने उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम का नेतृत्व किया, जिसने विभिन्न उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों के रूप में नियुक्ति के लिए सरकार को 129 नामों की सिफारिश की, जिनमें से 93 नामों को मंजूरी दी गई।

इन न्यायाधीशों की भी हुई नियुक्ति

न्यायमूर्ति गवई के कार्यकाल के दौरान पांच न्यायाधीशों-न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया, न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई, न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल मनुभाई पंचोली की भी शीर्ष अदालत में नियुक्ति हुई। उच्चतम न्यायालय की वेबसाइट पर 14 मई से लेकर अब तक अपलोड किए गए न्यायाधीशों की नियुक्ति संबंधी विवरण के मुताबिक, जब न्यायमूर्ति गवई भारत के प्रधान न्यायाधीश बने, उसके बाद सरकार की ओर से उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए मंजूर किए गए 93 नामों में अल्पसंख्यक समुदायों के 13 न्यायाधीशों और 15 महिला न्यायाधीशों के नाम शामिल थे।

सीजेआई गवई कब हो रहे रिटायर

विवरण के अनुसार, न्यायमूर्ति गवई के कार्यकाल में जिन न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी गई, उनमें से पांच पूर्व या सेवारत न्यायाधीशों से संबंधित हैं, जबकि 49 न्यायाधीश बार से नियुक्त किए गए और बाकी सेवा संवर्ग से हैं। न्यायमूर्ति गवई रविवार (23 नवंबर) को पदमुक्त हो जाएंगे। उनके उत्तराधिकारी न्यायमूर्ति सूर्यकांत 24 नवंबर को भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे।

भारत के 52वें प्रधान न्यायाधीश गवई ने अपने छह महीने के कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण फैसले दिए हैं, जिनमें वक्फ कानून के प्रमुख प्रावधानों पर रोक लगाना, न्यायाधिकरण सुधार कानून को रद्द करना और केंद्र को परियोजनाओं को बाद में हरित मंजूरी देने की अनुमति देना शामिल है।

शुक्रवार का दिन प्रधान न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति गवई का अंतिम कार्य दिवस था। वह न्यायमूर्ति केजी बालाकृष्णन के बाद भारतीय न्यायपालिका का नेतृत्व करने वाले दूसरे दलित न्यायाधीश थे। अपने अंतिम कार्य दिवस पर मिले सम्मान से अभिभूत न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि वह एक वकील और न्यायाधीश के रूप में चार दशकों की यात्रा पूरी करने के बाद “पूर्ण संतुष्टि की भावना के साथ” तथा “न्याय के छात्र” के रूप में संस्थान छोड़ रहे हैं।

Anurag Gupta
अनुराग गुप्ताauthor

अनुराग गुप्ता टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और मीडिया में 9 वर्षों का अनुभव रखते हैं। जर्नलिज़्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से ही वे न्यूजरूम के विभिन्न आयामों—कॉपी एडिटिंग, कंटेंट क्यूरेशन और रियल-टाइम न्यूज मॉनिटरिंग में दक्षता के साथ काम कर रहे हैं। राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और ब्रेकिंग न्यूज पर उनकी मजबूत पकड़ है। अनुराग खबरों की बारीकियों को समझने, फैक्ट चेकिंग और स्टोरी के अहम पहलुओं को पाठकों तक सरल भाषा में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक खबरें प्रकाशित की हैं, जिनमें ब्रेकिंग अपडेट्स, एनालिटिकल कंटेंट, स्पेशल स्टोरीज और न्यूज एक्सप्लेनर्स शामिल हैं।

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