New CJI Justice Surya Kant: सीजेआई पद संभालने से दो दिन पहले जस्टिस सूर्यकांत ने टाइम्स नाउ नवभारत के संवाददाता से विशेष बातचीत की। उन्होंने साफ कहा कि उनकी सबसे बड़ी चुनौती सुप्रीम कोर्ट और देशभर की अदालतों में बढ़ रहे लंबित मामलों को कम करना होगी। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मिडिएशन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाना उनकी शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
सुप्रीम कोर्ट में कितने मामले लंबित?
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में इस समय करीब 90,000 मामले लंबित हैं और इसका समाधान तत्काल कदमों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि कई मामले निचली अदालतों और हाईकोर्ट में वर्षों से रुके हुए हैं, क्योंकि किसी संबंधित कानूनी प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला लंबित है। उन्होंने कहा कि वे ऐसे मामलों को पहचानेंगे और तुरंत संबंधित पीठों का गठन कर प्राथमिकता से सुनवाई कराएंगे।
उन्होंने बताया कि उनकी पहली कोशिश होगी कि सबसे पुराने मामलों पर तुरंत फैसला हो ताकि न्याय प्रणाली में संतुलन वापस आए। साथ ही उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि लोगों और वकीलों को यह समझाने की जरूरत है कि हाईकोर्ट भी संवैधानिक शक्ति से लैस हैं और सीधे सुप्रीम कोर्ट आने की प्रवृत्ति को कम करना आवश्यक है।
मिडिएशन को बताया गेम चेंजर
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पूरे देश में मिडिएशन को बढ़ावा देना समय की मांग है। उनके अनुसार निजी संस्थाएं बैंक और सार्वजनिक उपक्रम अब अदालतों में लंबी मुकदमेबाजी से बचना चाहते हैं और मिडिएशन को एक व्यावहारिक विकल्प मान रहे हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को मिडिएशन की ट्रेनिंग दी जाए तो देश में अदालतों पर बोझ काफी हद तक घटेगा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तथा राज्य सरकारों के आपसी विवादों में भी मिडिएशन को प्राथमिक विकल्प बनाया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कम्युनिटी मिडिएशन का भी विस्तार करना चाहिए और इसके लिए उपयुक्त माहौल तैयार करना होगा।
न्यायपालिका में AI के इस्तेमाल पर सावधानी की वकालत
एआई को लेकर उन्होंने कहा कि इसके फायदे भी हैं और कुछ आशंकाएं भी। उन्होंने बताया कि एआई को प्रक्रिया संबंधी मामलों में सीमित रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन हर मामले में अंतिम फैसला सिर्फ न्यायाधीश द्वारा ही दिया जाना चाहिए। चैटजीपीटी द्वारा गलत केसों के उदाहरण देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह एक चुनौती है और वे बार के साथ इस पर चर्चा करेंगे कि एआई के उपयोग की सीमा क्या हो और किन परिस्थितियों में इसकी अनुमति दी जाए।
सोशल मीडिया ट्रोलिंग पर भी कही बात
सोशल मीडिया पर न्यायपालिका को लेकर होने वाली ट्रोलिंग पर उन्होंने कहा कि यदि कोई समस्या है तो उसका समाधान भी जरूर निकलेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी अदालत के जज को किसी तरह की आलोचना का दबाव नहीं लेना चाहिए।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में नई बेंच की मांग पर प्रतिक्रिया
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट और लखनऊ बेंच से जुड़े भावनात्मक और व्यावहारिक मुद्दे समझने योग्य हैं। लखनऊ बेंच में इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा है, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट में कई आधुनिक सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश बड़ा राज्य है और लोगों को त्वरित न्याय मिलना चाहिए। हालांकि, किसी भी नई बेंच के गठन पर अंतिम फैसला संसद और संबंधित हाईकोर्ट को मिलकर करना होता है। उन्होंने अंत में कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होगा कि न्याय व्यवस्था तेज निष्पक्ष और सुलभ बने और देश में अदालतों पर बोझ घटे।
