भारत पर एक बार फिर मौसम की बड़ी चुनौती मंडरा सकती है। ब्रिटेन के मौसम विभाग (UK Met Office) की एक नई रिपोर्ट ने प्रशांत महासागर में तेजी से विकसित हो रहे El Nino को लेकर गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार बनने वाला एल नीनो (El Nino) असाधारण रूप से काफी मजबूत हो सकता है। जिसका प्रभाव आधुनिक इतिहास का सबसे शक्तिशाली और अप्रत्याशित संकट साबित हो सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार के एल नीनो का असर दुनियाभर के तापमान और मौसम पर पड़ सकता है। भारत में इसका सीधा और गंभीर प्रभाव कमजोर पड़ रहे मानसून और तापमान पर देखने को मिल सकता है।
आखिर क्या कहती है यह रिपोर्ट?
UK मौसम विभाग ने 21 अगस्त को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा कि एल नीनो के कारण 2027 अब तक का सबसे गर्म साल बन सकता है। इस दौरान वैश्विक तापमान औद्योगिक क्रांति से पहले के औसत से अस्थायी तौर पर 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ऊपर जा सकता है। विभाग का कहना है कि यह निष्कर्ष उसने पुराने आंकड़ों और कंप्यूटर मॉडल्स के गहन विश्लेषण के बाद निकाला है, यानी यह ठोस डेटा पर आधारित चेतावनी है।
वैज्ञानिकों ने भी जताई हैरानी
Met Office में लॉन्ग रेंज फोरकास्टिंग के प्रमुख प्रोफेसर एडम स्केफ ने खुद माना कि उन्होंने अपने करियर में अल नीनो का ऐसा तीव्र स्तर पहले कभी रिकॉर्ड नहीं किया गया। उनके मुताबिक, आमतौर पर एल नीनो के दौरान प्रशांत महासागर की सतह का तापमान 1 से 2 डिग्री तक बढ़ता है। 2 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी को भी बेहद मजबूत El Nino माना जाता है। लेकिन इस बार के अनुमान बताते हैं कि अगर पूर्वानुमान सही साबित हुआ तो यह एल नीनो अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ सकता है और इसका असर पूरी दुनिया के मौसम पर पहले से कहीं अधिक गहरा होगा।
भारत पर क्या पड़ेगा असर?
फिलहाल यह एल नीनो सर्दियों में अपने पीक की ओर बढ़ रहा है। Met Office ने चेतावनी दी है कि इसका असर सिर्फ ट्रॉपिकल यानी उष्णकटिबंधीय इलाकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दक्षिण अफ्रीका और उत्तर-पूर्वी ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों भी इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। लेकिन भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जैसे-जैसे यह एल नीनो मजबूत होगा, इसका सीधा असर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ने की आशंका है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत पहले से ही सामान्य से काफी कम बारिश का सामना कर रहा है।
IMD का पूर्वानुमान भी करता है इसकी पुष्टि
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि यह चेतावनी भारत मौसम विभाग (IMD) के पहले के अनुमान से भी मेल खाती है। IMD ने अपने अप्रैल में जारी दीर्घकालिक पूर्वानुमान में देश में इस बार सामान्य से कम दक्षिण-पश्चिम मानसूनी बारिश की संभावना जताई थी। हालांकि, राहत की बात यह है कि हाल के दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ी है और देश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश भी देखने को मिल रही है। लेकिन विशेषज्ञों की चिंता अभी टली नहीं है।
कमजोर बारिश के साथ बढ़ सकती है गर्मी
अगर मजबूत El Nino का अनुमान सही साबित होता है तो भारत को कमजोर मानसून और बढ़ते तापमान, दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। बारिश में कमी का असर खेती, जल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है, जबकि ज्यादा तापमान के कारण भारत में हीटवेव की घटनाएं बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
Met Office के वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह स्थिति केवल El Nino की वजह से नहीं है। प्राकृतिक जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का बढ़ता प्रभाव भी तापमान और मौसम की चरम घटनाओं पर असर डाल रहा है। वैज्ञानिक फिलहाल प्रशांत महासागर में हो रहे बदलावों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आने वाले महीनों में एल नीनो की तीव्रता और इसके संभावित प्रभाव को लेकर तस्वीर और साफ होगी।
