इस बीच, इसरो ने शाम को वह फुटेज भी शेयर किया, जो कि लैंडर विक्रम के "टचडाउन" प्रोसेस का था। लैंडर के इमेजर कैमरा ने इसे कैद किया था, जिसके जरिए दिखाया गया कि इस कैमरा ने टचडाउन (चांद की सतह पर कदम रखने या उसे चूमने) से ठीक पहले चंद्रमा की छवि कैसे खींची थी।
उधर, इसरो के पूर्व प्रमुख जी. माधवन नायर ने बताया कि चंद्रयान-3 की सफलता से भारत की तकनीकी क्षमता और प्रक्षेपण प्रणालियों को स्वीकृति मिलेगी, जिसके चलते देश के अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक अनुबंधों को और बढ़ावा मिलेगा। चंद्रयान-3 की सफलता ग्रहों पर अन्वेषण शुरू की दिशा में भारत का पहला कदम है।
वहीं, वरिष्ठ अंतरिक्ष वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस सफलता ने भविष्य के ग्रहीय मिशनों के लिए चंद्रमा को आधार बिंदू के तौर पर इस्तेमाल करने की संभावना को बढ़ा दिया है। उन्होंने कहा कि इस सफलता ने इस तरह के भविष्य के अन्वेषणों में भाग लेने के लिए भारत की साख को मजबूत किया है।
615 करोड़ रुपए की लागत वाले इस मिशन के जरिए भारत ने अंतरिक्ष अभियानों में बड़ी छलांग लगाई है। हिंदुस्तान का यह चंद्र मिशन बुधवार शाम 6.04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरा, जिससे देश चांद के इस क्षेत्र में उतरने वाला दुनिया का पहला तथा चंद्र सतह पर सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चौथा देश बन गया।
