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'INDIA बनेगा BHARAT, जिन्हें नहीं पसंद वो देश छोड़कर चले जाएं...', बोले BJP के सांसद

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 10, 2023, 06:00 PM IST

India vs Bharat: भाजपा सांसद दिलीप घोष के बयान से विवाद खड़ा हो गया है। उन्होंने एक सम्मेलन के दौरान कहा कि इंडिया का नाम बदलकर भारत कर दिया जाएगा और जिन लोगों को यह नहीं पसंद है वे देश छोड़कर जा सकते हैं।

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भाजपा सांसद दिलीप घोष

Photo : BCCL

India vs Bharat: INDIA या भारत विवाद ने तूल पकड़ना शुरू कर दिया है। अब भाजपा सांसद दिलीप घोष के बयान से विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल, उन्होंने एक सम्मेलन के दौरान कहा कि इंडिया का नाम बदलकर भारत कर दिया जाएगा और जिन लोगों को यह नहीं पसंद है वे देश छोड़कर जा सकते हैं। इस बयान के बाद विपक्षी नेता उन पर निशाना साध रहे हैं।

दरअसल, वरिष्ठ भाजपा नेता ने पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ चाय पर चर्चा का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने यह विवादास्पद टिप्पणी की। उन्होंने कहा, देश के गुलामी के प्रतीकों को बदला जा रहा है। इसी क्रम में इंडिया का नाम बदलकर भारत किया जाएगा।

टीएमसी और सीपीआई पर भी बोला हमला

दिलीप घोष ने इस दौरान टीएमसी और सीपीआई पार्टी पर भी हमला बोला। नाम बदलने का विरोध कर रही दोनों पार्टियों पर हमला बोलते हुए भाजपा सांसद ने कहा, टीएमसी के मेरे दोस्तों को शायद पता नहीं होगा कि वे 'भारत या इंडिया' क्यों कह रहे हैं और इसके पीछे का इतिहास क्या है। उन्होंने कहा, सीपीएम के लोगों के लिए भी बहुत मुश्किल है, क्योंकि उनका ध्यान हमेशा विदेशों पर रहता है।

कोलकाता में विदेशी मूर्तियों को भी हटाया जाएगा

भाजपा नेता ने कहा, विदेश में रहने वाले लोग अलग-अलग शहरों के नाम नहीं बोल सकते, इसलिए उन्होंने अपने नाम बदल दिए। लेकिन अब सभी नाम वापस बदल रहे हैं। उन्होंने कहा, इसी तरह इंडिया अब भारत बन जाएगा। इस दौरान उन्होंने कोलकाता से विदेशियों की सभी मूर्तियां हटाने का भी दावा किया। उन्होंने कहा, कोलकाता की कई सड़कों पर अंग्रेजों की कई मूर्तियां थीं। अब वे कहां हैं? जब बीजेपी सत्ता में आएगी तो हम उन सभी को उखाड़कर विक्टोरिया मेमोरियल हाउस में रख देंगे। उन्होंने कहा, संग्रहालय की वस्तुएं संग्रहालय में ही रहेंगी, सड़कों पर नहीं।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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